सुबह उठते ही क्यों आने लगती हैं एक के बाद एक छींकें? बेडरूम की इन चीजों से जुड़ी हो सकती है वजह

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कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि सुबह आंख खुलते ही एक के बाद एक कई छींकें आने लगती हैं। कुछ देर बाद सब ठीक हो जाता है और दिन भर कोई परेशानी नहीं रहती। यह रोज का सिलसिला बन जाए तो मन में सवाल उठता है कि आखिर वजह क्या है। अक्सर इसका संबंध किसी गंभीर बीमारी से नहीं, बल्कि उसी बेडरूम से होता है, जिसमें हम पूरी रात सोते हैं। यहां संभावित वजहें बताई गई हैं, यह किसी बीमारी की पहचान नहीं है।

सुबह की छींकों की संभावित वजहें क्या हो सकती हैं

सबसे आम वजह मानी जाती है धूल और उसमें रहने वाले महीन कीड़े, जिन्हें डस्ट माइट कहा जाता है। ये गद्दे, तकिये, चादर और कालीन में जमा धूल में पनपते हैं। रात भर उसी बिस्तर में सोने से नाक लगातार इनके संपर्क में रहती है और सुबह उठने पर छींकों के रूप में शरीर प्रतिक्रिया दे सकता है। पुराना तकिया और सालों से धूप न लगा गद्दा इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।

दूसरी वजह बंद कमरे की हवा हो सकती है। रात भर दरवाजे और खिड़कियां बंद रहने से कमरे की हवा भारी हो जाती है और धूल के कण उसी में घूमते रहते हैं।

सुबह अचानक ठंडी हवा लगना या पंखे की तेज हवा सीधे चेहरे पर पड़ना भी कुछ लोगों की नाक को छींक के लिए उकसा सकता है। मौसम बदलने के दिनों में यह परेशानी और ज्यादा महसूस हो सकती है, खासकर तब जब घर में पालतू जानवर के बाल या रोंएं बिस्तर तक पहुंचते हों।

राहत के लिए घर पर क्या बदलाव किए जा सकते हैं

सबसे आसान शुरुआत बिस्तर की सफाई से होती है। चादर और तकिये के गिलाफ हफ्ते में एक बार धोएं, हो सके तो हल्के गर्म पानी से धोना बेहतर माना जाता है। गद्दे और तकिये को समय-समय पर अच्छी धूप लगाएं और गद्दे को पीटकर धूल झाड़ें।

बहुत पुराना तकिया बदल देना भी कई बार राहत दे देता है। कमरे में रोज थोड़ी देर खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें और फर्श की सफाई गीले पोछे से करें, ताकि धूल उड़े नहीं।

बिस्तर के आसपास किताबों, पुराने कपड़ों और सामान का ढेर न लगाएं, क्योंकि वहां धूल जल्दी जमती है। सोने से पहले कमरे की हल्की सफाई और बिस्तर झाड़ने की आदत भी मदद कर सकती है। सुबह उठकर ठंडे फर्श पर नंगे पांव चलने या एकदम ठंडा पानी पीने से भी कुछ लोगों को छींक आ जाती है, इसलिए सुबह की शुरुआत थोड़ी नरमी से करना ठीक रहता है। अगर घर में पालतू जानवर है तो उसे बिस्तर से दूर रखने की कोशिश करें, क्योंकि उसके रोंएं भी नाक को परेशान कर सकते हैं।

यह उपाय सामान्य सावधानियां हैं, हर व्यक्ति पर इनका असर अलग हो सकता है।

ध्यान रहे, अगर छींकें लंबे समय तक लगातार बनी रहें, नाक बंद रहने या सांस लेने में तकलीफ हो, छींक के साथ खून दिखे या बुखार भी रहे, तो घर के उपायों पर निर्भर न रहें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर को दिखाना ही सही कदम है, ताकि असली वजह की जांच हो सके।