दिवाली 2026: दिवाली पर क्यों जलाए जाते हैं 5 मुख्य दीये? जानिए परंपरा, स्थान और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
दिवाली का त्यौहार पूरे देश में बहुत ही उल्लास और खुशी के साथ मनाया जाता है। लोगों को इस पावन पर्व का सालभर बेसब्री से इंतजार रहता है, और त्यौहार की रौनक बाजारों में पहले से ही दिखने लगती है। दिवाली के शुभ अवसर पर लोग अपने घरों को मिट्टी के दीयों और सुंदर रंग-बिरंगी रोशनी से सजाते हैं। शाम के समय घर-घर में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्री राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटे थे, तब उनके स्वागत में पूरी अयोध्या नगरी को दीयों से सजाया गया था। उसी खुशी में हर साल दिवाली का पर्व मनाया जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली की शाम को 5 विशेष दीये जलाने की परंपरा के पीछे क्या मान्यताएं हैं? हालांकि इसके लिए शास्त्रों में कोई एक कड़ा नियम नहीं है, लेकिन यह परंपरा सदियों से चली आ रही लोक मान्यताओं पर आधारित है। आइए इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानते हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और पंचांग की गणनाओं पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य पाठकों को दिवाली पर्व, पूजा मुहूर्त और दीये जलाने की परंपरा से जुड़ी जानकारी प्रदान करना है।

यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्री राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या वापस लौटे थे, तब उनके स्वागत में पूरी अयोध्या नगरी को दीयों से सजाया गया था। उसी खुशी में हर साल दिवाली का पर्व मनाया जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली की शाम को 5 विशेष दीये जलाने की परंपरा के पीछे क्या मान्यताएं हैं? हालांकि इसके लिए शास्त्रों में कोई एक कड़ा नियम नहीं है, लेकिन यह परंपरा सदियों से चली आ रही लोक मान्यताओं पर आधारित है। आइए इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानते हैं।
दिवाली 2026 कब है?
साल 2026 में दिवाली का त्यौहार रविवार, 8 नवंबर 2026 को पूरे देश में मनाया जाएगा। हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को दिवाली मनाई जाती है। माना जाता है कि जब भगवान राम अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था और तभी से दिवाली पर दीये जलाने की यह सुंदर परंपरा चली आ रही है।पंचतत्वों का प्रतीक हैं ये 5 दीये
अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर जलाए जाने वाले 5 दीये सृष्टि के पांच तत्वों यानी पंचभूतों का प्रतिनिधित्व करते हैं: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। इसके अलावा इन दीयों को अज्ञानता और बुराई के विनाश का प्रतीक भी माना जाता है।मां लक्ष्मी की कृपा और आशीर्वाद
धार्मिक विश्वास के अनुसार, दिवाली की शाम को लक्ष्मी-गणेश की पूजा के बाद 5 मुख्य दीये जलाने से जीवन में खुशहाली आती है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है, धन-दौलत में बढ़ोतरी होती है और जीवन के तमाम कष्टों और परेशानियों से छुटकारा मिलता है।जानिए कहाँ-कहाँ रखे जाते हैं ये 5 दीये:
- पहला दीया: घर के मंदिर में अपने इष्ट देव या कुलदेवता के पास।
- दूसरा दीया: घर की रसोई में।
- तीसरा दीया: पीपल के पेड़ के पास या फिर खेत-खलिहान में।
- चौथा दीया: जहाँ घर में पीने का पानी रखा जाता हो उस स्थान पर।
- पांचवां दीया: घर के मुख्य द्वार यानी मेन गेट पर।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 2026
- अमावस्या तिथि की शुरुआत: 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे से।
- अमावस्या तिथि का समापन: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे तक।
- लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: 8 नवंबर को शाम 5:54 बजे से लेकर शाम 7:50 बजे तक रहेगा।
- प्रदोष काल समय: शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और पंचांग की गणनाओं पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य पाठकों को दिवाली पर्व, पूजा मुहूर्त और दीये जलाने की परंपरा से जुड़ी जानकारी प्रदान करना है।
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