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On this day: जब सहवाग और द्रविड़ ने पाकिस्तान में मचाया था कोहराम, बस 4 रन से चूक गया था वर्ल्ड रिकॉर्ड

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मैच की शुरुआत ही गेंदबाजों के लिए किसी बुरे सपने जैसी हुई थी। पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और लाहौर की पाटा विकेट पर रनों का अंबार लगा दिया। यूनिस खान, मोहम्मद यूसुफ, शाहिद अफरीदी और कामरान अकमल ने मिलकर भारतीय गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। पाकिस्तान ने अपनी पहली पारी 679 रनों के विशाल स्कोर पर घोषित की।
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इतने बड़े स्कोर को देखकर किसी भी टीम के कंधे झुक सकते थे। क्रिकेट पंडित मान रहे थे कि भारत दबाव में बिखर जाएगा या फिर फॉलोऑन बचाने के लिए संघर्ष करेगा। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि मैदान पर 'मुल्तान का सुल्तान' वीरेंद्र सहवाग और 'द वॉल' राहुल द्रविड़ उतरने वाले हैं।

सहवाग और द्रविड़ का 'फायर एंड आइस' शो

मैदान पर उतरते ही वीरेंद्र सहवाग ने अपने परिचित अंदाज में बल्लेबाजी शुरू की। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था कि स्कोरबोर्ड पर 679 रन टंगे हैं। दूसरे छोर पर राहुल द्रविड़ उनका बखूबी साथ निभा रहे थे। यह वह दौर था जब शोएब अख्तर, मोहम्मद सामी और नावेद-उल-हसन जैसे गेंदबाज अपनी गति के लिए जाने जाते थे, लेकिन उस दिन वे सब बेबस नजर आए।


सहवाग ने पाकिस्तानी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं। देखते ही देखते भारत ने बिना कोई विकेट खोए 400 का आंकड़ा पार कर लिया। यह नजारा अद्भुत था। एक तरफ सहवाग की आक्रामक बल्लेबाजी थी जिसमें चौकों की झड़ी लगी थी, तो दूसरी तरफ द्रविड़ का धैर्य और क्लास था।

इतिहास रचने के करीब

मैच का चौथा दिन खत्म होने तक भारत का स्कोर बिना किसी नुकसान के 403 रन था। सहवाग और द्रविड़ की जोड़ी उस समय के सबसे बड़े रिकॉर्ड के मुहाने पर खड़ी थी। यह रिकॉर्ड था पंकज रॉय और वीनू मंकड की 413 रनों की ओपनिंग साझेदारी का, जो पिछले 50 सालों से अटूट था। पूरी दुनिया की निगाहें लाहौर पर टिकी थीं। हर कोई मान रहा था कि पांचवें दिन का खेल शुरू होते ही यह 50 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त हो जाएगा क्योंकि दोनों बल्लेबाज पूरी तरह सेट थे और रिकॉर्ड तोड़ने के लिए महज 11 रनों की दरकार थी।

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कुदरत का खेल

लेकिन पांचवें दिन की सुबह वह खबर आई जिसे कोई क्रिकेट प्रेमी सुनना नहीं चाहता था। लाहौर में घना कोहरा छाया हुआ था। विजिबिलिटी इतनी कम थी कि खेल शुरू करना नामुमकिन था। समय बीतता गया और ओवर कम होते गए। अंपायरों ने कई बार निरीक्षण किया, लेकिन मौसम साफ नहीं हुआ।

आखिरकार, जब थोड़ा खेल संभव हुआ तो पूरे दिन में केवल 14 गेंदें ही फेंकी जा सकीं। और यही क्रिकेट की विडंबना देखिए, इन्हीं 14 गेंदों के भीतर भारत का सपना टूट गया। स्कोर 410 रन पर पहुंचा ही था कि वीरेंद्र सहवाग आउट हो गए। वह 254 रन बनाकर पवेलियन लौटे। भारत मंकड और रॉय के 413 रनों के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करने से सिर्फ 3 रन और उसे तोड़ने से 4 रन दूर रह गया।

एक यादगार पारी

भले ही वह विश्व रिकॉर्ड नहीं टूट पाया, लेकिन सहवाग और द्रविड़ ने जो किया वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। सहवाग ने अपनी 254 रनों की पारी में 47 चौके और एक छक्का लगाया था। उनका स्ट्राइक रेट किसी वनडे मैच जैसा था। वहीं, कप्तान राहुल द्रविड़ 128 रन बनाकर नाबाद रहे।

यह मैच अंततः ड्रॉ रहा, लेकिन इस मैच ने सिखा दिया कि क्रिकेट में रिकॉर्ड और रोमांच का रिश्ता कितना गहरा होता है। तकदीर का खेल देखिए, जिस रिकॉर्ड को सहवाग और द्रविड़ 4 रन से चूक गए थे, उसे दो साल बाद 2008 में दक्षिण अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ और नील मैकेंजी ने 415 रन बनाकर तोड़ दिया। लेकिन लाहौर की उस धुंधली सुबह और 410 रनों की उस साझेदारी की कसक आज भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिल में ताज़ा है।




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