शॉपिंग साइकोलॉजी: क्या आप भी अनचाहे खर्चों के शिकार हैं?
हम सभी के साथ ऐसा होता है—हम घर से एक साधारण लिस्ट लेकर निकलते हैं कि बस नमक, ब्रेड और दूध लाना है, लेकिन जब हम चेकआउट काउंटर पर पहुँचते हैं, तो हमारी ट्रॉली चिप्स, चॉकलेट और नए लॉन्च हुए डिटर्जेंट से भरी होती है। क्या यह हमारी कमज़ोर इच्छाशक्ति है? शायद नहीं। यह वास्तव में Supermarket Marketing Tactics का एक बेहतरीन नमूना है।
स्टोर लेआउट का गणित
क्या आपने कभी गौर किया है कि दूध, अंडे और ब्रेड जैसी बुनियादी ज़रूरत की चीजें हमेशा स्टोर के सबसे पिछले हिस्से में क्यों होती हैं? इसके पीछे एक गहरा Retail Store Layout Strategy है। स्टोर चाहता है कि आप उन बुनियादी चीजों तक पहुँचने के लिए पूरी दुकान के गलियारों से होकर गुजरें। इस दौरान आपकी नज़र दर्जनों ऐसी चीजों पर पड़ती है जिनकी आपको ज़रूरत नहीं थी, लेकिन वे आपकी ट्रॉली में आ जाती हैं।आंखों का खेल: आई-लेवल इज बाय-लेवल
किराने की दुकानों में 'आई-लेवल' को 'बाय-लेवल' माना जाता है। महंगे और ब्रांडेड उत्पाद हमेशा आपकी आंखों के ठीक सामने रखे जाते हैं। इसके विपरीत, सस्ते या स्थानीय ब्रांड शेल्फ में सबसे ऊपर या सबसे नीचे होते हैं। Grocery Store Psychology कहती है कि ग्राहक झुकने या ऊपर देखने के बजाय सामने रखी चीज़ उठाना ज़्यादा पसंद करते हैं।Next Story