बहुत से लोग इस अनुभव से गुजरते हैं कि सुबह नींद खुलते ही बिस्तर से उठकर खड़े होते ही कुछ सेकंड के लिए आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। कभी साथ में हल्का चक्कर या सिर भारी लगना भी महसूस होता है और फिर कुछ ही पल में सब सामान्य हो जाता है। ऐसा नजारा देखकर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन हर बार यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत नहीं होता। फिर भी इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना भी सही नहीं है, क्योंकि कुछ खास हालात में यही लक्षण शरीर की गंभीर चेतावनी भी हो सकता है।
फर्क समझना ही सबसे जरूरी बात है।
उठते ही अंधेरा छाने की आम वजह क्या मानी जाती है
रात भर लेटे रहने के बाद शरीर का रक्त प्रवाह एक लय में रहता है। जैसे ही कोई अचानक तेजी से उठकर खड़ा होता है, गुरुत्व के कारण खून थोड़ी देर के लिए नीचे की ओर जमा होने लगता है और ऊपरी हिस्से, खासकर दिमाग और आंखों तक रक्त पहुंचने में चंद सेकंड की देर हो जाती है। इसी क्षणिक कमी से आंखों के सामने अंधेरा, धुंधलापन या चक्कर सा महसूस हो सकता है। यह स्थिति आमतौर पर रक्तचाप के इस अचानक बदलाव से जोड़ी जाती है और कुछ सेकंड में शरीर खुद को संभाल लेता है।
कम पानी पीना, रात का खाना हल्का या छूट जाना, गर्मी में ज्यादा पसीना आना और देर तक खाली पेट रहना इस दिक्कत को बढ़ा सकते हैं। कुछ दवाओं के असर से भी सुबह उठने पर ऐसा अनुभव ज्यादा हो सकता है, इसलिए नियमित दवा लेने वाले लोग इस बात का ध्यान रखें।
किन हालात में तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है
अगर यह अंधेरा बार-बार हर रोज होने लगे, देर तक बना रहे या इसके साथ बेहोशी आ जाए, तो बिना देर किए डॉक्टर को दिखाना चाहिए। एक ही आंख में लंबा अंधेरा छाना, नजर का हिस्सा गायब होना या बोलने में लड़खड़ाहट महसूस होना भी गंभीर संकेत माने जाते हैं।
अगर उठने पर अंधेरे के साथ सीने में दर्द, सांस फूलना, तेज धड़कन या पसीना आए, तो इसे सामान्य समझकर बिल्कुल न टालें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें। गिरकर चोट लग जाना भी अपने आप में चेतावनी है। बुजुर्गों, मधुमेह या रक्तचाप की दवा लेने वालों और गर्भवती महिलाओं को ऐसे लक्षणों पर खास तौर पर सतर्क रहना चाहिए। याद रखें, घर पर बैठकर अपने आप किसी बीमारी का नतीजा निकालना सही नहीं है; जांच और सलाह डॉक्टर का काम है।
रोज सुबह अपनाएं ये आसान सावधानियां
सबसे आसान और असरदार उपाय है उठने का तरीका बदलना।
नींद खुलते ही झटके से न उठें। पहले कुछ सेकंड बिस्तर पर ही लेटे-लेटे हाथ-पैर हिलाएं, फिर बैठ जाएं, पैर लटकाकर थोड़ी देर रुकें और उसके बाद धीरे से खड़े हों। अगर खड़े होते ही अंधेरा महसूस हो, तो तुरंत पास की दीवार या फर्नीचर का सहारा लें और बैठ या लेट जाएं, गिरने का जोखिम न लें। दिन भर पर्याप्त पानी पीना और रात को बहुत हल्का या खाली पेट सोने से बचना भी मदद करता है। कमरे में एकदम अंधेरे से तेज रोशनी में जाने की जगह हल्की रोशनी पहले चालू करना आंखों के लिए आरामदायक रहता है। अगर यह परेशानी बार-बार हो रही है, तो उसकी जानकारी अपने डॉक्टर को जरूर दें, ताकि समय पर सही जांच हो सके।