पुराने गद्दे से आने लगी चरमराहट और अजीब आवाज? स्प्रिंग, फोम या फ्रेम, असली वजह ऐसे पहचानें
रात को करवट बदलते ही गद्दे से चरमराहट या कोई अजीब आवाज आना पुराने गद्दों की आम शिकायत है। कई लोग इसे अनसुना कर देते हैं, तो कई तुरंत नया गद्दा खरीदने की सोचने लगते हैं। आवाज कभी स्प्रिंग से, कभी फोम के बैठ जाने से और कभी बेड फ्रेम के ढीले जोड़ों से आती है। मरम्मत या बदलाव का कोई भी फैसला लेने से पहले असली वजह पहचानना जरूरी है, क्योंकि हर आवाज का मतलब गद्दा खराब होना नहीं होता।
सबसे आसान परीक्षा यह है कि गद्दे को बेड से उतारकर समतल फर्श पर रख दें और फिर जगह बदल-बदलकर हाथों से दबाएं। अगर फर्श पर रखने के बाद भी आवाज आती है तो समस्या गद्दे के अंदर है। किसी एक ही हिस्से से आवाज आए तो उस जगह का स्प्रिंग टूटा या ढीला हो सकता है। स्प्रिंग वाले गद्दों में यह दिक्कत सबसे आम है। इसके उलट फोम के गद्दे आमतौर पर आवाज नहीं करते, लेकिन पुराना फोम धीरे-धीरे बैठ जाता है, उसमें गड्ढा सा पड़ जाता है और किनारे ढहने लगते हैं। ये बदलाव की ओर इशारा करने वाले संकेत हैं।
पहचान का एक और आसान तरीका है। घर के किसी दूसरे व्यक्ति को बेड पर लेटने के लिए कहें और आप पास खड़े होकर ध्यान से सुनें कि आवाज ठीक किस दिशा से आ रही है, ऊपर से या नीचे से। आवाज का स्थान तय होते ही समस्या की आधा पहेली अपने आप सुलझ जाती है।
अगर वजह फ्रेम के ढीले पेंच हैं तो उन्हें कस देना ही काफी है और इस पर खर्च भी ना के बराबर आता है। स्प्रिंग टूटा हो तो उसकी मरम्मत संभव तो होती है, लेकिन बहुत पुराने गद्दे में मरम्मत के बाद भी आराम पहले जैसा नहीं रहता। आमतौर पर कई साल चल चुके गद्दों में ऐसी समस्याएं बढ़ने ही लगती हैं, क्योंकि अंदर का सामान अपनी ताकत खो चुका होता है। फैसला लेते समय आवाज के साथ-साथ अपनी नींद को भी तौलें। अगर सुबह उठने पर पीठ या कमर में अकड़न रहती है, नींद बार-बार टूटती है और गद्दा बीच से बैठ गया है तो बदलाव पर गंभीरता से सोचने का समय आ गया है।
एक बात और ध्यान दें। लकड़ी के फ्रेम मौसम के साथ भी बदलते हैं। नमी वाले मौसम में लकड़ी हल्की सी फूल जाती है और ठंड में सिकुड़ती है, जिससे जोड़ों से आवाज आना आम बात है। कई बार बेड के नीचे की प्लाई या बिछी हुई चादर का हिलना भी आवाज की वजह बन जाता है, इसलिए जांच के समय इन छोटी चीजों को भी देख लें।