लक्ष्मी पूजन के बाद घर में कहां जलाएं दीपक? जानें धार्मिक मान्यताएं और सही दिशा

दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने के बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाने की परंपरा है। इस त्योहार को रोशनी और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक का प्रकाश अंधकार को दूर करने, सकारात्मकता का स्वागत करने और घर में सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है। यही वजह है कि लोग केवल पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि मुख्य द्वार, आंगन, तुलसी और रसोई में भी दीये जलाते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में दीपक जलाने की परंपराएं और तरीके अलग हो सकते हैं।
Radiant Lakshmi Puja Altar with Diyas


लक्ष्मी पूजन के बाद इन 8 जगहों पर जलाएं दीपक

1. घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दो दीपक

दिवाली पर घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि रोशनी से सजा मुख्य द्वार मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक है। कई परिवार दरवाजे पर रंगोली बनाकर उसके आसपास भी छोटे दीये रखते हैं। इससे घर का प्रवेश द्वार सुंदर दिखाई देता है और त्योहार का उत्साह बढ़ता है।

2. पूजा घर में जलाएं घी का दीपक

लक्ष्मी पूजन के बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाना महत्वपूर्ण माना जाता है। कई परिवार यहां घी का दीपक जलाते हैं। धार्मिक परंपराओं में दीपक को ज्ञान, आस्था और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। पूजा स्थल पर दीपक रखते समय उसे सुरक्षित और स्थिर जगह पर रखें।


3. तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीया

हिंदू परंपरा में तुलसी के पौधे को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है। इसे मां लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है। कार्तिक महीने में तुलसी के पास दीपदान करने की परंपरा है। दिवाली की शाम तुलसी के पास छोटा दीपक जलाकर पूजा करने की मान्यता कई घरों में प्रचलित है।

4. रसोई में जलाएं दीपक

रसोई को घर में अन्न और पोषण का स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे मां अन्नपूर्णा से जोड़ा जाता है। इसलिए दिवाली पर रसोई में भी दीपक जलाने की परंपरा है। हालांकि, गैस चूल्हे, सिलेंडर और ज्वलनशील वस्तुओं से पर्याप्त दूरी रखना जरूरी है।


5. घर के आंगन में सजाएं दीपक

पुराने समय से दिवाली पर आंगन में दीपमाला सजाने की परंपरा रही है। लोग छोटे-छोटे मिट्टी के दीये एक साथ रखकर घर को रोशन करते हैं। मान्यता है कि प्रकाश से घर का वातावरण मंगलमय बनता है।

6. खिड़कियों और बालकनी में रखें दीये

कई परिवार दिवाली पर खिड़कियों और बालकनी में भी दीपक जलाते हैं। इसका उद्देश्य घर के हर हिस्से को रोशनी से सजाना है। खुले स्थान पर दीये रखते समय तेज हवा और उनके गिरने का खतरा ध्यान में रखें।

7. तिजोरी या धन रखने के स्थान पर जलाएं दीपक

धनतेरस और दिवाली पर धन की पूजा करने की परंपरा है। कुछ परिवार तिजोरी या धन रखने वाले स्थान के पास छोटा दीपक जलाते हैं। वास्तु संबंधी मान्यताओं में उत्तर दिशा को कुबेर से जोड़ा जाता है। हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं, इन्हें धन बढ़ने की वैज्ञानिक गारंटी नहीं समझना चाहिए।

8. घर की छत और सीढ़ियों के पास रखें दीपक

दिवाली पर छत, सीढ़ियों और घर के अन्य हिस्सों में भी दीये सजाए जाते हैं। इससे पूरा घर रोशनी से जगमगा उठता है। लेकिन सीढ़ियों पर दीपक इस तरह न रखें कि किसी व्यक्ति को चलने में परेशानी हो या आग लगने का खतरा बने।


दिवाली पर दीपक किस दिशा में जलाना शुभ माना जाता है?

वास्तु और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग दिशाओं का अपना महत्व बताया गया है।

  • पूर्व दिशा: इसे स्वास्थ्य और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है।
  • उत्तर दिशा: धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में इसे धन और समृद्धि से संबंधित माना जाता है।
  • ईशान कोण: इसे पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए शुभ माना जाता है।
  • दक्षिण दिशा: इस दिशा में दीपक जलाने की कुछ अलग परंपराएं भी हैं, विशेषकर यम दीपक के संदर्भ में।
ध्यान रखें कि दीपक की दिशा और स्थान को लेकर सभी परंपराओं में एक जैसी मान्यता नहीं है। अपने परिवार की पूजा पद्धति और स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता दें।

दीपक जलाते समय इन सुरक्षा नियमों का रखें ध्यान

  • दीपक को पर्दों, कागज और कपड़ों से दूर रखें।
  • बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।
  • बालकनी या छत पर तेज हवा में खुले दीये न रखें।
  • इलेक्ट्रिक झालरों के पास तेल या घी के दीपक न जलाएं।
  • घर से बाहर जाते समय खुले दीपकों को जलता हुआ न छोड़ें।

दिवाली पर दीपक जलाने के पीछे छिपा है रोशनी का संदेश

दिवाली पर दीपक जलाना केवल घर सजाने की परंपरा नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। मां लक्ष्मी की पूजा के बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में दीये जलाकर लोग सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। आप भी अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार दीपक जलाएं और त्योहार को सुरक्षित तरीके से मनाएं।