भाई-बहन नहीं बल्कि माता लक्ष्मी ने असुरराज बलि को क्यों बांधी थी पहली राखी? जानिए रक्षाबंधन से जुड़ी यह अद्भुत पौराणिक कथा
सनातन संस्कृति में भाई-बहन के अटूट स्नेह और पवित्र बंधन का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व हर साल सावन मास की पूर्णिमा को बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र तथा उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं, जबकि भाई उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। हालांकि, हम सभी ने बचपन से यही सुना है कि रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम को समर्पित है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इस पर्व की उत्पत्ति से जुड़ी कई ऐसी पौराणिक कथाएं हैं जो भाई-बहन के रिश्ते से परे देवी-देवताओं के बीच रचे गए इतिहास से जुड़ी हैं।
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