LPG Price Cut: आम जनता की लगी लॉटरी! एलपीजी सिलेंडर सीधे ₹587 हुआ सस्ता, चेक करें अपने शहर के दाम

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मिडिल क्लास परिवारों के लिए रसोई का बजट हमेशा से एक बड़ा सिरदर्द रहा है। जब भी रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) के दाम बढ़ते हैं, तो सीधे घर का पूरा बजट चरमरा जाता है। लेकिन इसी बीच आम जनता और छोटा-मोटा व्यापार करने वाले लोगों के लिए एक बहुत ही राहत भरी और बड़ी खुशखबरी सामने आई है।

सरकारी तेल कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी कटौती का ऐलान कर सबको चौंका दिया है।

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इस फैसले के बाद सिलेंडर सीधे 587 रुपए तक सस्ता हो गया है। इस कटौती के बाद देश भर के करोड़ों उपभोक्ताओं ने बड़ी राहत की सांस ली है। इस बड़े फैसले का सीधा फायदा देश के 10 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को मिलने जा रहा है, जिससे उनके घरों और दुकानों का बजट काफी हद तक सुधर जाएगा।

जानिए कैसे और क्यों इतना सस्ता हुआ एलपीजी सिलेंडर?

बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की असली सप्लाई लागत, यानी इसे बनाने और घर तक पहुंचाने का कुल खर्च लगभग 1,200 रुपए बैठता है। लेकिन सरकार द्वारा दी जाने वाली भारी सब्सिडी के कारण आम उपभोक्ताओं को इसके लिए काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में गैस सिलेंडर के दाम हमारे पड़ोसी देशों की तुलना में भी बहुत कम हैं। जहां आज के समय में श्रीलंका में एक सिलेंडर के लिए 1,241 रुपए, नेपाल में 1,207 रुपए और पाकिस्तान में 1,046 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, वहीं भारत में यह सामान्य उपभोक्ताओं को केवल 913 रुपए में मिल जाता है।

उज्ज्वला योजना वालों की तो निकल पड़ी!

सरकार की इस भारी सब्सिडी का सबसे बड़ा और सीधा फायदा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिल रहा है। ये लाभार्थी सिलेंडर की असली लागत से पूरे 587 रुपए कम, यानी प्रति सिलेंडर सिर्फ 613 रुपए का भुगतान कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, बिना सब्सिडी वाले जो सामान्य ग्राहक हैं, उन्हें भी यह सिलेंडर सप्लाई लागत से काफी कम यानी करीब 913 रुपए में ही मिल रहा है।

तेल कंपनियों पर टूटा मुसीबतों का पहाड़, ₹60,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान

लागत और बिक्री की कीमत में इस बड़े अंतर के कारण सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है। कंपनियां घाटे में चल रही हैं। पिछले साल इन तेल कंपनियों को कुल 41,338 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था, जिसके इस साल और बढ़कर करीब 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, कंपनियों को इस बड़े संकट से उबारने और थोड़ी राहत देने के लिए सरकार ने इस साल के बजट में लगभग 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे यानी वित्तीय मदद का खास इंतजाम किया है।

किन 10 करोड़ लोगों की हुई असली बल्ले-बल्ले?

इस पूरे फैसले का सबसे खूबसूरत पहलू देश के उन 10 करोड़ से ज्यादा लोगों से जुड़ा है, जो सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। देश में केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala Yojana) के तहत ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन और सब्सिडी पर सिलेंडर दिए जाते हैं।

लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के दायरे में आने वाले 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सरकार की तरफ से मिल रही तगड़ी सब्सिडी के कारण पहले से ही बहुत कम कीमत पर रसोई गैस मिल रही है। अब बाजार में कीमतों के इस नए बदलाव और सरकार की तरफ से मिलने वाली लगातार मदद की वजह से इन गरीब परिवारों के लिए धुएं से मुक्ति पाना और स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करना और भी ज्यादा आसान और किफायती हो जाएगा।