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SBI News: साइबर ठगों का नया हथियार बना Deepfake, आपकी एक गलती पड़ सकती है भारी

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आजकल तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से धोखाधड़ी के तरीके भी बदल रहे हैं। देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने करोड़ों ग्राहकों को एक नए और खतरनाक खतरे के प्रति सावधान किया है। इस खतरे का नाम है डीपफेक स्कैम। साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का सहारा लेकर लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। बैंक ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों को बताया है कि कैसे ये ठग किसी बैंक अधिकारी या आपके किसी करीबी की शक्ल और आवाज की नकल करके आपको झांसे में ले सकते हैं।
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क्या है डीपफेक तकनीक?

डीपफेक एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसमें AI की मदद से किसी भी व्यक्ति का चेहरा, आवाज और हाव-भाव बिल्कुल असली जैसे बनाए जा सकते हैं। जालसाज इसका इस्तेमाल करके फर्जी वीडियो कॉल या वॉयस मैसेज तैयार करते हैं। देखने या सुनने वाले को लगता है कि वह अपने किसी जान पहचान वाले या बैंक के बड़े अधिकारी से बात कर रहा है। ठग अक्सर बैंक के सीनियर अधिकारी, परिवार के सदस्य या किसी पुराने दोस्त का रूप धरकर संपर्क करते हैं ताकि आप उन पर भरोसा कर सकें।

पैसे की डिमांड

इन स्कैम्स में अपराधी अक्सर पीड़ित की भावनाओं का फायदा उठाते हैं। वे ऐसी स्थिति पैदा करते हैं कि सामने वाला घबरा जाए। जैसे किसी परिवार वाले का एक्सीडेंट होना या बैंक अकाउंट बंद होने का डर दिखाना। जब कोई व्यक्ति डर या जल्दबाजी में होता है, तो वह बिना सोचे समझे पैसे ट्रांसफर कर देता है। बैंक का कहना है कि ये अपराधी वीडियो कॉल पर भी बिल्कुल असली नजर आते हैं, जिससे इन्हें पहचानना बहुत मुश्किल हो जाता है।

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ठगी करने का तरीका

स्टेट बैंक ने बताया है कि ये अपराधी किन-किन तरीकों से लोगों तक पहुँचते हैं। नीचे दी गई तालिका से आप इनके काम करने के तरीके को समझ सकते हैं।

स्कैम का हिस्साजानकारी
संपर्क के जरिएमैसेजिंग ऐप और वीडियो कॉल
किसका रूप धरते हैंबैंक अधिकारी, रिश्तेदार, कंपनी के बड़े बॉस
क्या भेजते हैंAI से बने वीडियो, आवाज और फोटो
फंसाने का तरीकाइमरजेंसी की बात करना, तुरंत पैसे की मांग

ये अपराधी ज्यादातर व्हाट्सएप या टेलीग्राम जैसे ऐप का इस्तेमाल करते हैं। वे अचानक वीडियो कॉल करते हैं और ऐसी इमरजेंसी बताते हैं जिसमें तुरंत पैसे भेजने की जरूरत हो।


सुरक्षा के लिए अपनाएं ये नियम

अगर आप भी इस तरह के फ्रॉड से बचना चाहते हैं, तो बैंक द्वारा बताए गए इन नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है।

  • जल्दबाजी न दिखाएं: अगर कोई मैसेज या कॉल करके तुरंत पैसे की मांग करता है, तो एकदम से कोई कदम न उठाएं।
  • पहचान की जांच करें: अगर कॉल किसी बैंक अधिकारी या परिचित के नाम पर आए, तो उसे काटकर वापस उनके पुराने नंबर पर फोन करें और सच्चाई जानें।
  • लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड करने से बचें। ये आपके फोन का डेटा चुरा सकते हैं।
  • गोपनीय जानकारी न दें: याद रखें कि कोई भी बैंक आपसे ओटीपी, पासवर्ड या पिन नहीं मांगता।
  • वेरिफिकेशन जरूरी है: पैसे भेजने से पहले सामने वाले की पहचान को बैंक के आधिकारिक माध्यमों से चेक करें।


फ्रॉड होने पर यहाँ करें शिकायत

अगर किसी के साथ ऐसी कोई घटना हो जाती है या किसी पर शक होता है, तो उसे तुरंत इसकी जानकारी देनी चाहिए।

शिकायत का तरीकासंपर्क की जानकारी
साइबर क्राइम हेल्पलाइन1930 नंबर पर कॉल करें
ऑनलाइन पोर्टलआधिकारिक साइबर क्राइम वेबसाइट पर जाएं
कार्रवाईतुरंत रिपोर्ट करना फायदेमंद होता है

बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते इन खतरों को देखते हुए ग्राहकों की जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। बैंक ने जोर देकर कहा है कि तकनीक के साथ-साथ सावधानी बढ़ाना भी जरूरी है। अगर आप सतर्क रहेंगे, तो अपराधी अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे।





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