दीवाली की रात आखिर क्यों खुला रखा जाता है घर का मुख्य दरवाजा, बंद चौखट लौटा सकती है मां लक्ष्मी को
भारतीय सनातन संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और पर्व-त्योहारों की श्रृंखला में दीपावली के पावन पर्व का स्थान सबसे सर्वोच्च और अलौकिक माना गया है। प्रकाश, उमंग, भाईचारे और सुख-समृद्धि का प्रतीक यह महापर्व देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष दीपावली का यह महाउत्सव 8 नवंबर 2026, रविवार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन हर सनातनी परिवार अपने घरों को साफ-सुथरा कर रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और दीपकों की रोशनी से सजाता है ताकि माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का उनके घर में स्थाई रूप से आगमन हो सके।
धार्मिक ग्रंथों और सनातन मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की वह विशेष रात वर्ष की सबसे पवित्र और ऊर्जावान रात्रियों में से एक मानी जाती है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि कार्तिक मास की इस अमावस्या की रात्रि को माता महालक्ष्मी और धन के देवता कुबेर महाराज पृथ्वी लोक पर विचरण करने के लिए निकलते हैं। वे यह देखते हैं कि किस मनुष्य के घर में सात्विकता, पवित्रता, स्वच्छता और प्रकाश का वास है।
एस्ट्रोपत्री के प्रसिद्ध ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, वास्तुशास्त्र और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से घर के मुख्य द्वार को घर का 'मुख' या मुख्य ऊर्जा प्रवेश द्वार माना गया है।
जब आप दीवाली की रात को अपने मुख्य द्वार के दोनों तरफ सुंदर रंगोली सजाते हैं, शुभ-लाभ लिखते हैं और शुद्ध घी या सरसों के तेल के दीपक प्रज्वलित करते हैं, तो वह द्वार एक पवित्र ऊर्जा क्षेत्र में बदल जाता है। द्वार को खुला रखने से घर के भीतर की नकारात्मक और बासी ऊर्जा बाहर निकल जाती है, और ब्रह्मांड की सकारात्मक, शुद्ध तथा दैवीय ऊर्जा का सहज प्रवाह अंदर की ओर होने लगता है।
आज के आधुनिक दौर में, विशेषकर महानगरों और शहरी जीवनशैली में, सुरक्षा कारणों से रातभर घर का मुख्य दरवाजा पूरी तरह से खुला छोड़ देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
इसको लेकर धर्म और ज्योतिष के जानकारों का यह स्पष्ट मत है कि परंपरा का मूल भाव श्रद्धा और प्रकाश से जुड़ा है, न कि किसी जोखिम को मोल लेने से। यदि आप सुरक्षा कारणों से रात को दरवाजा बंद भी करते हैं, तो भी आप इस परंपरा के पूर्ण फल को प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।
यदि आप रात को सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य दरवाजा बंद करते हैं, तो इसका एक बहुत ही सुंदर और शास्त्र-सम्मत विकल्प यह है कि आप दरवाजे के बंद होने से पहले वहां विशेष प्रकाश की व्यवस्था करें। दीवाली की रात मुख्य द्वार की चौखट पर एक 'अखंड दीपक' (Akhand Diya) प्रज्वलित करने का विधान है।
यह अखंड दीपक इस बात का प्रतीक होता है कि भले ही स्थूल रूप से दरवाजा बंद हो चुका है, लेकिन प्रकाश और सकारात्मकता के द्वार दैवीय शक्तियों के लिए हमेशा खुले हुए हैं।