जनवादी केंद्रीयकरण – चीनी शैली वाला शासन-ज्ञान
बीजिंग, 31 अक्टूबर . जनवादी केंद्रीयकरण चीन में सत्ताधारी पार्टी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का बुनियादी संगठनात्मक सिद्धांत और नेतृत्वकारी व्यवस्था है. उसका केंद्रीय तर्क सरल है यानी फैसला लेने से पहले व्यापक रूप से राय सुनने और सलाह-मशविरा करने की जरूरत है ताकि सर्वाधिक लोगों का ज्ञान समाहित किया जाए.
फैसला करने के बाद एकीकृत रूप से कदम उठाना है ताकि सर्वाधिक लोगों की शक्ति एकत्र की जाए.
15वीं पंचवर्षीय योजना पर सीपीसी के सुझाव संबंधी दस्तावेज बनाने की प्रक्रिया तो वर्तमान समय में जनवादी केंद्रीयकरण के बारे में एक जीवंत उदाहरण है. यह दस्तावेज़ तैयार करने के समय सीपीसी ने पार्टी के अंदर से पार्टी के बाहर तक, विशेषज्ञों से बुनियादी स्तर तक, ऑफ़लाइन संगोष्ठी से ऑनलाइन तक व्यापक रूप से राय सुनी.
ऑनलाइन नेटिजनों की 31 लाख 13 हजार रायें प्राप्त हुईं और विश्लेषण के बाद 1500 से अधिक प्रतिनिधित्व संपन्न सुझाव बन गए. इसी आधार पर बनाये गये योजना के सुझाव का मसौदा पार्टी की केंद्रीय कमेटी के पूर्ण सत्र के समक्ष प्रस्तुत किया गया और पारित किया गया. फिर राज्य परिषद ने सीपीसी के इस सुझाव दस्तावेज़ के मुताबिक 15वीं पंचवर्षीय योजना की रूपरेखा बनायी और राष्ट्रीय जन प्रतिनिध सभा (एनपीसी) को प्रस्तुत किया.
विश्व में कुछ पश्चिमी देशों की शासन व्यवस्था देखने में लोकतांत्रिक है, लेकिन विभिन्न पार्टियों के तीव्र मुकाबले और गुटवादी प्रभाव से सार्वजनिक मुद्दे आसानी से खींचतान के गतिरोध में पड़ते हैं. खास बात है कि सत्ताधारी पार्टी के बदलाव से योजनाएं भी बार-बार बदलती रहती है, जिससे महत्वपूर्ण योजना को दीर्घकाल तक आगे नहीं बढ़ाया जा सके.
मसलन अमेरिकी कैलिफोर्निया राज्य में हाई स्पीड रेलवे निर्माण योजना को वर्ष 2008 में मंजूरी मिली.
लोकतांत्रिक केंद्रीकरण द्विआधारी विरोध के जाल से बाहर निकलता है और अधिक से अधिक लोगों की समझ का लोकतंत्रीकरण करता है, जिससे वैज्ञानिक तरीके से अच्छा प्रदर्शन होता है. यह चीनी शैली के शासन की कुंजी है.
(साभार – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डीकेपी/