गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखने से क्यों मना किया जाता है? जानें मान्यता

Newspoint
गणेश चतुर्थी का पावन पर्व आने वाला है और भगवान गणेश के भक्तों ने इसकी तैयारियां जोरों-शोरों से शुरू कर दी हैं। 10 दिनों तक चलने वाला यह गणेशोत्सव बड़े ही उत्साह, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान गणेश के जन्मोत्सव का प्रतीक है।
Hero Image


गणेश चतुर्थी पूजा और विसर्जन की तिथियां

  • चतुर्थी तिथि की शुरुआत: चतुर्थी तिथि सुबह 7:06 बजे शुरू होती है और अगले दिन सुबह 7:44 बजे समाप्त होती है।
  • मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त: दोपहर की पूजा का शुभ समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहता है।
  • गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी): 10 दिनों के उत्सव के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन किया जाता है।
चतुर्थी पर चांद न देखने की परंपरा और उसकी वजह


गणेश चतुर्थी के दिन लोग एक खास परंपरा का पालन करते हैं, और वह है रात को चांद देखने से बचना। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी की रात चांद देखने से व्यक्ति को 'मिथ्या दोष' या 'मिथ्या कलंक' लगता है। इसका सीधा मतलब है कि उस व्यक्ति पर चोरी या किसी अनैतिक काम का झूठा आरोप लग सकता है और समाज में उसकी बदनामी हो सकती है। यह मान्यता एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा पर आधारित है।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक (चूहे) पर सवार होकर जा रहे थे। अपने भारी वजन के कारण बप्पा अचानक लड़खड़ा गए। यह देखकर आकाश में मौजूद चंद्रमा को हंसी आ गई और उन्होंने भगवान गणेश का मजाक उड़ा दिया।


चंद्रमा के इस घमंड और हंसी को देखकर भगवान गणेश अत्यधिक क्रोधित हो गए। गुस्से में आकर उन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया कि जो कोई भी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की रात को चंद्रमा को देखेगा, उस पर चोरी का झूठा आरोप लगेगा और उसे अपमान सहना पड़ेगा।

भगवान श्रीकृष्ण और स्यमंतक मणि की कथा

पंचांग और पुराणों के अनुसार, स्वयं भगवान श्रीकृष्ण से भी एक बार गलती से गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन हो गए थे। इसके परिणामस्वरूप उन पर बहुमूल्य 'स्यमंतक मणि' चुराने का झूठा आरोप लगा था।

जब भगवान श्रीकृष्ण इस झूठे आरोप से चिंतित हुए, तब देवर्षि नारद ने उन्हें इस श्राप और मिथ्या दोष के बारे में बताया। नारद मुनि की सलाह पर भगवान श्रीकृष्ण ने गणेश चतुर्थी का नियमपूर्वक व्रत रखा और भगवान गणेश की पूजा की, जिसके बाद वे इस कलंक और दोष से मुक्त हुए।

You may also like



गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?

यदि अनजाने में या गलती से गणेश चतुर्थी की रात आपसे चांद के दर्शन हो जाएं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इस दोष के प्रभाव से बचने के लिए आप भगवान श्रीकृष्ण की तरह गणेश चतुर्थी का व्रत रख सकते हैं और बप्पा की आराधना कर सकते हैं।

इसके अलावा, शास्त्र में इस दोष से मुक्ति पाने के लिए एक खास मंत्र के जाप की सलाह दी गई है:

सिंहः प्रसेनमवधीतसिंहो जाम्बवता हतः।

सुकुमारक मरोदिस्तव ह्येषा स्यामंतकः॥


चांद देखने से कब और कैसे बचें?

गणेश चतुर्थी के दिन तिथि के समय और घट-बढ़ के आधार पर लोग सावधानी बरतते हैं। यदि चतुर्थी तिथि चल रही हो और वह चंद्रमा के अस्त होने से पहले ही समाप्त हो जाए, तब भी चंद्र दर्शन से बचना चाहिए। मिथ्या दोष के प्रभाव से सुरक्षित रहने के लिए इस दौरान आसमान में चांद की तरफ न देखना ही समझदारी मानी जाती है।

अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और पारंपरिक पंचांगीय जानकारियों पर आधारित है। यह केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से दी जा रही है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, नियम या व्रत का पालन करने से पहले संबंधित विद्वान या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।

Loving Newspoint? Download the app now
Newspoint