खेती की जमीन पर गोदाम या फैक्ट्री बनाने का सोच रहे हैं? पहले समझ लें ये सरकारी नियम

Newspoint

खेती की जमीन के पास से सड़क निकल जाए या गांव के आसपास मांग बढ़ जाए तो कई किसान अपनी जमीन पर गोदाम, भंडार घर या छोटी फैक्ट्री बनाने का सोचने लगते हैं। सोच सही हो सकती है, लेकिन कृषि भूमि पर बिना अनुमति गैर-कृषि निर्माण करना भारी पड़ सकता है। कानून की नजर में जमीन का उपयोग उसके दर्ज प्रकार के हिसाब से ही मान्य होता है। इसलिए पहला कदम निर्माण नहीं, बल्कि भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति है।

नियम राज्य के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपने राज्य की व्यवस्था समझना जरूरी है।

भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति क्यों और कैसे मिलती है

कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने के लिए जिला प्रशासन या तहसील स्तर से अनुमति लेनी होती है। उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में इस प्रक्रिया के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन किया जाता है और कई जगह आवेदन ऑनलाइन भी स्वीकार किए जाते हैं। आवेदन के साथ खतौनी, खसरा, नक्शा और प्रस्तावित निर्माण का विवरण देना होता है।

जांच में यह देखा जाता है कि जमीन विवादित तो नहीं, उस पर कोई रोक तो नहीं लगी और प्रस्तावित उपयोग आसपास की योजना से मेल खाता है या नहीं। स्वीकृति के साथ निर्धारित रूपांतरण शुल्क भी जमा करना पड़ सकता है।

ध्यान रहे कि हर जमीन का परिवर्तन संभव नहीं होता। मुख्य सड़क, नहर, जलस्रोत या आरक्षित भूमि के पास की जमीनों पर विशेष शर्तें लागू हो सकती हैं। इसी तरह शहरों के मास्टर प्लान वाले क्षेत्रों में उपयोग पहले से तय होता है — औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री अपेक्षाकृत आसान होती है, जबकि हरित क्षेत्र में रोक रहती है।

अपनी जमीन किस श्रेणी में आती है, यह जानकारी तहसील या नगर नियोजन कार्यालय से पहले ही ले लें।

बिना अनुमति निर्माण करने पर क्या हो सकता है

बिना अनुमति बनाए गए निर्माण को अवैध माना जा सकता है। प्रशासन नोटिस देकर निर्माण हटाने का आदेश दे सकता है और जुर्माना भी लग सकता है। इतना ही नहीं, ऐसी जमीन पर बैंक ऋण, बिजली का औद्योगिक कनेक्शन और फैक्ट्री का लाइसेंस मिलने में भी अड़चन आती है, क्योंकि हर जगह भूमि उपयोग का प्रमाण मांगा जाता है। बाद में नियमितीकरण का रास्ता हर राज्य में उपलब्ध भी नहीं होता और जहां होता है, वहां भारी शुल्क लग सकता है।

कुछ राज्यों में कृषि उपज के भंडारण जैसे चुनिंदा उपयोगों के लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल रखी गई बताई जाती है, लेकिन यह छूट हर जगह एक समान नहीं होती। इसी तरह जमीन अगर किसी औद्योगिक क्षेत्र या विकास प्राधिकरण की सीमा में आती है तो वहां के नियम अलग से लागू होते हैं। किसान भाइयों को सलाह है कि किसी भी तरह का पक्का निर्माण शुरू करने से पहले तहसील से अपनी जमीन की वर्तमान श्रेणी और प्रस्तावित उपयोग की मान्यता की लिखित जानकारी ले लें। छोटे से शुल्क में मिलने वाली यह जानकारी आगे के लाखों के नुकसान से बचा सकती है।

समझदारी इसी में है कि निर्माण से पहले अनुमति की फाइल पूरी करें। इसके लिए किसी जानकार वकील या राजस्व अधिकारी से अपने प्लॉट के रिकॉर्ड की जांच करा लें कि स्वामित्व साफ है या नहीं। गोदाम या फैक्ट्री के लिए इसके अलावा प्रदूषण सहमति, अग्नि सुरक्षा और स्थानीय निकाय की स्वीकृतियां भी उपयोग के हिसाब से लग सकती हैं। अपने जिले में लागू वर्तमान नियम और शुल्क की पुष्टि आधिकारिक कार्यालय से जरूर करें। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं।