Smart Bulb में ऐसा क्या होता है जो उसे सही समय पर ऑन कर देता है?

शाम होते ही घर की लाइट अपने आप जल जाए और सुबह रोशनी बढ़ते ही खुद बंद हो जाए, तो पहली नजर में यह किसी जादू जैसा लग सकता है। लेकिन स्मार्ट बल्ब को वास्तव में पता नहीं होता कि शाम हो गई है। वह सेंसर, समय, नेटवर्क और कभी-कभी आपके फोन से मिलने वाली जानकारी के आधार पर फैसला करता है। कुछ स्मार्ट बल्ब कमरे में मौजूद रोशनी को माप सकते हैं, जबकि दूसरे आपके तय किए हुए शेड्यूल के अनुसार काम करते हैं। कुछ सिस्टम इससे भी आगे जाकर आपके रोजमर्रा के इस्तेमाल का पैटर्न समझकर लाइटिंग को ज्यादा स्वचालित बना देते हैं।
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स्मार्ट बल्ब में होती है छोटी लेकिन महत्वपूर्ण तकनीक

साधारण LED बल्ब का काम मुख्य रूप से बिजली मिलने पर रोशनी पैदा करना है। स्मार्ट बल्ब में इसके साथ एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम जुड़ा होता है, जो उसे फोन, स्मार्ट होम हब या दूसरे उपकरणों से कमांड लेने की सुविधा देता है।

Wi-Fi, Bluetooth या Zigbee जैसी तकनीकों के जरिए स्मार्ट बल्ब को घर के नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है। इसके बाद आप ऐप से उसे चालू या बंद करने, चमक बदलने या रंग बदलने जैसी चीजें नियंत्रित कर सकते हैं।


अंधेरा होने पर लाइट कैसे जलती है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका स्मार्ट होम सेटअप किस तरह कॉन्फिगर किया गया है। कुछ सिस्टम ambient light sensor से आसपास की रोशनी का स्तर मापते हैं। जब रोशनी एक तय सीमा से नीचे जाती है, तो सिस्टम बल्ब चालू करने का निर्देश दे सकता है।

लेकिन हर स्मार्ट बल्ब में ऐसा सेंसर होना जरूरी नहीं है। कई लोकप्रिय सिस्टम समय और स्थान के आधार पर automation चलाते हैं। उदाहरण के लिए, आप सेट कर सकते हैं कि सूर्यास्त के समय लाइट अपने आप ऑन हो जाए। Philips Hue जैसे स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम में routines और automation के जरिए इस तरह की lighting schedules बनाई जा सकती हैं। (philips-hue.com)


फोन और स्मार्ट होम भी बन सकते हैं आंख और दिमाग

कई मामलों में बल्ब खुद वातावरण को नहीं समझ रहा होता। इसके बजाय कोई दूसरा डिवाइस या स्मार्ट होम सिस्टम जानकारी हासिल करके उसे निर्देश देता है।

मिसाल के लिए, motion sensor यह पता लगा सकता है कि कोई व्यक्ति कमरे में आया है। अगर उस समय कमरे में पर्याप्त रोशनी नहीं है, तो automation बल्ब को चालू कर सकती है। इस तरह बल्ब अकेले निर्णय लेने के बजाय सेंसर और software के साथ मिलकर काम करता है।

कभी-कभी लाइट गलत समय पर क्यों जल जाती है?

अगर automation केवल समय पर आधारित है, तो मौसम या कमरे की वास्तविक रोशनी बदलने से परिणाम अलग हो सकता है। बादलों के कारण शाम को जल्दी अंधेरा लग सकता है, लेकिन scheduled light बाद में भी चालू हो सकती है।

इसी तरह motion sensor आधारित सिस्टम में पालतू जानवर या गुजरता हुआ व्यक्ति भी लाइट को सक्रिय कर सकता है। इसलिए स्मार्ट लाइटिंग की असली समझ इस बात में है कि वह कितने अलग-अलग संकेतों को एक साथ इस्तेमाल कर रही है।


यह सुविधा सिर्फ आराम के लिए नहीं है

स्मार्ट बल्ब घर में ऊर्जा बचाने में भी मदद कर सकते हैं, खासकर जब automation लाइट को जरूरत न होने पर बंद कर दे। साथ ही, घर से बाहर रहते हुए भी लाइट को नियंत्रित करना सुरक्षा के लिहाज से उपयोगी हो सकता है।

आज स्मार्ट लाइटिंग का मतलब केवल फोन से बल्ब ऑन करना नहीं रह गया है। यह sensors, schedules और connected devices के बीच तालमेल का हिस्सा बन चुका है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब रात होते ही आपके कमरे की लाइट अपने आप जलती है, तो फैसला अक्सर बल्ब अकेले नहीं करता। उसके पीछे सेंसर, समय, ऐप और software का पूरा छोटा नेटवर्क काम कर रहा होता है। यानी घर की एक साधारण लाइट भी अब आसपास की दुनिया से मिलने वाले संकेतों के आधार पर प्रतिक्रिया दे सकती है।