BCCI New Sponsorship: आईपीएल में गूगल की एंट्री से बोर्ड पर होगी धनवर्षा, ड्रीम11 के नुकसान की ऐसे होगी भरपाई
एक समय था जब आईपीएल और भारतीय क्रिकेट के स्पॉन्सरशिप बाजार पर ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों का दबदबा था। ये कंपनियां हर सीजन में बीसीसीआई को मोटी कमाई करके देती थीं। लेकिन सरकार के नए नियमों के बाद इन कंपनियों ने अपने हाथ खींच लिए, जिससे बोर्ड के सामने राजस्व का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया। ड्रीम11, जो कभी टीम इंडिया की जर्सी का मुख्य प्रायोजक हुआ करता था, उसे भी पीछे हटना पड़ा।
इस अचानक हुए बदलाव से हुए घाटे को पाटने के लिए बीसीसीआई लगातार नए विकल्पों की तलाश कर रहा था। बोर्ड को एक ऐसे साझेदार की जरूरत थी जो न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो, बल्कि जिसका विजन भी भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया हो।
इस एआई-पावर्ड डील के जरिए बोर्ड को एक ही सीजन में करोड़ों रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। बीसीसीआई जल्द ही इस साझेदारी की आधिकारिक घोषणा कर सकता है। यह डील न केवल बोर्ड की आर्थिक स्थिति को मजबूती देगी, बल्कि आईपीएल को तकनीकी रूप से और भी उन्नत बनाने में मदद करेगी।
इससे पहले भी एआई और क्रिकेट का गठजोड़ देखा जा चुका है। 'चैटजीपीटी' ने विमेंस प्रीमियर लीग 2026 के लिए साझेदारी की थी। खबरों के मुताबिक, बोर्ड ने चैटजीपीटी के साथ दो साल के लिए 16 करोड़ रुपये की डील साइन की थी। यह इस बात का संकेत है कि भविष्य में क्रिकेट और टेक्नोलॉजी का रिश्ता और गहरा होने वाला है।
ड्रीम11 के टीम इंडिया की जर्सी स्पॉन्सर से हटने के बाद भी बाजार में काफी हलचल रही। कई बड़ी कंपनियों ने इस खाली जगह को भरने की कोशिश की। अंततः, यह डील अपोलो टायर्स के साथ फाइनल हुई। जानकारी के अनुसार, अपोलो टायर्स ने इसके लिए 554 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय क्रिकेट की ब्रांड वैल्यू अभी भी आसमान छू रही है, भले ही स्पॉन्सर की कैटेगरी बदल गई हो।
प्रश्न यह उठता है कि आखिर ये विदेशी टेक दिग्गज और एआई कंपनियां भारत और यहाँ के क्रिकेट में इतना पैसा क्यों लगा रही हैं? इसका सीधा जवाब है—भारत की जनसंख्या। एआई कंपनियां इस समय भारत के 140 करोड़ लोगों को प्रभावित करना चाहती हैं। भारत एक विशाल डिजिटल बाजार है और यहाँ क्रिकेट किसी धर्म से कम नहीं है।
इन कंपनियों का मानना है कि भारत के घर-घर तक पहुँचने के लिए क्रिकेट से बेहतर कोई रास्ता नहीं हो सकता। गूगल जेमिनी हो या चैटजीपीटी, ये सभी ब्रांड्स क्रिकेट की लोकप्रियता का फायदा उठाकर अपने यूजर बेस को बढ़ाना चाहते हैं। बीसीसीआई के लिए यह स्थिति फायदे का सौदा साबित हो रही है, जहाँ गेमिंग कंपनियों के जाने से हुए नुकसान की भरपाई अब सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियां कर रही हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि तकनीक और खेल का यह मिलन आईपीएल को किस नई दिशा में ले जाता है।
इस अचानक हुए बदलाव से हुए घाटे को पाटने के लिए बीसीसीआई लगातार नए विकल्पों की तलाश कर रहा था। बोर्ड को एक ऐसे साझेदार की जरूरत थी जो न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो, बल्कि जिसका विजन भी भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया हो।
गूगल की एंट्री
बीसीसीआई की यह तलाश अब गूगल पर जाकर खत्म होती दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल का एआई प्लेटफॉर्म 'जेमिनी' आईपीएल के साथ जुड़ने जा रहा है। यह साझेदारी बीसीसीआई के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है। माना जा रहा है कि अगले तीन सीजनों के लिए गूगल जेमिनी आईपीएल का हिस्सा बनेगा।You may also like
SC directs Delhi, NCR governments to submit action plans on CAQM's recommendations on air pollution- Panchayat Season 5 Release Update: What we know so far, what you can expect in season 5, how season 4 ended, and cast details
Anupam Kher enjoys some Gali cricket on the sets of his next with Sooraj Barjatya- Why Deepinder Goyal resigned as Eternal's CEO? Read former shark's letter to shareholders
- JioHotstar Introduces 'Shop the Look', a Seamless Product Experience Linking Content to Commerce
इस एआई-पावर्ड डील के जरिए बोर्ड को एक ही सीजन में करोड़ों रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। बीसीसीआई जल्द ही इस साझेदारी की आधिकारिक घोषणा कर सकता है। यह डील न केवल बोर्ड की आर्थिक स्थिति को मजबूती देगी, बल्कि आईपीएल को तकनीकी रूप से और भी उन्नत बनाने में मदद करेगी।
एआई कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी
यह केवल गूगल तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार है और भारत का विशाल क्रिकेट बाजार इसके लिए सबसे मुफीद जगह है। यही कारण है कि एआई कंपनियां दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग, आईपीएल में एंट्री लेना चाहती हैं।इससे पहले भी एआई और क्रिकेट का गठजोड़ देखा जा चुका है। 'चैटजीपीटी' ने विमेंस प्रीमियर लीग 2026 के लिए साझेदारी की थी। खबरों के मुताबिक, बोर्ड ने चैटजीपीटी के साथ दो साल के लिए 16 करोड़ रुपये की डील साइन की थी। यह इस बात का संकेत है कि भविष्य में क्रिकेट और टेक्नोलॉजी का रिश्ता और गहरा होने वाला है।
अपोलो टायर्स और स्पॉन्सरशिप का नया दौर
ड्रीम11 के टीम इंडिया की जर्सी स्पॉन्सर से हटने के बाद भी बाजार में काफी हलचल रही। कई बड़ी कंपनियों ने इस खाली जगह को भरने की कोशिश की। अंततः, यह डील अपोलो टायर्स के साथ फाइनल हुई। जानकारी के अनुसार, अपोलो टायर्स ने इसके लिए 554 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय क्रिकेट की ब्रांड वैल्यू अभी भी आसमान छू रही है, भले ही स्पॉन्सर की कैटेगरी बदल गई हो।
भारत पर क्यों है सबकी नजर?
प्रश्न यह उठता है कि आखिर ये विदेशी टेक दिग्गज और एआई कंपनियां भारत और यहाँ के क्रिकेट में इतना पैसा क्यों लगा रही हैं? इसका सीधा जवाब है—भारत की जनसंख्या। एआई कंपनियां इस समय भारत के 140 करोड़ लोगों को प्रभावित करना चाहती हैं। भारत एक विशाल डिजिटल बाजार है और यहाँ क्रिकेट किसी धर्म से कम नहीं है। इन कंपनियों का मानना है कि भारत के घर-घर तक पहुँचने के लिए क्रिकेट से बेहतर कोई रास्ता नहीं हो सकता। गूगल जेमिनी हो या चैटजीपीटी, ये सभी ब्रांड्स क्रिकेट की लोकप्रियता का फायदा उठाकर अपने यूजर बेस को बढ़ाना चाहते हैं। बीसीसीआई के लिए यह स्थिति फायदे का सौदा साबित हो रही है, जहाँ गेमिंग कंपनियों के जाने से हुए नुकसान की भरपाई अब सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियां कर रही हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि तकनीक और खेल का यह मिलन आईपीएल को किस नई दिशा में ले जाता है।









