Navratri Day 6: मां कात्यायनी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और आरती
नवरात्रि का छठा दिन 16 अक्टूबर, शुक्रवार को है। मां दुर्गा का छठवां रूप मां कात्यायनी का है और नवरात्रि के छठे दिन इन्हीं की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनकी आराधना करने से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इंसान के रोग, दुख, तकलीफ और डर पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। कहा जाता है कि जो भी भक्त मां कात्यायनी की सच्चे मन से उपासना करता है, उसके सारे पाप धुल जाते हैं और उसकी मनचाही मनोकामना पूरी होती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भवानी की बहुत कठिन तपस्या की थी। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके घर बेटी के रूप में जन्म लिया था। महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण ही इन्हें मां कात्यायनी कहा गया। आइए जानते हैं मां कात्यायनी का स्वरूप, पूजा की आसान विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, मंत्र और आरती।
या
ॐ ह्रीं नमः ॥
स्तुति मंत्र: चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ॥
ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
जय जगमाता जग की महारानी
बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा
कई नाम है कई धाम है
यह स्थान भी तो सुखधाम है
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारा
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी
हर जगह उत्सव होते रहते
हर मंदिर में भगत हैं कहते
कत्यानी रक्षक काया की
ग्रंथि काटे मोह माया की
झूठे मोह से छुडाने वाली
अपना नाम जपाने वाली
बृहस्पतिवार को पूजा करिए
ध्यान कात्यायनी का धरिए
हर संकट को दूर करेगी
भंडारे भरपूर करेगी
जो भी मां को 'चमन' पुकारे
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।
अस्वीकरण:इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। हम यह दावा नहीं करते कि ये पूरी तरह सटीक या सत्य हैं। किसी भी नियम, पूजा विधि या मुहूर्त की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या पंडित से सलाह जरूर लें।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भवानी की बहुत कठिन तपस्या की थी। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके घर बेटी के रूप में जन्म लिया था। महर्षि कात्यायन की पुत्री होने के कारण ही इन्हें मां कात्यायनी कहा गया। आइए जानते हैं मां कात्यायनी का स्वरूप, पूजा की आसान विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, मंत्र और आरती।
मां कात्यायनी का स्वरूप
मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में मां ने तलवार थामी है और नीचे वाले हाथ में सुंदर कमल का फूल है। मां कात्यायनी की सवारी सिंह यानी शेर है।मां कात्यायनी की पूजा कैसे करें?
नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी का आशीर्वाद पाने के लिए सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं। स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद अपने पूजा घर की अच्छी तरह सफाई करें और मां दुर्गा व मां कात्यायनी का ध्यान करें।मां कात्यायनी की पूजा की आसान विधि
- सबसे पहले पूजा की जगह पर मां कात्यायनी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- इसके बाद पूरे पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें और मां के सामने देसी घी का दीपक जलाएं।
- मां को रोली, अक्षत, फूल और सुंदर चुनरी चढ़ाएं।
- मां कात्यायनी को शहद या फिर शहद से बनी मिठाइयों का भोग जरूर लगाएं।
- इसके बाद मां कात्यायनी के मंत्रों का पूरी श्रद्धा के साथ जाप करें।
- अब दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- सबसे अंत में मां की आरती गाएं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि व तरक्की की प्रार्थना करें।
16 अक्टूबर 2026 को पूजा का शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 बजे से सुबह 05:40 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:51 बजे से शाम 06:16 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 05:51 बजे से रात 07:06 बजे तक
मां कात्यायनी का प्रिय भोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी को शहद सबसे ज्यादा प्रिय है। इसलिए इस दिन मां को शहद या शहद से तैयार की गई चीजों का भोग लगाने से जीवन में शुभ फल मिलते हैं।छठे दिन का शुभ रंग और प्रिय फूल
मां कात्यायनी को लाल रंग बेहद पसंद है। इसीलिए नवरात्रि के छठे दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन देवी मां को गुड़हल और गुलाब के फूल अर्पित करने चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं।मां कात्यायनी के सिद्ध मंत्र
बीज मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः ॥या
ॐ ह्रीं नमः ॥
स्तुति मंत्र: चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ॥
ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
मां कात्यायनी की आरती
जय-जय अम्बे जय कात्यायनीजय जगमाता जग की महारानी
बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा
कई नाम है कई धाम है
यह स्थान भी तो सुखधाम है
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारा
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी
हर जगह उत्सव होते रहते
हर मंदिर में भगत हैं कहते
कत्यानी रक्षक काया की
ग्रंथि काटे मोह माया की
झूठे मोह से छुडाने वाली
अपना नाम जपाने वाली
बृहस्पतिवार को पूजा करिए
ध्यान कात्यायनी का धरिए
हर संकट को दूर करेगी
भंडारे भरपूर करेगी
जो भी मां को 'चमन' पुकारे
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।
अस्वीकरण:इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। हम यह दावा नहीं करते कि ये पूरी तरह सटीक या सत्य हैं। किसी भी नियम, पूजा विधि या मुहूर्त की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या पंडित से सलाह जरूर लें।
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