शक्ति और शिव का अद्भुत संगम,श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, जहाँ दर्शन मात्र से मिट जाते हैं जन्मों के पाप

Newspoint

News India Live, Digital Desk: आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में कृष्णा नदी के तट पर नल्लामला पहाड़ियों के बीच स्थित श्रीशैलम मल्लिकार्जुन मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। यह भारत के उन दुर्लभ तीर्थ स्थलों में से एक है, जहाँ भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग और माता पार्वती का शक्तिपीठ एक साथ विराजमान हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीशैलम को 'दक्षिण का कैलाश' कहा जाता है।
Hero Image
आइए जानते हैं इस प्राचीन मंदिर की महिमा, इसका इतिहास और यहाँ पहुँचने का सबसे आसान तरीका।ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ का मिलन: भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुनश्रीशैलम मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भगवान शिव 'मल्लिकार्जुन' के रूप में 12 ज्योतिर्लिंगों में से दूसरे स्थान पर हैं, जबकि माता पार्वती यहाँ 'भ्रामराम्बा' के रूप में 18 महाशक्तिपीठों में से एक हैं। स्कंद पुराण के 'श्रीशैल खंड' में इस स्थान का विस्तार से वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि जब भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच पृथ्वी की परिक्रमा को लेकर विवाद हुआ, तब रुष्ट होकर कार्तिकेय इसी क्रौंच पर्वत (श्रीशैलम) पर आकर रहने लगे थे।
उन्हें मनाने के लिए स्वयं शिव और शक्ति यहाँ आए और ज्योति के रूप में स्थापित हो गए।मंदिर की भव्यता और वास्तुकलाद्रविड़ शैली में निर्मित इस मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशी विजयनगर साम्राज्य के वैभव की याद दिलाती है। मंदिर के चारों ओर ऊंचे गोपुरम और विशाल प्राचीरें हैं। मुख्य गर्भगृह में स्थित ज्योतिर्लिंग बहुत छोटा है, जिसे श्रद्धालु स्वयं स्पर्श कर सकते हैं। मंदिर परिसर के भीतर कई अन्य छोटे मंदिर और मंडप भी हैं, जो अपनी बेजोड़ शिल्पकला के लिए जाने जाते हैं।पाताल गंगा और कृष्ण नदी का आध्यात्मिक महत्वमंदिर से कुछ ही दूरी पर कृष्णा नदी बहती है, जिसे यहाँ 'पाताल गंगा' के नाम से जाना जाता है।
भक्त ज्योतिर्लिंग के दर्शन से पूर्व पाताल गंगा में स्नान करना अत्यंत शुभ मानते हैं। नदी तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों के अलावा अब रोपवे (Ropeway) की सुविधा भी उपलब्ध है, जो पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।कैसे पहुँचें श्रीशैलम? (Travel Guide)हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा हैदराबाद (राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) है, जो यहाँ से लगभग 200 किमी दूर है।रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन मारकापुर रोड (Marpurkpur Road) है, लेकिन हैदराबाद या गुंटूर से आना अधिक सुविधाजनक रहता है।सड़क मार्ग: हैदराबाद, विजयवाड़ा और तिरुपति से नियमित बसें और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।
पहाड़ियों के बीच का रास्ता बेहद रोमांचक और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है।