बैठे-बैठे दिल की धड़कन तेज हो जाती है? जानिए इसके पीछे के आम कारण और कब जरूरी है डॉक्टर को दिखाना
कभी सोफे पर आराम से बैठे हैं, न दौड़े, न कोई भारी काम किया, और फिर भी लगता है कि दिल की धड़कन अचानक तेज हो गई है — यानी dil ki dhadkan tez hona जैसा एहसास. सीने में धक-धक इतनी साफ महसूस होती है कि लगता है आसपास बैठे लोग भी इसे सुन लेंगे. दरअसल यह अनुभव बहुत से लोगों को कभी न कभी होता है, और अक्सर इसका कारण उतना गंभीर नहीं होता जितना उस पल डर महसूस होता है. फिर भी हर स्थिति एक जैसी नहीं होती, इसलिए जरूरी है कि इसके आम कारणों को समझा जाए और यह भी जाना जाए कि कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.
हमारा दिल भावनाओं और आदतों के हिसाब से अपनी रफ्तार घटाता-बढ़ाता रहता है. आइए समझते हैं कि बिना मेहनत किए धड़कन तेज होने के पीछे क्या-क्या आम कारण हो सकते हैं.
घबराहट और तनाव में धड़कन का तेज होना बिल्कुल आम हैसबसे आम वजह है तनाव और घबराहट. जब हम किसी बात को लेकर चिंतित होते हैं, तो शरीर अलर्ट मोड में चला जाता है और एक खास हार्मोन रिलीज होता है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है. परीक्षा से पहले, इंटरव्यू से पहले या किसी बुरी खबर के बाद धड़कन का बढ़ना बिल्कुल सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया मानी जाती है.
अच्छी बात यह है कि घबराहट वाली धड़कन आमतौर पर कुछ देर में अपने आप शांत हो जाती है. गहरी सांस लेने या कुछ देर शांत बैठने से इसमें मदद मिल सकती है. अगर आपको अक्सर बिना वजह घबराहट के साथ धड़कन तेज होती है, तो यह संकेत हो सकता है कि मन को आराम की जरूरत है — ऐसे में किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना या डॉक्टर से सलाह लेना फायदेमंद रहता है.
ज्यादा चाय-कॉफी और पानी की कमी भी हो सकती है वजहदूसरी आम वजह है कैफीन का ज्यादा सेवन.
इसी तरह शरीर में पानी की कमी भी धड़कन बढ़ा सकती है. पानी कम होने पर खून का आयतन घट जाता है और दिल को खून पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धड़कन तेज महसूस होती है. तेज धूप में काम करने या पर्याप्त पानी न पीने पर ऐसा हो सकता है.
कभी-कभी थायराइड की गड़बड़ी या खून की कमी जैसी शारीरिक स्थितियों में भी धड़कन तेज रहने की संभावना बताई जाती है. बुखार, किसी इन्फेक्शन या कुछ दवाइयों के असर से भी दिल की रफ्तार बढ़ सकती है. लेकिन ये सब सिर्फ संभावनाएं हैं — किसी नतीजे पर खुद पहुंचने के बजाय जांच और डॉक्टर की राय लेना ही सही रास्ता है.
कब समझें कि अब डॉक्टर को दिखाना जरूरी हैअगर तेज धड़कन के साथ सीने में दर्द या दबाव महसूस हो, सांस लेने में दिक्कत हो, चक्कर आए या बेहोशी जैसी स्थिति बने, तो देर न करें — तुरंत डॉक्टर के पास जाएं या अस्पताल पहुंचें.
इसके अलावा, अगर धड़कन लगातार अनियमित महसूस होती है, बार-बार बिना कारण तेज होती है या लंबे समय तक सामान्य नहीं होती, तो भी डॉक्टर से जांच करवाना चाहिए. खुद से कोई दवा शुरू न करें और न ही किसी की सलाह पर दवा बदलें — दिल से जुड़े मामलों में अंदाजे पर चलना खतरनाक हो सकता है.
घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं. ज्यादातर मामलों में आराम, पानी और तनाव कम करने से धड़कन सामान्य हो जाती है. शरीर के संकेतों को समझिए और जरूरत पर बिना झिझक डॉक्टर से सलाह लीजिए.