UPI पेमेंट पर नया चार्ज लागू! जानिए क्या सच में डेबिट-क्रेडिट कार्ड से सस्ता पड़ेगा आपका फेवरेट ऐप?

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15 अक्टूबर 2026 से, 2,000 रुपए से ज्यादा के कुछ चुनिंदा यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी का चार्ज लगने वाला है, जिसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR का नाम दिया गया है। इस नए ऐलान के बाद से ही आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब रोजमर्रा के ऑनलाइन पेमेंट के लिए उन्हें वापस डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए?

लेकिन आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने साफ कर दिया है कि यह नया चार्ज आने के बाद भी यूपीआई ट्रांजैक्शन पारंपरिक डेबिट या क्रेडिट कार्ड के मुकाबले लगभग 80 प्रतिशत तक सस्ते पड़ने वाले हैं। आइए इस पूरे कैलकुलेशन को आसान भाषा में समझते हैं।

डेबिट और क्रेडिट कार्ड के मुकाबले कितना सस्ता है यूपीआई?

एनपीसीआई (NPCI) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, यूपीआई एमडीआर (UPI MDR) का पूरा हिसाब-किताब बेहद स्पष्ट है। सबसे राहत की बात यह है कि 2,000 रुपए तक के सभी ट्रांजैक्शन पर एमडीआर पूरी तरह से जीरो यानी बिल्कुल फ्री है। आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में होने वाले कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन का लगभग 96 फीसदी हिस्सा इसी दायरे में आता है।

यानी आपकी रोजमर्रा की छोटी-मोटी खरीदारी, जैसे दूध, सब्जी या किराने का सामान, पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगने वाला है। हां, अगर ट्रांजैक्शन 2,000 रुपए से ज्यादा का है, तभी उस पर 0.4 फीसदी का एमडीआर लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा भी 300 रुपए तय की गई है।

छोटे दुकानदारों और सड़क किनारे के विक्रेताओं को मिलेगी पूरी छूट

आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि क्या छोटे दुकानदारों पर भी इसका असर पड़ेगा? इसका जवाब है—बिल्कुल नहीं! सड़क किनारे सामान बेचने वाले ठेले-रेहड़ी वाले और अन्य छोटे व्यवसायों पर यह नया चार्ज अपने-आप लागू नहीं होगा।

पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (P2PM) कैटेगरी के तहत आने वाले ऐसे सभी क्यूआर कोड मर्चेंट, जो महीने में 1 लाख रुपए तक की पेमेंट लेते हैं, उनके सभी ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आपके आसपास की छोटी दुकानें और स्ट्रीट वेंडर बिना किसी नए चार्ज के आसानी से यूपीआई पेमेंट स्वीकार करना जारी रख सकते हैं, भले ही ग्राहक का भुगतान 2,000 रुपए से ज्यादा का क्यों न हो।

2,000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर कितना लगेगा चार्ज?

यदि आप 2,000 रुपए से ऊपर का डिजिटल भुगतान करते हैं, तो 0.4% के हिसाब से चार्ज की गणना इस प्रकार होगी:

  • 5,000 रुपए के भुगतान पर: 20 रुपए चार्ज लगेगा।
  • 10,000 रुपए के भुगतान पर: 40 रुपए चार्ज लगेगा।
  • 50,000 रुपए के भुगतान पर: 200 रुपए चार्ज लगेगा।
  • 75,000 रुपए या उससे अधिक पर: अधिकतम सीमा केवल 300 रुपए ही रहेगी।
जरूरी सेवाओं और कैपिटल मार्केट के लिए अलग नियम

कुछ खास और कम मार्जिन वाले सेक्टरों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एमडीआर नियमों में कुछ विशेष राहत दी है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल (ईंधन) और खेती से जुड़े सामान बेचने वाले सेक्टरों में 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर प्रतिशत के हिसाब से नहीं, बल्कि मात्र 5 रुपए का फ्लैट एमडीआर लगेगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि इन बिजनेस से जुड़े लोगों को अपने खर्चों का सटीक अनुमान मिल सके।

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इसके अलावा, कैपिटल मार्केट से जुड़े पेमेंट्स के लिए बहुत ही मामूली रेट तय किया गया है। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर्स से जुड़े लेनदेन पर सिर्फ 0.02 फीसदी का चार्ज लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा भी 300 रुपए होगी। उदाहरण के लिए, 10,000 रुपए के कैपिटल-मार्केट पेमेंट पर एमडीआर मात्र 2 रुपए ही बैठेगा।

क्या आम ग्राहकों के लिए यूपीआई इस्तेमाल करना महंगा हो जाएगा?

बिल्कुल नहीं! यह बात बहुत स्पष्ट रूप से समझ लीजिए कि यूपीआई का यह एमडीआर चार्ज किसी भी ग्राहक से नहीं वसूला जाएगा। यह पूरी तरह से एक पेमेंट प्रोसेसिंग चार्ज है, जिसे केवल मर्चेंट यानी दुकानदारों और कारोबारियों को देना होगा।

बैंकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मर्चेंट इस चार्ज का किसी भी तरह का वित्तीय बोझ ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा, फोनपे, गूगल पे या पेटीएम जैसे यूपीआई एप्लीकेशन प्रोवाइडर्स को भी एमडीआर के नाम पर ग्राहकों से कोई प्लेटफॉर्म फीस या छिपा हुआ चार्ज (Hidden Charges) वसूलने की बिल्कुल अनुमति नहीं दी गई है। आप बिना किसी पाबंदी, मंथली ट्रांजैक्शन कोटा या फ्री लिमिट की चिंता किए बिना पहले की तरह बेधड़क यूपीआई का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं।