सनराइजर्स हैदराबाद की ओनर काव्या मारन का क्रिकेट और अपनी टीम के प्रति जुनून किसी से छिपा नहीं है। मैदान पर टीम के हर चौके-छक्के पर उनका उछलना और विकेट गिरने पर मायूस होना फैंस के दिलों को छू जाता है। लेकिन आईपीएल 2026 के एलिमिनेटर मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स के हाथों मिली करारी हार के बाद एक बार फिर काव्या मारन का दिल टूट गया। सोशल मीडिया पर फैंस काव्या मारन के उदास चेहरे को देखकर उनके लिए बेहद बुरा महसूस कर रहे हैं।
फैंस का गुस्सा उन बड़े और नामी खिलाड़ियों पर फूट रहा है, जिन्होंने पूरे सीजन अपनी भूमिका या मोटी रकम के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया और अहम नॉकआउट मुकाबले में टीम को मझधार में छोड़ दिया। इस शर्मनाक प्रदर्शन के बाद माना जा रहा है कि आगामी बड़े बदलावों के तहत आईपीएल 2027 से पहले कुछ खिलाड़ियों की सनराइजर्स हैदराबाद से छुट्टी होना लगभग तय है। काव्या मारन ने नीलामी में पानी की तरह पैसा बहाकर दुनिया की सबसे खतरनाक और संतुलित टीम बनाने की कोशिश की थी। लेकिन पिछले तीन सालों का इतिहास देखें, तो टीम ने उन्हें सिर्फ और सिर्फ दर्द ही दिया है।
2024 में फाइनल का दर्द: शानदार सफर तय करने के बाद SRH की टीम फाइनल में केकेआर के सामने ताश के पत्तों की तरह ढह गई और उपविजेता रही। 2025 में फ्लॉप शो: टीम प्लेऑफ तक भी नहीं पहुंच सकी और अंक तालिका में छठे नंबर पर रही। 2026 में एलिमिनेटर में हार: इस सीजन में खतरनाक खेल दिखाने के बाद भी सबसे महत्वपूर्ण एलिमिनेटर मैच में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ पूरी टीम बिखर गई।
फैंस का गुस्सा इस बात पर है कि टीम में अभिषेक शर्मा और ट्रेविस हेड जैसे बड़े-बड़े महारथी शामिल हैं, लेकिन ये अहम मैचों में नहीं चलते। जहां रन बनाने की कोई जरूरत नहीं होती, वहां ये रिकॉर्ड तोड़ पारियां खेलते हैं, लेकिन जैसे ही करो या मरो का मुकाबला आता है, ये पूरी तरह फ्लॉप हो जाते हैं। अभिषेक शर्मा का शॉट सिलेक्शन जहां बच्चों वाली क्रिकेट जैसा नजर आता है, वहीं ट्रेविस हेड का रवैया बिल्कुल नासमझ लगता है। सही वक्त पर ईशान किशन का बल्ला भी नहीं चला। इन सबने मिलकर आखिरकार काव्या मारन का दिल तोड़ ही दिया।

लियाम लिविंगस्टोन: 13 करोड़ की भारी-भरकम कीमत के बावजूद इस सीजन ज्यादा मौके नहीं मिले, मेगा ऑक्शन में रिलीज होना तय। हर्षल पटेल: डेथ ओवरों के स्पेशलिस्ट के रूप में आए, लेकिन 5 मैचों में एक भी विकेट न लेकर पूरी तरह फ्लॉप रहे। जयदेव उनादकट: 4 मैचों में केवल 4 विकेट लिए और 10.91 के बेहद खराब इकॉनमी रेट से बहुत महंगे साबित हुए। हर्ष दुबे: गेंदबाजी में 8 विकेट लिए, लेकिन बतौर ऑलराउंडर पूरे सीजन बल्ले से सिर्फ 13 रन ही बना सके। गेराल्ड कोएत्जी: रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम से जुड़े, लेकिन विदेशी कॉम्बिनेशन के कारण एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला।