इस बार भाई दूज 10 या 11 नवंबर को? जानिए सही तारीख
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक पर्व भाई दूज इस वर्ष पंचांगीय गणनाओं के चलते खासी चर्चा में है। दीपावली के ठीक दो दिन बाद आने वाले इस पावन पर्व को लेकर देश भर के परिवारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि भाई दूज का मुख्य त्योहार वास्तव में 10 नवंबर को मनाया जाएगा या फिर 11 नवंबर को। हिन्दू पंचांग और उदयातिथि के जानकारों के अनुसार, इस साल द्वितीया तिथि की शुरुआत और उसके समापन के समय को लेकर लोगों के मन में संशय है।
#1. भाई दूज 2026 की सही तारीख: 10 या 11 नवंबर, जानिए पंचांग का सटीक गणित
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का आरंभ और समापन समय ही पर्व की सही तिथि तय करता है। इस वर्ष उदयातिथि और अपराह्ह व्यापिनी तिथि के आधार पर भाई दूज का पर्व 11 नवंबर 2026, बुधवार को मनाया जाना पूरी तरह से शास्त्र सम्मत और मान्य है।
#1. भाई दूज 2026 पर तिलक करने का सबसे शुभ और उत्तम मुहूर्त
भाई दूज के दिन भाइयों को तिलक लगाने के लिए दोपहर का समय (अपराह्ह काल) सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। पंचांग के अनुसार 11 नवंबर को दोपहर के समय तिलक करने का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा।
#1. भाई दूज की पारंपरिक पूजा विधि और तिलक करने के नियम
भाई दूज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
#1. क्यों मनाया जाता है भाई दूज? जानिए धार्मिक कथा और इसका महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज को 'यम द्वितीया' के नाम से भी जाना जाता है। कथा के अनुसार, सूर्यपुत्र यमराज ने अपनी बहन यमुना के बार-बार निमंत्रण देने पर कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन उनके घर जाकर भोजन किया था। यमुना ने अपने भाई का सत्कार कर उनके माथे पर तिलक लगाया था और उनके अमर होने का वरदान मांगा था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर या अपने घर पर पूरी श्रद्धा के साथ बहन के हाथ का बना भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है, उसके जीवन में कभी अकाल मृत्यु या संकट का भय नहीं रहता।