क्या एक UPI यूजर के पास दो अकाउंट होने चाहिए? जानें इसके फायदे और नुकसान

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आज के डिजिटल दौर में ज्यादातर लोग UPI का इस्तेमाल करते हैं। खासकर युवा पीढ़ी अब जेब में कैश रखने के बजाय UPI से पेमेंट करना ज्यादा पसंद करती है। यह तरीका पैसों की सुरक्षा और पेमेंट की आसानी, दोनों ही मामलों में बेस्ट है। इससे वॉलेट में नकद लेकर चलने का झंझट खत्म हो जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि जिस अकाउंट में आपकी पूरी जिंदगी की कमाई जमा है, उसी को UPI ट्रांजैक्शन के लिए इस्तेमाल करना एक गलत फैसला हो सकता है? आजकल बहुत से लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए खास तौर पर UPI ट्रांजैक्शन के लिए एक अलग बैंक अकाउंट खुलवा रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने इस बारे में कुछ बहुत जरूरी सलाह दी है, जिसे हर किसी को जानना चाहिए।

प्राइमरी अकाउंट को UPI से जोड़ने में असली दिक्कत क्या है?

  • UPI पिन लीक होने का डर: अगर गलती से आपका पिन किसी को पता चल जाए, तो आपकी पूरी बचत कुछ ही सेकंड में साफ हो सकती है।
  • फिशिंग स्कैम का खतरा: जालसाज आपके पूरे बैंक बैलेंस तक पहुंच बना सकते हैं।
  • स्टेटमेंट में उलझन: छोटे-छोटे UPI ट्रांजैक्शन की वजह से बैंक स्टेटमेंट काफी लंबा हो जाता है, जिससे टैक्स फाइलिंग के समय दिक्कत आती है।
  • सर्वर की समस्या: अगर आपके बैंक का सर्वर डाउन है, तो जरूरी वक्त पर आपका पेमेंट फेल हो सकता है।
  • हर ऐप से जुड़ाव: हर QR कोड को स्कैन करना सुरक्षा के लिहाज से एक नया रिस्क हो सकता है।

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UPI के लिए अलग अकाउंट रखने के फायदे

वित्तीय सुरक्षा:क्या आप जानते हैं कि UPI के लिए एक अलग अकाउंट रखना सुरक्षा के लिहाज से सबसे कारगर कदमों में से एक हो सकता है? अगर आप अपने प्राइमरी बैंक अकाउंट को हर ऐप और QR कोड से लिंक करते हैं, तो स्कैम का शिकार होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में अगर कभी आपका UPI पिन लीक हो जाए या आप किसी ऑनलाइन धोखाधड़ी के जाल में फंस जाएं, तो हमेशा डर बना रहता है कि आपका पूरा बैंक बैलेंस खत्म हो सकता है।

इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही समझदारी है। इसके उलट, अगर आपके पास एक दूसरा अकाउंट है और आप उसमें सिर्फ सीमित पैसे ही रखते हैं, तो किसी भी नुकसान की स्थिति में आपकी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहेगा।

बैंक स्टेटमेंट को रखें एकदम साफ:अगर आप अपने सारे लेन-देन प्राइमरी बैंक अकाउंट से ही करते हैं, तो आपके बैंक स्टेटमेंट में छोटे-छोटे खर्चों की भरमार हो जाती है। इससे अपने खर्चों को ट्रैक करना और टैक्स फाइलिंग के दौरान स्टेटमेंट को समझना काफी मुश्किल काम हो जाता है। UPI के लिए अलग अकाउंट होने पर आप महीने की शुरुआत में उसमें एक फिक्स अमाउंट डाल सकते हैं। इससे आपको साफ पता रहेगा कि आपने महीने भर में कहां और कितना खर्च किया है।

तकनीकी दिक्कतों से बचें:अक्सर बैंक का सर्वर डाउन होने की वजह से पेमेंट बीच में ही अटक जाता है। अगर आपके पास दो अलग-अलग बैंक अकाउंट हैं, तो आप तुरंत दूसरे अकाउंट पर स्विच करके अपना पेमेंट बिना किसी परेशानी के पूरा कर सकते हैं। इस काम के लिए आप किसी छोटे प्राइवेट बैंक या डिजिटल बैंक का इस्तेमाल करने के बारे में भी सोच सकते हैं।





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