खुद ठीक हो जाएगी फोन की स्क्रीन की खरोंच? जानिए इस भविष्य की तकनीक की सच्चाई

Newspoint

फोन गिरकर स्क्रीन पर पड़ने वाली खरोंच हर किसी को चुभती है। ऐसे में अगर कोई कहे कि भविष्य में स्क्रीन की छोटी खरोंचें अपने आप भर जाएंगी, तो यह किसी जादू से कम नहीं लगता। लेकिन यह सिर्फ कल्पना नहीं है। दुनिया भर की प्रयोगशालाओं में ऐसी खास सामग्री पर काम चल रहा है, जो हल्की चोट लगने पर खुद को धीरे-धीरे जोड़ सके। इसे ही सेल्फ-हीलिंग यानी खुद ठीक होने वाली तकनीक कहा जाता है। सवाल यह है कि यह तकनीक असल में कहां तक पहुंची है और आम आदमी के फोन तक कब आएगी।

खुद भरने वाली परत आखिर काम कैसे करती है

इस तकनीक के पीछे का विचार प्रकृति से लिया गया है। जैसे हमारी त्वचा पर छोटा कट लगने पर शरीर उसे धीरे-धीरे भर देता है, वैसे ही कुछ खास पॉलीमर सामग्री में भी टूटे हुए बंधन फिर से जुड़ने की क्षमता पैदा की जा सकती है। कुछ तरीकों में सामग्री के अंदर बेहद छोटे-छोटे कैप्सूल भरे जाते हैं, जिनमें भरने वाला तरल पदार्थ रहता है। जैसे ही खरोंच पड़ती है, ये कैप्सूल फूट जाते हैं और तरल बाहर आकर दरार को भर देता है। कुछ दूसरी सामग्री गर्मी या रोशनी मिलने पर नरम होकर बहती है और सतह को फिर से बराबर कर देती है।

हालांकि यह प्रक्रिया गहरी दरारों या टूटे कांच पर काम नहीं करती, इसका दायरा केवल सतही खरोंचों तक सीमित है।

अभी यह तकनीक कहां तक पहुंची है

सच्चाई यह है कि यह तकनीक अभी भी शोध और शुरुआती प्रयोगों के दौर में है। कुछ साल पहले एक बड़े ब्रांड ने फोन के पिछले हिस्से पर ऐसी परत जरूर आजमाई थी, जो हल्की खरोंचों को समय के साथ हल्का कर देती थी, लेकिन वह फोन की मुख्य स्क्रीन पर नहीं थी। स्क्रीन पर ऐसी परत लगाना कहीं ज्यादा कठिन है, क्योंकि स्क्रीन को पूरी तरह साफ दिखना भी चाहिए, छूने पर संवेदनशील भी रहनी चाहिए और मजबूत भी।

अभी तक कोई भी बड़ी कंपनी ऐसा फोन बाजार में नहीं लाई है, जिसकी स्क्रीन की खरोंचें सच में खुद ठीक हो जाती हों। यानी सोशल मीडिया पर दिखने वाले दावे अभी हकीकत से काफी आगे हैं।

ऐसे फोन के लिए अभी कितना इंतजार करना होगा

विशेषज्ञों का मानना है कि पहले यह तकनीक महंगे और खास फोन में सीमित रूप से आ सकती है, फिर धीरे-धीरे आम फोन तक पहुंचेगी। इस बीच कुछ कंपनियां ऐसी स्क्रीन परतों पर काम कर रही हैं, जो खरोंच को ठीक तो नहीं करतीं, लेकिन उसे दिखने में काफी हल्का कर देती हैं। जब तक यह तकनीक पक्की होकर नहीं आती, तब तक स्क्रीन गार्ड और अच्छा कवर ही आपकी स्क्रीन की सबसे सस्ती सुरक्षा है।

नया फोन खरीदते समय सिर्फ चमकदार दावों पर न जाएं, यह जरूर जांचें कि स्क्रीन की सुरक्षा के लिए असल में कौन सी परत दी गई है। आने वाले सालों में यह सपना सच हो सकता है, लेकिन आज के दिन यह तकनीक भविष्य की झलक भर है।

प्रयोगशालाओं में ऐसी सामग्री पर भी काम चल रहा है जो दिन की रोशनी में रखते ही धीरे-धीरे सक्रिय हो जाती है, हालांकि हर नई सामग्री को फोन की मजबूती और लागत की कसौटी पर खरा उतरना अभी बाकी है।