'मैं तो पूरी सफाई रखती हूं, फिर भी बार-बार UTI क्यों हो जाता है?' डॉक्टर ने बताई यूरिन इन्फेक्शन की वो असल वजह
“मैं अपनी साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखती हूं, फिर भी मुझे बार-बार यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) क्यों हो जाता है?” यह दर्दभरा और परेशान करने वाला सवाल 47 साल की एक महिला का था। वह पिछले डेढ़ साल से बार-बार होने वाले यूरिन इन्फेक्शन से बेहद परेशान थीं। हर बार जब वह डॉक्टर के पास जातीं और दवा लेतीं, तो उन्हें कुछ समय के लिए तो आराम मिल जाता था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद फिर से वही पुरानी और कष्टदायक समस्या लौट आती— पेशाब में तेज जलन होना, बार-बार वॉशरूम की तरफ भागना और हर वक्त असहजता महसूस होना।
उन्हें बार-बार यही लगता रहता था कि शायद उनकी पर्सनल हाइजीन यानी साफ-सफाई में ही कोई कमी रह गई है, जिसके कारण वह इस बीमारी की चपेट में आ रही हैं। लेकिन जब उनकी सही तरीके से पूरी मेडिकल जांच की गई, तो जो सच सामने आया उसने इस पूरी समस्या को देखने और समझने का नजरिया ही हमेशा के लिए बदल दिया।
साफ-सफाई की कमी नहीं, बल्कि शरीर के अंदर छिपा था असली विलेनमेडिकल जांच की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि वह महिला मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बेहद करीब थीं और उनके शरीर में ‘एस्ट्रोजन’ नाम के मुख्य महिला हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे काफी कम हो रहा था।
अक्सर समाज में और खुद महिलाओं के बीच भी यही मान लिया जाता है कि यूटीआई सिर्फ और सिर्फ साफ-सफाई न रखने या गंदे वॉशरूम का इस्तेमाल करने का नतीजा है। लेकिन मेडिकल साइंस की मानें तो महिलाओं में बार-बार होने वाले जिद्दी यूटीआई के पीछे उनके शरीर में समय के साथ हो रहे हार्मोनल बदलाव एक बहुत बड़ी और मुख्य वजह हो सकते हैं। दुर्भाग्य से, इस असली कारण पर अक्सर किसी आम मरीज या घर वालों का ध्यान ही नहीं जाता।
आखिर एस्ट्रोजन हार्मोन और UTI का क्या है गहरा कनेक्शन?महिलाओं के शरीर को सुचारू रूप से चलाने में एस्ट्रोजन हार्मोन एक बहुत ही अहम और जादुई रोल निभाता है।
यह न सिर्फ महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ (प्रजनन स्वास्थ्य) को दुरुस्त रखता है, बल्कि उनके यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) और वैजाइनल हेल्थ की भी सुरक्षा करता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है:जब शरीर में हार्मोन का स्तर सामान्य होता है, तब एस्ट्रोजन का स्तर सही रहने की वजह से वैजाइना में ‘लैक्टोबैसिलस’ नाम के अच्छे और फायदेमंद बैक्टीरिया पर्याप्त मात्रा में जिंदा रहते हैं। ये अच्छे बैक्टीरिया एक ढाल की तरह काम करते हैं और इन्फेक्शन फैलाने वाले बुरे व बाहरी कीटाणुओं को शरीर में पनपने और बढ़ने से रोकते हैं।
इसके विपरीत, जब शरीर में इस हार्मोन की कमी होने लगती है, जैसे कि मेनोपॉज, पेरिमेनोपॉज, बच्चे की डिलीवरी के बाद या कुछ अन्य हार्मोनल असंतुलन के दौरान, तो शरीर में एस्ट्रोजन का ग्राफ तेजी से गिर जाता है। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट और वैजाइना की कुदरती सुरक्षा परत कमजोर पड़ जाती है और सुरक्षा करने वाले अच्छे बैक्टीरिया खत्म होने लगते हैं। इसका सीधा फायदा उठाकर इन्फेक्शन फैलाने वाले हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से अपनी संख्या बढ़ाते हैं और महिला को बार-बार यूटीआई का शिकार बना देते हैं।
हर साधारण यूरिन इन्फेक्शन को बार-बार होने वाला इन्फेक्शन नहीं कहा जा सकता। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर किसी महिला को 6 महीने के भीतर 2 या उससे ज्यादा बार यूटीआई हो जाए, या फिर पूरे 1 साल के अंदर 3 या उससे ज्यादा बार यूटीआई की शिकायत हो… तो मेडिकल की भाषा में इसे ‘रिकरेंट यूटीआई’ (Recurrent UTI) का गंभीर मामला माना जाता है।
ऐसी स्थिति पैदा होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से बार-बार सिर्फ एंटीबायोटिक्स दवाएं खा लेना समझदारी नहीं है और न ही यह इसका सही इलाज है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर के लिए यह गहराई से जांचना बेहद जरूरी हो जाता है कि कहीं इस गंभीर समस्या के पीछे कोई हार्मोनल असंतुलन, डायबिटीज (मधुमेह) या फिर ब्लैडर (मूत्र मार्ग की थैली) के पूरी तरह से खाली न होने जैसी कोई दूसरी अंदरूनी बीमारी तो जिम्मेदार नहीं है।
अब खुद को कोसना और दोष देना पूरी तरह बंद करेंअगर आप या आपके घर की कोई भी महिला बार-बार होने वाले इस दर्दनाक यूटीआई का शिकार हो रही हैं, तो हर बार अपनी साफ-सफाई को ही कटघरे में खड़ा न करें और न ही इसके लिए खुद को जिम्मेदार मानकर मानसिक तनाव लें।
इसे महज एक साधारण या बाहरी इन्फेक्शन समझने की भूल बिल्कुल न करें, क्योंकि यह आपके शरीर के अंदर हो रहे जरूरी जैविक और हार्मोनल बदलावों का एक बड़ा अलार्म या संकेत भी हो सकता है। सही समय पर डॉक्टर के पास जाकर इसकी सटीक जांच कराना और सही मेडिकल गाइडेंस लेना आपके यूरिनरी, वैजाइनल और ओवरऑल रिप्रोडक्टिव हेल्थ को लंबे समय तक पूरी तरह सेहतमंद बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है।