पुराना सोना बेचने जाएं तो कैसे तय होती है उसकी कीमत? वजन, शुद्धता और कटौती का पूरा गणित समझें
पुराना सोना बेचते समय कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर इसकी कीमत कैसे तय होती है। दुकान पर पहुंचने पर वजन, शुद्धता, कटौती और बाजार भाव जैसे शब्द सुनकर अक्सर उलझन हो जाती है। कई लोग बिना समझे ही सौदा कर लेते हैं और बाद में लगता है कि कीमत कम मिली। असल में पुराने सोने की कीमत किसी एक बात पर नहीं, बल्कि कई बातों के मेल से तय होती है। इन बातों को पहले से समझ लेने से आप सही फैसला ले सकते हैं और किसी भी तरह की ठगी से बच सकते हैं।
सोने की कीमत तय करने में सबसे पहले उसका वजन देखा जाता है। लेकिन इसमें एक बात ध्यान रखने वाली है कि गहने में लगे पत्थर, मोती या दूसरे धातु के हिस्सों का वजन अलग कर दिया जाता है, क्योंकि कीमत सिर्फ सोने के वजन पर मिलती है। इसके बाद शुद्धता जांची जाती है। सोने की शुद्धता कैरेट में मापी जाती है, जैसे 24 कैरेट को सबसे शुद्ध माना जाता है, जबकि गहनों में आमतौर पर 22 कैरेट सोना इस्तेमाल होता है। हॉलमार्क वाले गहनों की शुद्धता की जांच आसान होती है, क्योंकि उन पर शुद्धता का निशान होता है।
सोने का बाजार भाव रोज बदलता है, इसलिए किसी एक तय कीमत का दावा करना सही नहीं है। जिस दिन आप सोना बेच रहे हैं, उस दिन के भाव के हिसाब से ही कीमत निकाली जाती है। दुकानदार आमतौर पर शुद्ध सोने के वजन को उस दिन के भाव से गुणा करते हैं, और फिर उसमें से कटौती घटाते हैं। यह कटौती दुकान के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है, इसलिए इसे पहले ही साफ-साफ पूछ लेना चाहिए।
सोना बेचते समय अपना पहचान पत्र साथ रखें, क्योंकि कई जगहों पर यह जरूरी होता है। दुकान से पूरी रसीद जरूर लें, जिसमें वजन, शुद्धता, भाव और कटौती साफ-साफ लिखी हो।