World Asthma Day: मोटापा बढ़ा रहा है अस्थमा की परेशानी? जानें वजन कम करके कैसे मिलेगी राहत
World Asthma Day: अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें सांस लेने में तकलीफ होती है। अगर किसी को पहले से ही अस्थमा है और ऊपर से वजन भी ज्यादा है, तो ये परेशानी और बढ़ सकती है। मोटापा ना सिर्फ शरीर पर असर डालता है, बल्कि फेफड़ों और सांस की ताकत को भी कम कर देता है।
मोटापा कैसे बढ़ाता है अस्थमा की दिक्कत?
जब शरीर में फैट खासकर पेट के पास ज़्यादा होता है, तो वह डायाफ्राम (सांस लेने वाली मुख्य मांसपेशी) को ऊपर की ओर दबाता है। इससे फेफड़े पूरी तरह फैल नहीं पाते और सांस लेने में दिक्कत होती है।
इसके अलावा, मोटे लोगों के शरीर में एक तरह की अंदरूनी सूजन बनी रहती है। फैट टिशू से निकलने वाले केमिकल्स जैसे लेप्टिन और साइटोकाइन्स सांस की नली में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे अस्थमा के लक्षण और खराब हो जाते हैं।
इलाज पर असर
सीके बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास मित्तल बताते हैं कि मोटे लोगों पर अस्थमा की दवाएं उतना असर नहीं करतीं। उन्हें ज्यादा डोज की जरूरत पड़ सकती है और फिर भी बार-बार अस्थमा अटैक आ सकते हैं।
नींद भी हो जाती है खराब
मोटे लोगों को अक्सर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) भी हो जाता है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है। जब OSA और अस्थमा साथ हो जाते हैं, तो नींद की क्वालिटी और हेल्थ दोनों पर बुरा असर पड़ता है।
अच्छी खबर – वजन घटाना लाए सुधार
शोध बताते हैं कि अगर आप अपने शरीर का सिर्फ 5-10% वजन भी घटा लें, तो अस्थमा के लक्षणों में काफी सुधार हो सकता है। दवाएं बेहतर असर करती हैं, अटैक की संभावना कम होती है और सांस लेना आसान हो जाता है।
अगर आप अस्थमा के मरीज हैं और आपका वजन ज्यादा है, तो वजन घटाना आपके लिए एक ज़रूरी कदम है। यह ना सिर्फ अस्थमा के लक्षणों को कम करेगा, बल्कि आपकी नींद, ऊर्जा और दवाओं की जरूरत को भी बेहतर बनाएगा।
मोटापा कैसे बढ़ाता है अस्थमा की दिक्कत?
जब शरीर में फैट खासकर पेट के पास ज़्यादा होता है, तो वह डायाफ्राम (सांस लेने वाली मुख्य मांसपेशी) को ऊपर की ओर दबाता है। इससे फेफड़े पूरी तरह फैल नहीं पाते और सांस लेने में दिक्कत होती है।
इसके अलावा, मोटे लोगों के शरीर में एक तरह की अंदरूनी सूजन बनी रहती है। फैट टिशू से निकलने वाले केमिकल्स जैसे लेप्टिन और साइटोकाइन्स सांस की नली में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे अस्थमा के लक्षण और खराब हो जाते हैं।
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इलाज पर असर
सीके बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास मित्तल बताते हैं कि मोटे लोगों पर अस्थमा की दवाएं उतना असर नहीं करतीं। उन्हें ज्यादा डोज की जरूरत पड़ सकती है और फिर भी बार-बार अस्थमा अटैक आ सकते हैं।
नींद भी हो जाती है खराब
मोटे लोगों को अक्सर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) भी हो जाता है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है। जब OSA और अस्थमा साथ हो जाते हैं, तो नींद की क्वालिटी और हेल्थ दोनों पर बुरा असर पड़ता है।
अच्छी खबर – वजन घटाना लाए सुधार
शोध बताते हैं कि अगर आप अपने शरीर का सिर्फ 5-10% वजन भी घटा लें, तो अस्थमा के लक्षणों में काफी सुधार हो सकता है। दवाएं बेहतर असर करती हैं, अटैक की संभावना कम होती है और सांस लेना आसान हो जाता है।
अगर आप अस्थमा के मरीज हैं और आपका वजन ज्यादा है, तो वजन घटाना आपके लिए एक ज़रूरी कदम है। यह ना सिर्फ अस्थमा के लक्षणों को कम करेगा, बल्कि आपकी नींद, ऊर्जा और दवाओं की जरूरत को भी बेहतर बनाएगा।





