Health Tips: उम्र 30 के पार होते ही क्यों फूलने लगता है शरीर? जानें वजह
अक्सर लोग इसे बढ़ती उम्र का तकाजा, काम का तनाव या बदलती लाइफस्टाइल का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन, लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के डॉ. एल. एच. घोटेकर के अनुसार, इन समस्याओं का एक बड़ा कारण शरीर में कुछ विशेष विटामिन की कमी भी हो सकता है। यदि समय रहते इन कमियों को पहचान लिया जाए, तो स्वास्थ्य को फिर से बेहतर बनाया जा सकता है।
अचानक वजन और थकान बढ़ने का वैज्ञानिक कारण
शरीर एक मशीन की तरह काम करता है, जिसे सुचारू रूप से चलाने के लिए ईंधन यानी विटामिन्स और मिनरल्स की जरूरत होती है। डॉ. घोटेकर बताते हैं कि विशेष रूप से विटामिन D और विटामिन B12 की कमी 30 की उम्र के बाद वजन बढ़ने और थकान का मुख्य कारण बनती है। जब शरीर में ये पोषक तत्व कम हो जाते हैं, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और ऊर्जा का स्तर गिर जाता है।
विटामिन D के प्राकृतिक स्रोत: विटामिन D का सबसे अच्छा और मुफ्त स्रोत सूर्य की रोशनी है। सुबह की गुनगुनी धूप में 15 से 20 मिनट बैठने से शरीर प्राकृतिक रूप से विटामिन D बनाता है। इसके अलावा खान-पान में इन चीजों को शामिल किया जा सकता है:
अचानक वजन और थकान बढ़ने का वैज्ञानिक कारण
शरीर एक मशीन की तरह काम करता है, जिसे सुचारू रूप से चलाने के लिए ईंधन यानी विटामिन्स और मिनरल्स की जरूरत होती है। डॉ. घोटेकर बताते हैं कि विशेष रूप से विटामिन D और विटामिन B12 की कमी 30 की उम्र के बाद वजन बढ़ने और थकान का मुख्य कारण बनती है। जब शरीर में ये पोषक तत्व कम हो जाते हैं, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और ऊर्जा का स्तर गिर जाता है।
1. विटामिन D की कमी और वजन का संबंध
विटामिन D को अक्सर केवल हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका काम इससे कहीं अधिक है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।- मेटाबॉलिज्म पर असर: जब शरीर में विटामिन D की कमी होती है, तो शरीर कैलोरी को ऊर्जा में बदलने के बजाय उसे फैट के रूप में जमा करने लगता है।
- पेट की चर्बी: शोध बताते हैं कि विटामिन D की कमी होने पर विशेष रूप से पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है, जिसे कम करना काफी मुश्किल होता है।
- सुस्ती और मूड: इस विटामिन की कमी से व्यक्ति को हर समय सुस्ती महसूस होती है और मूड भी खराब रहता है, जिससे शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और वजन और तेजी से बढ़ता है।
2. विटामिन B12 की कमी
विटामिन B12 शरीर के 'पावर हाउस' की तरह काम करता है। यह नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखने और लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण के लिए जिम्मेदार है।- थकान का कारण: जब शरीर में विटामिन B12 कम होता है, तो कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति को बिना कोई भारी काम किए भी अत्यधिक थकान महसूस होती है।
- कमजोरी और चक्कर आना: इसकी कमी से मांसपेशियों में कमजोरी, चक्कर आना और काम में मन न लगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
- मेटाबॉलिज्म: विटामिन B12 की कमी से शरीर कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में ठीक से बदल नहीं पाता, जिससे वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
इन कमियों को कैसे दूर करे?
अच्छी खबर यह है कि सही खान-पान और दिनचर्या में थोड़े बदलाव करके इन विटामिन्स की कमी को पूरा किया जा सकता है।You may also like
- Anup Soni wishes mother-in-law Nadira Babbar on b'day: A theatre legend
- Is Farah Khan making a comeback as director and leaving YouTube? She confirms new film after 12 years, but there's a condition
- ED steps up action in Bengal coal smuggling case, summons more traders
- UK drops foreign student targets, shifts focus to overseas education hubs
- PMK legislators walk out of Tamil Nadu Assembly; party MLA Venkateshwaran backs Governor Ravi's actions
विटामिन D के प्राकृतिक स्रोत: विटामिन D का सबसे अच्छा और मुफ्त स्रोत सूर्य की रोशनी है। सुबह की गुनगुनी धूप में 15 से 20 मिनट बैठने से शरीर प्राकृतिक रूप से विटामिन D बनाता है। इसके अलावा खान-पान में इन चीजों को शामिल किया जा सकता है:
- फोर्टिफाइड दूध और अनाज
- दही
- मशरूम
- अंडे का पीला भाग
- दूध, पनीर और छाछ
- फोर्टिफाइड सोया मिल्क या बादाम का दूध
- दालें और साबुत अनाज
- मांसाहारियों के लिए फिश, चिकन और अंडा बेहतरीन स्रोत हैं।
जीवनशैली में जरूरी बदलाव
सिर्फ डाइट ही नहीं, बल्कि कुछ आदतें भी सुधारनी आवश्यक हैं। वजन और थकान को नियंत्रित करने के लिए यह जरूरी है कि:- नियमित व्यायाम: दिन में कम से कम 30 मिनट हल्की एक्सरसाइज या पैदल चलने की आदत डालें।
- पूरी नींद: शरीर को रिकवर होने के लिए 7-8 घंटे की नींद अनिवार्य है।
- जंक फूड से दूरी: प्रोसेस्ड और जंक फूड शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे विटामिन्स का अवशोषण कम हो जाता है।









