अखिलेश यादव के करीबी कमाल अख्तर को मिलने वाली है बड़ी जिम्मेदारी?

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी (सपा) के दिग्गज नेता और कांठ विधानसभा सीट से विधायक कमाल अख्तर ने अचानक विधानसभा में मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद से इस्तीफा देकर सबको हैरत में डाल दिया है।

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राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। शुरुआत में चर्चा गर्म थी कि सपा सांसद रूचि वीरा के साथ चल रही खींचतान की वजह से उन्होंने यह कदम उठाया। यहां तक कि रूचि वीरा ने मीडिया के सामने आकर यह दावा भी कर दिया कि पार्टी में अनुशासनहीनता के चलते कमाल अख्तर पर यह कार्रवाई हुई है। लेकिन अब कहानी में एक नया और बेहद दिलचस्प ट्विस्ट आ गया है।

दरअसल, समाजवादी पार्टी के भीतरखाने से आ रही अंदरूनी खबरों ने इन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कमाल अख्तर के इस्तीफे का रूचि वीरा प्रकरण से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

असल में, सपा आलाकमान अपने इस कद्दावर मुस्लिम चेहरे को संगठन में कोई बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि इसी बड़ी भूमिका के लिए जमीन तैयार करने के मकसद से उन्होंने मुख्य सचेतक का पद छोड़ा है।

मुरादाबाद में संगठन को बचाने के लिए दी ‘कुर्बानी’?

पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि कमाल अख्तर का यह कदम एक बड़ी सियासी रणनीति का हिस्सा है। उनके करीबी सूत्रों की मानें तो मुरादाबाद में संगठन के स्थानीय नेताओं पर कोई गाज न गिरे और गुटबाजी की वजह से पार्टी को नुकसान न हो, इसलिए कमाल अख्तर ने खुद आगे बढ़कर यह ‘कुर्बानी’ दी है।

यही वजह है कि इस वक्त मुरादाबाद मंडल का पूरा संगठन और सपा के तमाम स्थानीय विधायक कमाल अख्तर के समर्थन में मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। इस सियासी खींचतान का असर यह हुआ है कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता फिलहाल रूचि वीरा के किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने से पूरी तरह दूरी बनाए हुए हैं।

अखिलेश के बेहद करीबी हैं पूर्व मंत्री कमाल अख्तर

कमाल अख्तर की गिनती समाजवादी पार्टी के उन चुनिंदा नेताओं में होती है जो सीधे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बेहद भरोसेमंद और विश्वासपात्र माने जाते हैं।

वह पूर्व में सूबे के मंत्री भी रह चुके हैं और मुस्लिम समाज के साथ-साथ युवाओं में भी उनकी अच्छी पकड़ है। ऐसे में अखिलेश यादव अपने इस खास सिपहसालार को नाराज करने का जोखिम बिल्कुल नहीं उठाएंगे। सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही कमाल अख्तर को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर सकता है, जो न सिर्फ उनके समर्थकों को खुश कर देगा बल्कि विरोधियों के मुंह पर भी ताला लगा देगा।

सपा की अंदरूनी रार पर विरोधियों की नजर, बढ़ सकती है टेंशन

भले ही कमाल अख्तर के इस्तीफे के पीछे कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने की बात कही जा रही हो, लेकिन मौजूदा हालात ने समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।