On This Day in 1984: दुनिया को मिला क्रिकेट का सुपरमैन AB de Villiers जो हर कोने में शॉट मार सकता था
साल 1984 में आज ही के दिन एक ऐसे खिलाड़ी का जन्म हुआ क्रिकेट का जादूगर भी कहा जा सकता है, जिनका नाम AB de Villiers है। AB de Villiers पैदाइशी खिलाड़ी थे, उनमें हुनर की कोई कमी नहीं थी। वो टेनिस, गोल्फ या रग्बी जैसे खेलो में भी बहुत अच्छे थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आखिर में क्रिकेट को उन्होने अपनी जिंदगी बनाने का फैसला किया।

करियर की शुरुआत
AB de Villiers ने साल 2004 में अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआत में सब कुछ बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन फिर अगले कुछ सालों तक उनका प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कभी वो बहुत अच्छा खेलते तो कभी जल्दी आउट हो जाते। लेकिन फिर आया साल 2008, ये साल उनके करियर के लिए बहुत यादगार साबित हुआ। इसी साल उन्होंने दुनिया को दिखाया कि वो क्या कर सकते हैं और यहीं से उनके असली सफर की शुरुआत हुई।2008 का वो शानदार साल
साल 2008 में AB de Villiers ने भारत के खिलाफ दोहरा शतक लगाया। लेकिन वो यहीं नहीं रुके, उन्होंने हेडिंग्ले के मैदान पर 174 रनों की मैच जिताने वाली पारी खेली। इसके बाद पर्थ में भी उन्होंने 106 रन बना कर नॉट आउट रहे। उनकी इन पारियों की वजह से साउथ अफ्रीका ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों को उनके ही घर में हराया। इन जीतों में AB de Villiers का रोल बहुत बड़ा रहा।रिकॉर्ड तोड़ने का सिलसिला
साल 2010 में उन्होंने एक और बड़ा कारनामा किया। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ खेलते हुए नाबाद 278 रन बनाए। ऐसा करके उन्होंने गैरी कर्स्टन का रिकॉर्ड तोड़ दिया जो साउथ अफ्रीका के लिए सबसे बड़ा स्कोर था। इसके अगले ही साल यानी 2011 में उन्हें साउथ अफ्रीका की वनडे टीम का कप्तान बना दिया गया। ये उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी थी। लेकिन उनका बल्ला चलता रहा। साल 2015 की शुरुआत में उन्होंने दुनिया को हैरान कर दिया। उन्होंने वनडे क्रिकेट में सबसे तेज़ शतक लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने सिर्फ 31 गेंदों में शतक जड़ दिया था।सबसे तेज़ 150 रन
सिर्फ शतक ही नहीं, सबसे तेज़ 150 रन बनाने का रिकॉर्ड भी उन्होंने अपने नाम किया। उन्होंने ये कारनामा सिर्फ 64 गेंदों में कर दिखाया। इन पारियों ने ये साबित कर दिया कि वो हर तरह के शॉट खेलने वाले बल्लेबाज़ हैं। वो मैदान के किसी भी कोने में शॉट मार सकते थे। उनकी इसी काबिलियत ने उन्हें पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया। गेंदबाज उनके सामने बॉलिंग करने से डरते थे क्योंकि वो कब क्या करेंगे, ये किसी को पता नहीं होता था।कप्तानी और चोट की परेशानी
जनवरी 2016 में AB de Villiers को टेस्ट टीम की कप्तानी भी सौंपी गई। लेकिन बतौर टेस्ट कप्तान उनका सफर बहुत छोटा रहा। चोट लगने की वजह से वो खेल से दूर रहे। उनकी गैरमौजूदगी में फाफ डु प्लेसिस ने कप्तानी संभाली। डु प्लेसिस ने कप्तान के तौर पर बहुत अच्छा काम किया। उन्होंने टीम को अच्छे से संभाला। इसी वजह से बाद में कप्तानी की जिम्मेदारी डु प्लेसिस को ही दे दी गई।क्रिकेट को अलविदा
AB de Villiers ने अपने पूरे करियर में दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। वो जब भी मैदान पर आते थे, लोग उनसे बड़ी पारियों की उम्मीद करते थे। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट को एक नया रूप दिया।। साल 2018 में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया।Next Story