गार्डनिंग टिप्स: मिर्च के पौधे में फूल और फल बढ़ाने के लिए अपनाएं ये जादुई तरीके

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घर की बगिया या बालकनी में मिर्च का पौधा लगाना काफी रोमांचक होता है। जब छोटे से बीज से पौधा निकलता है और हरा-भरा होने लगता है, तो मन में ताजी मिर्चों की उम्मीद जागने लगती है। लेकिन कई बार माली और गार्डनिंग के शौकीनों के सामने एक बड़ी समस्या आती है। पौधा तो बहुत स्वस्थ और घना दिखता है, पर उसमें फूल ही नहीं आते या फिर फूल आने से पहले ही झड़ जाते हैं।
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अगर आप भी अपनी रसोई के लिए घर की ताजी मिर्च का इंतज़ार कर रहे हैं और आपका पौधा साथ नहीं दे रहा, तो निराश न हों। अक्सर कुछ छोटी-छोटी कमियों की वजह से ऐसा होता है जिन्हें आप आसानी से ठीक कर सकते हैं।

पर्याप्त धूप है सबसे जरूरी

मिर्च एक ऐसा पौधा है जिसे सूरज की रोशनी बहुत पसंद है। अगर आपने अपने गमले को ऐसी जगह रखा है जहाँ दिन भर में कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप नहीं मिलती, तो पौधे की ऊर्जा सिर्फ पत्तियां बनाने में खर्च होती है। फूल आने के लिए पौधे को भरपूर ऊर्जा चाहिए जो केवल सूरज की रोशनी से मिलती है। इसलिए अपने पौधे को सबसे अधिक रोशनी वाली जगह पर रखें।


पानी देने का सही तरीका

मिट्टी में नमी का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। न तो मिट्टी बिल्कुल सूखी होनी चाहिए और न ही उसमें पानी जमा रहना चाहिए। यदि मिट्टी बहुत ज्यादा गीली रहेगी, तो जड़ें सांस नहीं ले पाएंगी और पौधा तनाव में आकर फूल बनाना बंद कर देगा। वहीं दूसरी ओर, बहुत ज्यादा सूखा रहने पर फूल खिलने से पहले ही सूखकर गिर जाते हैं। उंगली से मिट्टी छूकर देखें, अगर ऊपरी परत सूखी लगे तभी पानी दें।

सही पोषण का चुनाव (खाद का गणित)

अक्सर लोग पौधे को हरा-भरा देखने के लिए उसमें नाइट्रोजन युक्त खाद (जैसे यूरिया) ज्यादा डाल देते हैं। इससे पौधा खूब घना और गहरा हरा तो हो जाता है, लेकिन उसमें फूल नहीं आते। फूल और फल लाने के लिए पौधे को फास्फोरस और पोटेशियम की अधिक आवश्यकता होती है। इसके लिए आप हड्डी का चूरा (बोने मील) या लकड़ी की राख का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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प्रूनिंग या छंटाई का जादू

जब आपका मिर्च का पौधा लगभग एक फीट का हो जाए, तो उसके सबसे ऊपरी हिस्से को हल्का सा तोड़ दें (पिंचिंग)। ऐसा करने से पौधा ऊपर बढ़ने के बजाय बगल से नई शाखाएं निकालने लगता है। जितनी ज्यादा शाखाएं होंगी, फूल आने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी।

घर में बने नेचुरल बूस्टर्स

पौधे की सेहत सुधारने के लिए आप कुछ घरेलू चीजों का उपयोग भी कर सकते हैं। चावल धोने के बाद बचे हुए पानी को फेंकने के बजाय उसे दो-तीन दिन के लिए रख दें और फिर उसमें सादा पानी मिलाकर पौधे की जड़ों में डालें। इसके अलावा, गाय के गोबर और मूंगफली की खली से बना तरल उर्वरक भी मिर्च के पौधों के लिए अमृत समान काम करता है।

हल्का तनाव भी है जरूरी

सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन जब पौधा पूरी तरह विकसित हो जाए, तो पानी की मात्रा में थोड़ी कमी करना उसे फूल देने के लिए प्रेरित कर सकता है। जब पौधे को लगता है कि हालात थोड़े कठिन हो रहे हैं, तो वह अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाने के लिए तेजी से फूल और बीज पैदा करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है।

कीटों से बचाव

सफेद मक्खी या मरोड़ि‍या रोग मिर्च के दुश्मन होते हैं। ये पौधे का रस चूस लेते हैं जिससे वह कमजोर हो जाता है। सप्ताह में एक बार नीम के तेल और थोड़े से साबुन के घोल का छिड़काव करने से पौधा सुरक्षित रहता है और अपनी पूरी ताकत फूल बनाने में लगा पाता है।


इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर आप देखेंगे कि आपका मिर्च का पौधा न केवल फूलों से भर जाएगा, बल्कि आपको साल भर ताजी और तीखी मिर्च भी देता रहेगा। गार्डनिंग धैर्य का काम है, बस थोड़ा सा प्यार और सही देखभाल आपके बगीचे को खुशहाल बना देगी।



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