जब आप फोन इस्तेमाल नहीं कर रहे होते, तब भी वह आपकी हरकत कैसे मापता है?

फोन को जेब में रखकर चलिए और कुछ देर बाद फिटनेस ऐप खोलिए। कई बार उसमें आपके कदम, गतिविधि या मूवमेंट का रिकॉर्ड पहले से मौजूद होता है। यह देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब स्क्रीन बंद थी और आपने कोई ऐप इस्तेमाल नहीं किया, तब फोन यह सब कैसे जानता रहा? इसका जवाब स्मार्टफोन के motion sensors में छिपा है। एक्सेलेरोमीटर, जायरोस्कोप और कुछ डिवाइसों में अन्य सेंसर लगातार या जरूरत के अनुसार छोटे-छोटे संकेत उपलब्ध करा सकते हैं। Android के अनुसार motion sensors फोन के tilt, shake, rotation और movement जैसी गतिविधियों का पता लगाने में इस्तेमाल होते हैं।
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एक्सेलेरोमीटर फोन की हरकत पकड़ता है

एक्सेलेरोमीटर फोन के तीन अक्षों पर acceleration मापता है। इसका मतलब यह है कि फोन सिर्फ यह नहीं जानता कि वह आगे या पीछे जा रहा है, बल्कि उसकी गति में बदलाव को भी पहचान सकता है।

जब फोन आपकी जेब में होता है, तो आपके चलने के दौरान होने वाली छोटी-छोटी गति सेंसर के डेटा में दिखाई दे सकती है। Android के दस्तावेज के मुताबिक लगभग हर Android फोन में accelerometer मौजूद होता है।


कदम गिनने का खेल थोड़ा अलग है

फोन हर कदम को सीधे एक अलग बटन दबने की तरह नहीं देखता। सेंसर से मिलने वाले acceleration pattern का विश्लेषण करके सॉफ्टवेयर दोहराव वाली गतिविधियों को पहचान सकता है।

इसी आधार पर कुछ devices step detection या step counting जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। Android sensor framework में significant motion, step counter और step detector जैसे sensor types भी सूचीबद्ध हैं।


जायरोस्कोप क्या जोड़ता है?

जायरोस्कोप rotation को मापता है। यदि आप फोन को घुमाते हैं, झुकाते हैं या दिशा बदलते हैं, तो यह उस rotational movement की जानकारी देता है।

इन सेंसरों का उपयोग केवल फिटनेस के लिए नहीं होता। गेमिंग, स्क्रीन rotation, navigation, camera stabilisation और augmented reality जैसी सुविधाएं भी motion data पर निर्भर कर सकती हैं।

स्क्रीन बंद होने का मतलब फोन पूरी तरह निष्क्रिय नहीं है

स्क्रीन बंद होने पर भी फोन के अंदर कुछ हार्डवेयर और सिस्टम प्रक्रियाएं काम कर सकती हैं। हालांकि हर ऐप को हर समय सेंसर डेटा तक समान पहुंच नहीं होती और operating system power तथा privacy के लिए अलग-अलग सीमाएं लागू कर सकता है।

यानी आपका स्मार्टफोन जेब में रहते हुए कोई जादू नहीं कर रहा। वह बेहद छोटे भौतिक संकेतों को लगातार या समय-समय पर पढ़कर उन्हें ऐसी जानकारी में बदल रहा है जिसे आप कदम, दिशा या गतिविधि के रूप में देखते हैं।