Best Winter Foods for Pregnancy: प्रेग्नेंट महिलाएं इस तरह बढ़ाएं अपनी इम्यूनिटी

गर्भावस्था का समय हर महिला के लिए शारीरिक और मानसिक बदलावों से भरा होता है। इस दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी सामान्य की तुलना में थोड़ी कम हो जाती है। जब मौसम सर्दियों का हो तो यह जोखिम और भी बढ़ जाता है क्योंकि ठंडी हवाएं और गिरता तापमान संक्रमण का खतरा बढ़ा देते हैं। एक सुरक्षित और स्वस्थ प्रेग्नेंसी के लिए सर्दियों में खान-पान पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है।

इम्यूनिटी बढ़ाना है जरूरी

सर्दियों में वायरल इन्फेक्शन जैसे सर्दी, खांसी और बुखार का खतरा काफी अधिक रहता है। गर्भवती महिलाओं के लिए इन बीमारियों से बचना इसलिए जरूरी है क्योंकि वे सामान्य दवाओं का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं कर सकतीं। इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए विटामिन सी से भरपूर खाद्यों का सेवन फायदेमंद होता है। अदरक और तुलसी का सीमित मात्रा में उपयोग शरीर को प्राकृतिक गर्माहट प्रदान करता है। इसके अलावा, रोजाना गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को सही रखने में मदद करता है।

सर्दियों के सुपरफूड्स

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस मौसम में ऐसी चीजों का चुनाव करना चाहिए जिनकी तासीर गर्म हो और जो पोषण से भरपूर हों। रोजाना हल्दी वाला दूध पीना संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। दालें, हरी सब्जियां, और दलिया जैसे आहार न केवल पचने में आसान होते हैं बल्कि मां और बच्चे दोनों को जरूरी प्रोटीन और विटामिन्स प्रदान करते हैं। ताजी सब्जियों का सूप पीना एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ-साथ पोषण भी देता है।

किन चीजों से बनाए दूरी

सर्दियों में खान-पान का चुनाव करते समय सावधानी बरतना बहुत आवश्यक है। यदि किसी महिला को पहले से ही सर्दी या जुकाम की शिकायत है, तो उन्हें ठंडी तासीर वाले फल जैसे संतरा, केला और अमरूद खाने से बचना चाहिए। फ्रिज में रखे ठंडे दही या ठंडे जूस का सेवन गले में संक्रमण पैदा कर सकता है। ऐसे समय में हमेशा कमरे के तापमान पर रखी हुई चीजें या हल्की गर्म चीजें ही खानी चाहिए।

किन चीजों से करें परहेज

सर्दियों में अक्सर तले-भुने और मसालेदार भोजन की इच्छा बढ़ जाती है लेकिन गर्भवती महिलाओं को बाहर के जंक फूड से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए। बहुत अधिक मात्रा में चाय या कॉफी का सेवन भी नुकसानदेह हो सकता है। कैफीन की अधिक मात्रा नींद में बाधा डाल सकती है और इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी पड़ सकता है। साथ ही, बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी तरह की एंटीबायोटिक या सर्दी की दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है।

सक्रिय दिनचर्या

सही डाइट के साथ-साथ हल्की फिजिकल एक्टिविटी और पर्याप्त आराम भी उतना ही जरूरी है। घर के अंदर हल्का टहलना या योग करना रक्त संचार को बेहतर बनाता है। सर्दियों में धूप लेना भी शरीर के लिए विटामिन डी का एक अच्छा स्रोत है। यदि खांसी या बुखार लंबे समय तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सा परामर्श लेना चाहिए ताकि समय रहते मां और बच्चे की सेहत सुनिश्चित की जा सके।
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