कनाडा की बड़ी चाल: अब एशिया को तेल बेचेगा, 1,250 किमी लंबी Pacific Link पाइपलाइन को हरी झंडी, अमेरिका पर निर्भरता घटेगी 70%
कनाडा ने अपने तेल कारोबार की दिशा बदलने का बड़ा फैसला किया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने Pacific Link पाइपलाइन को हरी झंडी दे दी है, जो अलबर्टा के ब्रुडरहाइम से ब्रिटिश कोलंबिया के डेल्टा पोर्ट तक 1,250 किलोमीटर लंबी होगी। इस पाइपलाइन से रोजाना 10 लाख बैरल कच्चा तेल प्रशांत तट तक पहुंचाया जाएगा, जहां से इसे एशियाई बाजारों में बेचा जाएगा।
अमेरिका पर निर्भरता घटाने की रणनीतिफिलहाल अलबर्टा अपने तेल का करीब 90% सिर्फ अमेरिका को बेचता है, जिससे कनाडा का ऊर्जा निर्यात एक ही खरीदार पर निर्भर है। पाइपलाइन बनने के बाद अमेरिका पर यह निर्भरता घटकर 65-70% रह जाने का अनुमान है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापार नीतियों से नाराज कनाडा अब अपने तेल के लिए नए खरीदार तलाश रहा है और एशिया इसका सबसे बड़ा लक्ष्य है।
लागत और समयसीमाइस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत 25 से 31 अरब डॉलर के बीच आंकी गई है। कनाडा की संघीय सरकार ने शुरुआत के लिए 2.8 अरब डॉलर देने की घोषणा की है, जबकि प्राइवेट पार्टनर के तौर पर Pembina Pipeline Corp जुड़ी है। पाइपलाइन को 2032-33 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है और इसे राष्ट्रीय हित की परियोजना घोषित किया गया है।
अलबर्टा में अलगाववाद की मांगइस फैसले के पीछे अलबर्टा की राजनीति भी है। प्रांत की प्रीमियर डैनियल स्मिथ के नेतृत्व में अलगाववाद की मांगें उठ रही हैं और 19 अक्टूबर को इस पर जनमत संग्रह भी प्रस्तावित है। तेल निर्यात से होने वाली कमाई बढ़ने से प्रांत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
चुनौतियां भी कम नहींपरियोजना के रास्ते में कई बाधाएं हैं। आदिवासी समुदायों का विरोध एक बड़ी चुनौती है, हालांकि उन्हें परियोजना में 10% हिस्सेदारी की पेशकश की गई है। पर्यावरण समूह भी प्रदूषण के खतरे को लेकर चिंता जता रहे हैं। लंबी कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरियों के बावजूद कनाडा सरकार इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता मानकर आगे बढ़ रही है।
नोट: यह खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। परियोजना की समयसीमा और लागत में बदलाव संभव है।