On This Day: जब कपिल और गावस्कर ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर किया, भारत ने रचा था इतिहास
साल 1952 के बाद से भारतीय टीम पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी टेस्ट सीरीज जीतने में सफल नहीं हो पाई थी। साल 1979-80 में जब पाकिस्तानी टीम भारत दौरे पर आई, तो हर किसी की निगाहें इस रिकॉर्ड को बदलने पर टिकी थीं। छह मैचों की इस सीरीज के पहले चार मैचों के बाद भारत 1-0 से आगे था। पांचवां टेस्ट मैच मद्रास के चेपॉक स्टेडियम में खेला जाना था। यह मैच भारत के लिए सीरीज पर कब्जा करने का सुनहरा मौका था।
गावस्कर ने क्रीज पर एक खूंटा गाड़ दिया। उन्होंने लगभग 10 घंटे तक बल्लेबाजी की। उनकी इस मैराथन पारी में संयम और तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला। पाकिस्तानी गेंदबाज एड़ी-चोटी का जोर लगाते रहे, लेकिन गावस्कर का डिफेंस भेदना उनके लिए नामुमकिन हो गया। गावस्कर ने 166 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी ने न केवल पाकिस्तानी गेंदबाजों को शारीरिक और मानसिक रूप से थका दिया, बल्कि भारत को 430 रनों के विशाल स्कोर तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। भारत को पहली पारी के आधार पर 158 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त मिली।
सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं, कपिल देव ने बल्ले से भी कमाल दिखाया। जब भारत अपनी पहली पारी में बल्लेबाजी कर रहा था, तब उन्होंने 84 रनों की तेजतर्रार पारी खेली थी। उनकी इस पारी ने भारत की बढ़त को और मजबूत कर दिया था। गेंद और बल्ले दोनों से उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें इस जीत का बड़ा नायक बना दिया।
इस जीत का महत्व सिर्फ एक मैच जीतने तक सीमित नहीं था। इस जीत के साथ ही भारत ने सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली थी। यह 1952 के बाद यानी पूरे 27 साल बाद पहला मौका था जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई टेस्ट सीरीज जीती थी। चेपॉक के मैदान पर मिली यह जीत और गावस्कर-कपिल की वह जुगलबंदी आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में एक मीठी याद बनकर बसी हुई है।
सुनील गावस्कर के 166 रन
इस मैच में टॉस जीतकर भारत ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला नहीं किया था, बल्कि पहले पाकिस्तान को बल्लेबाजी का न्योता दिया। पाकिस्तान की पहली पारी 272 रनों पर सिमट गई। इसके बाद जब भारतीय टीम बल्लेबाजी के लिए उतरी, तो 'लिटिल मास्टर' सुनील गावस्कर ने वह किया जिसके लिए वे पूरी दुनिया में मशहूर थे।गावस्कर ने क्रीज पर एक खूंटा गाड़ दिया। उन्होंने लगभग 10 घंटे तक बल्लेबाजी की। उनकी इस मैराथन पारी में संयम और तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला। पाकिस्तानी गेंदबाज एड़ी-चोटी का जोर लगाते रहे, लेकिन गावस्कर का डिफेंस भेदना उनके लिए नामुमकिन हो गया। गावस्कर ने 166 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी ने न केवल पाकिस्तानी गेंदबाजों को शारीरिक और मानसिक रूप से थका दिया, बल्कि भारत को 430 रनों के विशाल स्कोर तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। भारत को पहली पारी के आधार पर 158 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त मिली।
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कपिल देव का तूफान
अगर गावस्कर ने बल्लेबाजी से पाकिस्तान को तोड़ा, तो कपिल देव ने अपनी गेंदबाजी से उन्हें बिखेर दिया। 'हरियाणा हरिकेन' के नाम से मशहूर कपिल देव इस मैच में अपने शबाब पर थे। उन्होंने मैच में कुल 11 विकेट झटके। पहली पारी में उन्होंने 4 विकेट लिए थे, लेकिन दूसरी पारी में उनकी गेंदबाजी और भी घातक हो गई। उन्होंने दूसरी पारी में 7 पाकिस्तानी बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया। कपिल ने पूरे मैच में सिर्फ 136 रन खर्च किए और 11 विकेट अपने नाम किए।सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं, कपिल देव ने बल्ले से भी कमाल दिखाया। जब भारत अपनी पहली पारी में बल्लेबाजी कर रहा था, तब उन्होंने 84 रनों की तेजतर्रार पारी खेली थी। उनकी इस पारी ने भारत की बढ़त को और मजबूत कर दिया था। गेंद और बल्ले दोनों से उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें इस जीत का बड़ा नायक बना दिया।
ऐतिहासिक जीत
दूसरी पारी में कपिल देव के कहर के सामने पाकिस्तानी टीम 233 रनों पर ढेर हो गई। भारत को जीत के लिए एक बहुत ही छोटा लक्ष्य मिला, जिसे टीम ने बिना कोई विकेट खोए हासिल कर लिया। भारत ने यह मैच 10 विकेट से जीता।इस जीत का महत्व सिर्फ एक मैच जीतने तक सीमित नहीं था। इस जीत के साथ ही भारत ने सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली थी। यह 1952 के बाद यानी पूरे 27 साल बाद पहला मौका था जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई टेस्ट सीरीज जीती थी। चेपॉक के मैदान पर मिली यह जीत और गावस्कर-कपिल की वह जुगलबंदी आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में एक मीठी याद बनकर बसी हुई है।









