अब बच्चे भी चला सकेंगे वॉट्सऐप, मेटा ने पेश किया सुरक्षित पेरेंटल कंट्रोल फीचर
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
दुनियाभर में बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कई देशों में तो बच्चों के लिए ऐप्स पर पाबंदी भी लगाई जा रही है। फोन नंबर के जरिए किसी से भी जुड़ने की सुविधा और ऑनलाइन लत जैसी समस्याओं को देखते हुए वॉट्सऐप ने यह बीच का रास्ता निकाला है। इससे बच्चे तकनीक से जुड़े भी रहेंगे और सुरक्षित भी रहेंगे।
कैसे काम करेगा बच्चों वाला वॉट्सऐप?
वॉट्सऐप ने इसके लिए एक खास सिस्टम तैयार किया है। इसे सेटअप करना काफी आसान है:
- सबसे पहले माता-पिता और बच्चे का फोन साथ रखें।
- बच्चे के फोन पर दिख रहे क्यूआर (QR) कोड को पेरेंट के वॉट्सऐप से स्कैन करें।
- डिवाइस लिंक होते ही माता-पिता के पास बच्चे के अकाउंट का पूरा एक्सेस आ जाएगा।
लिंक होने के बाद माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा किससे चैट कर सकता है और वह किस ग्रुप का हिस्सा बनेगा। प्राइवेसी सेटिंग्स पर भी पूरा अधिकार माता-पिता का ही होगा।
प्राइवेसी और सुरक्षा का रखा गया है खास ख्याल
बच्चों वाले इस वर्जन में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है। इसमें उन फीचर्स को हटा दिया गया है जिनसे प्राइवेसी को खतरा हो सकता है।
- इसमें स्टेटस (Status) और चैनल्स (Channels) जैसे फीचर्स नहीं मिलेंगे।
- डिसअपीयरिंग चैट और 'व्यू वन्स' फोटो जैसे विकल्प भी मौजूद नहीं होंगे।
- सभी चैट्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहेंगी, जिसका मतलब है कि माता-पिता के अलावा कोई तीसरा बातचीत नहीं देख पाएगा।
जब बच्चा एक निश्चित उम्र सीमा को पार कर लेगा, तो उसे अपना अकाउंट स्टैंडर्ड प्रोफाइल में बदलने का विकल्प दिया जाएगा, जिसके बाद पेरेंटल कंट्रोल हट जाएगा।