नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा क्यों की जाती है? जानिए महिषासुर वध की पूरी कथा

Newspoint
नवरात्रि आते ही देशभर में मंदिरों से लेकर घरों तक मां दुर्गा की पूजा शुरू हो जाती है। कहीं घटस्थापना होती है, कहीं दुर्गा सप्तशती का पाठ, तो कहीं भव्य दुर्गा पूजा पंडाल सजते हैं। लेकिन सवाल यह है कि मां दुर्गा की पूजा के लिए नवरात्रि के इन नौ दिनों को ही इतना खास क्यों माना गया है? इसके पीछे केवल एक धार्मिक परम्परा नहीं, बल्कि शक्ति, बुराई पर अच्छाई की जीत और देवी के अलग-अलग स्वरूपों से जुड़ी गहरी पौराणिक मान्यताएं हैं। इसकी सबसे प्रसिद्ध कथा महिषासुर और देवी दुर्गा के युद्ध से जुड़ी है।
Hero Image


महिषासुर से शुरू होती है कहानी

देवी दुर्गा और महिषासुर की कथा का प्रमुख वर्णन देवी माहात्म्य में मिलता है, जो मार्कण्डेय पुराण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कथा के अनुसार महिषासुर ने कठोर तपस्या से ऐसा वरदान प्राप्त किया था कि कोई पुरुष उसे पराजित नहीं कर सकेगा। इस शक्ति के अहंकार में उसने देवताओं को भी युद्ध में हरा दिया।

जब देवता संकट में पड़े, तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित अनेक देवताओं की शक्तियां एकत्र हुईं और उनसे देवी का प्राकट्य हुआ। उन्हें अलग-अलग देवताओं से अस्त्र-शस्त्र प्राप्त हुए और देवी सिंह पर सवार होकर महिषासुर की सेना से युद्ध करने निकलीं।


नौ दिनों तक चला संघर्ष

लोकप्रिय परम्परा में माना जाता है कि देवी और महिषासुर के बीच युद्ध कई दिनों तक चला और नौवीं रात के बाद दसवें दिन देवी ने महिषासुर का वध किया। इसी विजय को विजयादशमी या दशहरा से जोड़ा जाता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि अलग-अलग क्षेत्रों में नवरात्रि की कथाओं और पूजा पद्धतियों में कुछ अंतर मिलता है। इसलिए नौ दिनों की पूरी कथा को एक ही ऐतिहासिक घटना के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह मुख्य रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक परम्पराओं का हिस्सा है।

You may also like



नवरात्रि क्यों बनी शक्ति की उपासना का समय

नवरात्रि का अर्थ ही है नौ रातें। शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में मनाई जाती है और इस दौरान देवी को शक्ति के विभिन्न रूपों में पूजा जाता है। दक्षिण भारत से लेकर उत्तर और पूर्वी भारत तक देवी की पूजा के अलग-अलग स्थानीय स्वरूप देखने को मिलते हैं।

यही वजह है कि नवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं रह गई। यह भारतीय संस्कृति में स्त्री शक्ति, आत्मविश्वास और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक भी बन चुकी है।

आज के समय में इसका महत्व

महिषासुर की कथा को आज केवल देवता और असुर के युद्ध के रूप में पढ़ना जरूरी नहीं है। इसे अहंकार, अन्याय और नकारात्मक शक्तियों पर नियंत्रण के प्रतीक के रूप में भी समझा जाता है।

नवरात्रि का संदेश यही है कि शक्ति केवल बाहरी विजय के लिए नहीं, बल्कि अपने भीतर के डर, कमजोरी और नकारात्मकता से लड़ने के लिए भी जरूरी है।



इसलिए नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के पीछे केवल नौ दिनों की धार्मिक परम्परा नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही शक्ति और विजय की सांस्कृतिक कल्पना है। महिषासुर का वध इस बात का प्रतीक बन गया कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, उसका अंत सम्भव है। शायद यही वजह है कि नवरात्रि की यह कहानी आज भी हर पीढ़ी को उतनी ही प्रासंगिक लगती है।

Loving Newspoint? Download the app now
Newspoint