बरसात में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, वरना पेट का हाल हो जाएगा बेहाल! तुरंत जान लीजिए
आयुर्वेद में हमारे खानपान और ऋतुओं यानी मौसम का बहुत गहरा नाता बताया गया है। साल की छह अलग-अलग ऋतुओं के दौरान हमारे शरीर के अंदर वात, पित्त और कफ दोष, हमारी पाचन अग्नि और शारीरिक ताकत में लगातार बदलाव आते रहते हैं। यही वजह है कि हमेशा सेहतमंद और तंदुरुस्त रहने के लिए आयुर्वेद में यह सख्त सलाह दी जाती है कि हमें हमेशा मौसम के हिसाब से ही अपने खानपान और डाइट में बदलाव करना चाहिए।
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