Dhanteras 2026: सिर्फ खरीदारी काफी नहीं, आरोग्य, दीर्घायु और अटूट धन पाने के लिए जरूरी हैं ये 13 प्राचीन और शुभ परंपराएं
भारतीय सनातन संस्कृति, लोक आस्था और पर्व-त्योहारों की इस गौरवशाली परंपरा में दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का आरंभ जिस सबसे पहले और अत्यंत पवित्र उत्सव से होता है, वह है 'धनतेरस 2026' (Dhanteras 2026)। धन, सुख-समृद्धि, वैभव, आरोग्य और दीर्घायु के देवता भगवान धन्वंतरि, धन की देवी मां लक्ष्मी तथा धन के कुबेर देव को समर्पित यह पावन पर्व देश के कोने-कोने में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
धनतेरस के इस पावन पर्व का सबसे मुख्य और ऐतिहासिक आधार आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि का अवतरण है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन परिवार के उत्तम स्वास्थ्य, निरोगी काया और लंबी आयु की कामना के लिए भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए उनके इस पौराणिक मंत्र का सच्चे मन से जाप करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है:
“ऊं नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामय विनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे नमः॥”
2. मां लक्ष्मी और कुबेर देव की संयुक्त पूजा से स्थायी धन की प्राप्तिकेवल धन का आ जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसका लंबे समय तक टिकना और घर में सुरक्षित रहना भी बहुत जरूरी होता है। धनतेरस के दिन भगवान कुबेर के साथ-साथ धन की देवी मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष विधान है। जहां एक तरफ मां लक्ष्मी अपने भक्तों को अपार सुख-समृद्धि और वैभव का आशीर्वाद देती हैं, वहीं दूसरी तरफ भगवान कुबेर को धन का संरक्षक और धन-संचय (Wealth Accumulation) का देवता माना जाता है।
धनतेरस के दिन बाजार से नई झाड़ू खरीदकर घर लाना बेहद प्राचीन और लोकप्रिय परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि झाड़ू को मां लक्ष्मी का ही एक रूप माना गया है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि नई झाड़ू से घर की सफाई करने से घर की सारी दरिद्रता, आलस और नकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है और सकारात्मकता तथा मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है। झाड़ू खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि हमेशा सम संख्या में या एक साफ-सुथरी नई झाड़ू ही घर लेकर आएं।
वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन घर में साबुत नमक (विशेषकर सेंधा नमक या खड़ा नमक) खरीदकर लाना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन नमक खरीदकर घर लाने और उसका एक हिस्सा पोछा लगाते समय पानी में उपयोग करने से घर का वातावरण पूरी तरह शुद्ध हो जाता है। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और घर में सुख-शांति तथा सकारात्मकता का संचार करता है।
5. साबुत धनिया और उसके बीज घर लाना: धन-धान्य में वृद्धि का प्रतीकधनतेरस पर सोना (Gold) खरीदना सदियों से संपन्नता और उच्च आर्थिक स्थिति का प्रतीक माना जाता है।
सोने की तरह ही चांदी (Silver) को भी चंद्रमा का प्रतीक और बेहद शुभ धातु माना गया है। चांदी में शीतलता और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। धनतेरस के दिन चांदी का सिक्का, मूर्ति या छोटी वस्तु खरीदने से घर में सौभाग्य, शांति और यश की प्राप्ति होती है।
धनतेरस के पावन अवसर पर तांबे, पीतल या अन्य धातुओं के नए बर्तन खरीदने की परंपरा भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश से जुड़ी हुई है। यह इस बात का प्रतीक है कि आपके घर में अन्न और जल की कभी कमी नहीं होगी। हालांकि, एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि धनतेरस के दिन खरीदे गए नए बर्तनों को कभी भी घर में खाली नहीं लाना चाहिए। उन्हें घर लाने से पहले उनमें थोड़ा सा चावल, जल, शक्कर या मिठाई जरूर भर लेनी चाहिए।
धनतेरस की शाम को मुख्य रूप से 'यम दीपेदान' यानी यमराज के नाम का दीपक जलाने की अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा है। परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्त रखने और उनकी लंबी आयु की कामना के लिए घर के मुख्य द्वार पर या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके आटे का चौमुखी दीपक जलाया जाता है। यह परंपरा पूर्वजों और यमराज के प्रति सम्मान प्रकट करने का माध्यम है।
10. घर में बरकत और सुरक्षा के लिए 'कुबेर दीपक' प्रज्वलित करनायमराज के दीपक के साथ-साथ धनतेरस की रात को घर में 'कुबेर दीपक' जलाने की भी परंपरा है।
धनतेरस के दिन कई घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में अपनी तिजोरी, लॉकर और नए बही-खातों की पूजा करने की परंपरा निभाई जाती है। चूंकि तिजोरी और बही-खाते सीधे तौर पर हमारे व्यावसायिक जीवन और धन के आदान-प्रदान से जुड़े होते हैं, इसलिए इस दिन इनकी विधिवत पूजा करके मां लक्ष्मी से प्रार्थना की जाती है कि वे आने वाले पूरे वर्ष व्यापार में लाभ और सफलता प्रदान करें।
दीपावली और धनतेरस के आगमन पर घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर चावल के आटे या सिंदूर से मां लक्ष्मी के शुभ चरण (Lakshmi Charan) बनाने की प्राचीन परंपरा है। इन चरणों का मुख हमेशा घर के अंदर की तरफ होना चाहिए, जो इस बात का प्रतीक होता है कि माता लक्ष्मी ने आपके घर में प्रवेश कर लिया है और अब आपके घर में स्थायी रूप से वास करेंगी।
13. जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करनासनातन संस्कृति में किसी भी बड़े पर्व या उत्सव का आनंद तब तक पूरा नहीं होता, जब तक उसमें परोपकार और दान को शामिल न किया जाए।