रात में तारों की तरह क्यों टिमटिमाती हैं समंदर की लहरें? समझिए bioluminescence का जादू

Newspoint
ज़रिए ज़रा सोचिए कि आप रात के सन्नाटे में किसी अंधेरे समुद्र तट पर खड़े हैं और पैरों के पास आकर एक लहर टूटती है। रेत में गायब होने के बजाय, उस लहर के किनारे अचानक नीली रोशनी से चमक उठते हैं और पानी पर रोशनी की एक हल्की सी लकीर छोड़ जाते हैं।
Hero Image


यह दृश्य देखने में बिल्कुल किसी जादू जैसा लगता है, मानो समंदर ने आसमान के तारों को अपने भीतर समेट लिया हो। लेकिन समुद्र तटों का इस तरह नीले रंग में चमकना कोई जादू नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'बायोलुमिनसेंस' कहा जाता है। इसमें जीवित जीव रासायनिक क्रियाओं के ज़रिए खुद रोशनी पैदा करते हैं।

हालांकि इस खूबसूरत नज़ारे को अक्सर 'चमकता हुआ समंदर' कहा जाता है, लेकिन यह हर जगह या हर रात को देखने को नहीं मिलता।


पानी को नीले रंग में क्या चमकाता है?

समुद्र में यह नीली रोशनी कई तरह के छोटे-छोटे जीवों द्वारा पैदा की जा सकती है, जिनमें प्लैंकटन की कुछ खास प्रजातियां शामिल हैं। कुछ बेहद सूक्ष्म जीव, जिन्हें 'डिनोफ्लैगलेट्स' कहा जाता है, तट के पास के पानी में दिखने वाले इन नीले धमाकों या चमक के लिए जिम्मेदार होते हैं।

इन छोटे जीवों के शरीर के अंदर एक रसायनिक सिस्टम होता है जो रोशनी पैदा करता है। कई मामलों में, 'ल्यूसिफ़ेरिन' नाम का एक अणु किसी एंज़ाइम या अन्य जैविक घटकों की मौजूदगी में ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करता है। अलग-अलग जीवों में यह प्रक्रिया थोड़ी अलग हो सकती है।


जब ये चमकने वाले प्लैंकटन पानी की हलचल, उठती लहरों या इंसान के पैरों के दबाव से हिलते हैं, तो वे रोशनी की छोटी-छोटी लकीरें छोड़ते हैं। सही परिस्थितियों में, ऐसे हज़ारों छोटे जीवों की रोशनी एक साथ मिलकर पूरे किनारे को नीले रंग से जगमगा देती है।

नीला रंग इसलिए सबसे आम है क्योंकि नीला प्रकाश समुद्री पानी में काफी दूर तक आसानी से फैल सकता है, हालांकि अलग-अलग प्रजातियों और देखने के माहौल के हिसाब से इसका रूप बदल भी सकता है।

यह चमक सिर्फ रात में ही क्यों दिखती है?

दिन की तेज़ धूप में इन जीवों द्वारा बनाई गई हल्की रोशनी को देख पाना लगभग असंभव होता है। अंधेरा होने के बाद ही पानी की पृष्ठभूमि में इनकी नीली चमक साफ़ और उभरकर दिखाई देती है।

यह नज़ारा उन समुद्र तटों पर और भी ज़्यादा शानदार लगता है जहाँ कृत्रिम लाइटें या स्ट्रीट लाइट्स बहुत कम होती हैं। जब कोई लहर पानी को हिलाती है, तो ये जीव किनारे पर रोशनी की एक चमकती हुई आउटलाइन बना देते हैं।

You may also like



हालांकि, समुद्र का हर चमकता हुआ हिस्सा सिर्फ प्लैंकटन की वजह से ही नहीं होता। कुछ अन्य समुद्री जीव भी बायोलुमिनसेंस पैदा कर सकते हैं, और इसकी असली वजह उस जगह के वातावरण पर निर्भर करती है।

यह चमक एक रात से दूसरी रात में अलग भी हो सकती है। सही जीवों की मौजूदगी, पानी का बहाव, तापमान और आसपास का माहौल ही यह तय करता है कि आपको यह नज़ारा दिखेगा या नहीं।

पर्यटक इस नीले समंदर को कहाँ देख सकते हैं?

दुनिया के कई हिस्सों में इस तरह के बायोलुमिनसेंट नज़ारे देखे गए हैं, जिनमें मालदीव, प्यूर्टो रिको और अनुकूल समुद्री वातावरण वाले कई अन्य तटीय इलाके शामिल हैं।

भारत में भी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों और तटीय इलाकों में इस नीली रोशनी के देखे जाने की खबरें आती रही हैं। हालांकि, हर बार जाने पर यह दिखे ही, इसकी कोई पक्की गारंटी नहीं होती। इसका समय और चमक का स्तर हमेशा बदलता रहता है।

पर्यटकों को उन टूर पैकेज से थोड़ा सावधान रहना चाहिए जो किसी खास रात को चमकता हुआ बीच दिखाने का पक्का दावा करते हैं। यह एक प्राकृतिक घटना है, कोई तय समय पर चलने वाला लाइट शो नहीं।


क्या यह चमकता हुआ पानी सुरक्षित होता है?

पानी में उठती नीली रोशनी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह पानी तैरने के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। इसके लिए जिम्मेदार जीव और आसपास के पानी की स्थिति बहुत मायने रखती है। कई बार शैवाल के अत्यधिक बढ़ने (एलगल ब्लूम) से पानी में हानिकारक प्रभाव भी हो सकते हैं।

पर्यटकों को हमेशा स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए, बिना वजह समुद्री जीवों को परेशान नहीं करना चाहिए और कभी भी यह नहीं मान लेना चाहिए कि कोई अनोखा प्राकृतिक नज़ारा साफ़ पानी की निशानी है।

रात में चमकते ये समुद्र तट हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति बिना किसी बनावटी लाइट के भी बेहद ख़ूबसूरत नज़ारे बना सकती है। जो चीज़ देखने में किसी जादुई दुनिया जैसी लगती है, वह असल में विज्ञान की एक सुंदर प्रक्रिया है, जो साधारण लहरों की हलचल को कुदरती रोशनी के शो में बदल देती है।

Loving Newspoint? Download the app now
Newspoint