सनातन धर्म में करवा चौथ के पावन व्रत का विशेष महत्व माना गया है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत किसी बड़े पर्व से कम नहीं होता है, लेकिन जो महिलाएं अपने जीवन का पहला करवा चौथ व्रत रखती हैं, उनके मन में उत्साह के साथ-साथ कई तरह की असमंजस की स्थितियां भी बनी रहती हैं। पहले करवा चौथ को लेकर व्रत के नियमों से लेकर पूजा की सामग्री और 'बायना' निकालने की परंपरा तक हर बात का खास ध्यान रखा जाता है।
करवा चौथ के दिन बायना देने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसमें नवविवाहिता अपनी सास या परिवार की किसी बुजुर्ग महिला को सुहाग की सामग्री और उपहार भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। अगर आप भी इस साल अपना पहला करवा चौथ का व्रत रखने जा रही हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि बायने की थाली में किन-किन पवित्र चीजों को रखना अनिवार्य माना गया है और सास को उपहार स्वरूप क्या-क्या चीजें दी जाती हैं ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
क्या होता है करवा चौथ का 'बायना' और इसका धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व क्या है
करवा चौथ की पूजा और कथा के दौरान बायने का विशेष स्थान होता है। 'बायना' असल में वह शगुन की थाली या सामग्री होती है जिसे व्रत रखने वाली महिला अपनी सास, जेठानी या परिवार की किसी आदरणीय सुहागिन महिला को दान या भेंट स्वरूप देती है। ऐसी मान्यता है कि बायने में रखे गए अन्न, फल और सुहाग के सामान से जो आशीर्वाद प्राप्त होता है, उससे अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। पहले करवा चौथ के दिन बायने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन बहू पहली बार अपनी सास के साथ अपने नए जीवन और सुहाग की लंबी उम्र की मंगलकामनाएं साझा करती है।
बायने में मुख्य रूप से करवा (मिट्टी या धातु का कलश), पूड़ी या मट्ठी, हलवा या मिठाई, फल, और सोलह श्रृंगार की वस्तुएं रखी जाती हैं। बायना निकालने के बाद सास अपनी बहू के सिर पर हाथ रखकर उसे सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद देती हैं, जिससे रिश्ते में प्रगाढ़ता और स्नेह बढ़ता है।
पहले करवा चौथ के बायने की थाली में क्या-क्या रखना चाहिए: पूरी लिस्ट और सामग्री
अगर आप पहली बार करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, तो बायने की थाली को बहुत ही विधि-विधान और श्रद्धा के साथ सजाना चाहिए। बायने की मुख्य सामग्री में सबसे पहले मिट्टी या तांबे का करवा आता है, जिसमें जल और थोड़े से चावल या सिक्के भरे जाते हैं।
इसके बाद थाली में खाने की चीजों के रूप में मट्ठी, फीकी या मीठी शक्करपारे, पूरियां और सूजी का हलवा या फेनी रखी जाती है। सुहाग के सामान के बिना बायना अधूरा माना जाता है, इसलिए इसमें लाल सिंदूर, कांच या लाख की हरी-लाल चूड़ियां, महावर, आलता, बिंदी, काजल, मेहंदी, कंघी और शीशा जरूर रखें। इसके अलावा बायने में दक्षिणा के रूप में कुछ रुपए (नकद पैसे) और अपनी क्षमतानुसार सोने या चांदी की कोई छोटी वस्तु (जैसे अंगूठी या बिछिया) भी भेंट की जा सकती है। फल के रूप में ऋतु के अनुसार सेब, केला या अन्य ताजे फल बायने में शामिल किए जाते हैं।
सास को बायना देने की सही विधि और पैर छूकर आशीर्वाद लेने का नियम
करवा चौथ के दिन शाम को चंद्रमा के निकलने से पहले जब महिलाएं कथा सुन लेती हैं, उसके बाद बायने की रस्म निभाई जाती है। बायने की थाली पर रोली से साठिया या टीका लगाया जाता है और उसमें सुहाग की सभी वस्तुएं सजाई जाती हैं। बायना निकालते समय थाली पर हाथ फेरकर अपनी सास या घर की बड़ी बुजुर्ग महिला के चरण स्पर्श किए जाते हैं। कई जगहों पर बायने में रखे करवे से जल के छींटे देकर सास का आशीर्वाद लिया जाता है और उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट की जाती है।
यदि किसी कारणवश आपकी सास आपके पास नहीं रहती हैं, तो आप अपनी सास की उम्र के बराबर किसी अन्य सुहागिन महिला, अपनी ननद या मंदिर में जाकर किसी योग्य ब्राह्मणी को भी यह बायना आदरपूर्वक दे सकती हैं। सास को बायना देने के बाद ही चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
पहले करवा चौथ पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान, व्रत को बनाएं और भी ज्यादा खास
पहला करवा चौथ हर महिला के लिए उसके जीवन के सबसे खूबसूरत पलों में से एक होता है, इसलिए इस दिन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। व्रत के दिन सुबह सरगी खाने के बाद पूरे दिन मन में सकारात्मक विचार रखें और सोलह श्रृंगार करके माता करवा की पूजा की तैयारी करें।
बायने की सामग्री हमेशा साफ-सुथरी और अच्छी गुणवत्ता की होनी चाहिए क्योंकि यह बड़ों को सम्मान और आदर के रूप में दी जाती है। अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करें। परंपराओं और आधुनिकता का सही तालमेल बिठाते हुए मनाया गया यह पहला करवा चौथ आपके और आपके जीवनसाथी के जीवन में हमेशा प्यार, मिठास और अटूट विश्वास बनाए रखेगा।