रविवार को बाहर घूमने के बाद रात में नींद नहीं आती? सोने का रूटीन बिगड़ने से बचाएं

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रविवार को बाहर घूमना मन को अच्छा लगता है। परिवार या दोस्तों के साथ दिन बिताना, नई जगह देखना और खुली हवा में समय गुजारना छुट्टी का सबसे अच्छा हिस्सा होता है। लेकिन कई लोगों के लिए इस अच्छे दिन का अंत बेचैनी भरी रात से होता है। बिस्तर पर लेटने के बाद भी नींद नहीं आती, मन घूमने की बातों में उलझा रहता है और सोमवार की सुबह थकान के साथ शुरू होती है। ऐसा बार-बार होने पर पूरा हफ्ता भारी लगने लगता है।

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इसका मतलब यह नहीं है कि बाहर घूमना गलत है। असल में दिनभर की गतिविधियां, खाने का समय और शाम का माहौल, ये सब मिलकर रात की नींद पर असर डालते हैं। जब दिन का रूटीन पूरी तरह बदल जाता है, तब शरीर को सोने के समय का संकेत मिलने में देर होती है। इसलिए घूमने का आनंद भी रहे और रात की नींद भी संभली रहे, इसके लिए दिन में ही कुछ छोटी तैयारियां काम आती हैं।

बाहर घूमने के बाद नींद क्यों बिगड़ती है

घूमने के दिन कई चीजें एक साथ बदल जाती हैं। खाने का समय आगे-पीछे हो जाता है, दिन में धूप और शारीरिक गतिविधि ज्यादा होती है और शाम को बातचीत या मनोरंजन में देर हो जाती है।

इन सबका असर शरीर की आंतरिक घड़ी पर पड़ता है। जब सोने का समय रोज से काफी देर हो जाता है, तब नींद आने में समय लगता है।

दूसरी वजह है मन का सक्रिय रहना। घूमने के दौरान देखी गई चीजें, की गई बातें और ली गई तस्वीरें मन में घूमती रहती हैं। रात को जब सब शांत होता है, तब यही बातें फिर से याद आने लगती हैं।

रात का रूटीन पहले से तय करें

घूमने से लौटने के बाद रात को सोने के लिए एक छोटा सा रूटीन बनाना मदद करता है। घर पहुंचकर पहले आराम से हाथ-मुंह धोएं, कपड़े बदलें और कुछ देर शांत बैठें। इसके बाद हल्का भोजन या गर्म दूध लेना भी अच्छा लगता है।

सोने से करीब 1 घंटे पहले फोन और तेज रोशनी वाली स्क्रीन से दूरी बनाना नींद के लिए अच्छा माना जाता है।

सोने का समय रोज के समय के आसपास रखने की कोशिश करें। अगर घूमने के दिन थोड़ी देर भी हो जाए, तो भी उसे बहुत ज्यादा आगे न बढ़ने दें। बिस्तर पर लेटकर दिनभर की बातों को दोहराने की जगह अगले दिन के 2 या 3 जरूरी काम मन में तय कर लें। इससे सोमवार की चिंता कम होती है और मन को यह भरोसा मिलता है कि सब कुछ संभला हुआ है।

कमरे का माहौल भी नींद में मदद करता है। हल्की रोशनी, साफ बिस्तर और शांत वातावरण शरीर को सोने का संकेत देते हैं।

अगर कमरे में दिनभर की भागदौड़ का सामान बिखरा है, तो सोने से पहले उसे थोड़ा समेट लेना भी मन को शांत करता है।

अगली सुबह हल्की रखें

रविवार की रात की नींद सिर्फ रात पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सोमवार की सुबह की योजना पर भी निर्भर करती है। अगर सोमवार की सुबह बहुत सारे काम एक साथ रखे हों, तो रविवार की रात चिंता बढ़ जाती है। इसलिए रविवार की शाम को ही सोमवार के कपड़े, बैग या जरूरी सामान तैयार कर लें। इससे सुबह की भागदौड़ कम होती है और रात को मन शांत रहता है।

सुबह उठने के बाद भी खुद को थोड़ा समय दें।

उठते ही भागदौड़ शुरू करने की जगह कुछ मिनट शांत बैठना, पानी पीना और दिन की शुरुआत धीरे-धीरे करना अच्छा रहता है। इससे पिछली रात की नींद भले ही थोड़ी कम रही हो, दिन फिर भी संभल जाता है।

अंत में यह याद रखना जरूरी है कि कभी-कभी नींद का बिगड़ना सामान्य है। एक खराब रात से पूरा हफ्ता खराब नहीं होता। अगले दिन फिर से अपने सामान्य समय पर सोने की कोशिश करें और रूटीन को धीरे-धीरे वापस लाएं। घूमने का आनंद और अच्छी नींद, दोनों एक साथ संभव हैं, बस थोड़ी सी योजना की जरूरत है।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है।

अगर नींद की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना अच्छा रहेगा।