खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं रखा तो कितना कट सकता है जुर्माना? ऐसे जांचें अपने खाते का नियम

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कई बार खाते का विवरण देखने पर पता चलता है कि बैंक ने कुछ रुपये जुर्माने के नाम पर काट लिए हैं। वजह होती है खाते में तय न्यूनतम रकम यानी मिनिमम बैलेंस न रखना। लोग अक्सर पूछते हैं कि यह जुर्माना आखिर कितना लगता है। इसका कोई एक जवाब नहीं है, क्योंकि हर बैंक और हर तरह के खाते के नियम अलग होते हैं। सही जानकारी वही है, जो आपके अपने बैंक ने आपके खाते के लिए तय की है।

जुर्माना कितना लग सकता है और यह किस पर निर्भर है

कुछ बैंकों में यह जुर्माना तय रकम के रूप में होता है, तो कुछ में कम हुई रकम के हिसाब से प्रतिशत के आधार पर कटता है। कुछ खातों में यह कुछ ही रुपयों से शुरू होकर कुछ सौ रुपये तक जा सकता है, जबकि कुछ खातों में कोई जुर्माना लगता ही नहीं। शाखा शहर में है या गांव में, खाता सामान्य बचत खाता है या विशेष सुविधा वाला, इन बातों से भी नियम बदल सकता है। कुछ बैंक महीने के औसत बैलेंस को देखते हैं, यानी पूरे महीने की रकम का औसत तय सीमा से ऊपर रहे तो किसी एक दिन की कमी से जुर्माना नहीं लगता।

यह भी जानना जरूरी है कि कुछ तरह के खातों में न्यूनतम रकम रखने की शर्त आम तौर पर नहीं होती।

जन धन खाते और बुनियादी बचत खाते इसी सोच के साथ खोले गए थे कि गरीब और नए ग्राहक बिना बैलेंस के दबाव के खाता चला सकें। वहीं नौकरी के दौरान खुला सैलरी खाता भी आमतौर पर इसी छूट के साथ चलता है, लेकिन नौकरी छूटने के कुछ समय बाद बैंक उसे सामान्य खाते में बदल सकता है और फिर न्यूनतम रकम का नियम लागू हो सकता है।

अपने खाते का नियम कैसे जांचें

सबसे भरोसेमंद तरीका है बैंक की शुल्क सूची देखना, जिसे शेड्यूल ऑफ चार्जेज कहा जाता है। यह सूची बैंक की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर आम तौर पर उपलब्ध रहती है और शाखा में भी मांगी जा सकती है।

इसमें आपके खाते के प्रकार के सामने न्यूनतम रकम और जुर्माने की जानकारी लिखी होती है। पासबुक या खाता विवरण में हुई हर कटौती की प्रविष्टि ध्यान से देखें, वहां कटौती की वजह संक्षेप में दर्ज रहती है। कोई बात समझ न आए तो शाखा जाकर लिखित जानकारी मांगना सबसे साफ तरीका है।

जुर्माने से बचने के लिए कुछ छोटी आदतें काम आती हैं। खाते में तय सीमा से थोड़ी ज्यादा रकम हमेशा बनाए रखें, ताकि किसी बड़े खर्च से अचानक सीमा न टूटे। फोन पर बैलेंस की चेतावनी चालू रखें। बैंक आमतौर पर नियम बदलने की जानकारी संदेश, ईमेल या पत्र के जरिए देते हैं, इसलिए बैंक की ओर से आए संदेशों को अनदेखा न करें।

कई बार ग्राहक संदेश पढ़ता ही नहीं और बदले हुए नियम के तहत जुर्माना कट जाता है। अगर किसी खाते का इस्तेमाल बंद हो गया है और उसमें बैलेंस रखना मुश्किल है, तो जुर्माना कटने देने के बजाय दूसरा उपयुक्त खाता चुनना या पुराना खाता बंद कराना ज्यादा समझदारी है। नियम समय-समय पर बदल भी सकते हैं, इसलिए साल में एक बार शुल्क सूची दोबारा देख लेना अच्छा रहता है।