महंगाई के बीच सरकार का बड़ा तोहफा! जानिए 8वें वेतन आयोग की इन बड़ी डिमांड्स का सच
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद काम की और बड़ी खबर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को लेकर अब तक 9 महीने का वक्त बीत चुका है और आयोग के पास अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए अब सिर्फ 9 महीने का ही समय बाकी है। इस बीच, ‘भारत पेंशनर्स समाज’ (BPS) ने आयोग के सामने कई ऐसी धमाकेदार मांगें रख दी हैं, जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान है। संगठन ने न्यूनतम पेंशन 45,000 रुपये करने से लेकर साल में चार बार महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने तक की बड़ी डिमांड कर दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दिनों दिल्ली में ‘भारत पेंशनर्स समाज’ ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी तरफ से कई प्रस्ताव रखे। मौजूदा व्यवस्था के तहत केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को साल में दो बार महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) मिलती है। लेकिन पेंशनर्स समाज का कहना है कि आज के समय में बढ़ती महंगाई को देखते हुए 6 महीने का इंतजार बहुत लंबा होता है, इसलिए हर तीन महीने में डीए में इजाफा किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही, संगठन ने यह भी मांग की है कि जब महंगाई भत्ता 25 प्रतिशत तक पहुंच जाए, तो उसे बेसिक पे (Basic Pay) के साथ मर्ज कर दिया जाना चाहिए। आपको बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 60 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, लेकिन डीए मर्जर को लेकर अभी तक कोई नियम लागू नहीं है।
फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम सैलरी पर सबसे बड़ा दांवपेंशनर्स समाज ने सिर्फ न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 45,000 रुपये करने की मांग ही नहीं की है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को 3.83 करने का प्रस्ताव भी रखा है।
इसके अलावा, संगठन ने फैमिली यूनिट के दायरे को भी बढ़ाने की जोरदार मांग उठाई है। अभी तक फैमिली यूनिट की संख्या 3 मानी जाती है, जिसे बढ़ाकर 5.2 करने की मांग की गई है।
आपको याद दिला दें कि देश में 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। इस पे कमीशन के पास अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुल 18 महीने का समय होता है, जिसमें से आधा वक्त बीत चुका है। आयोग की इसी अंतिम रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन में बदलाव को लेकर अंतिम फैसला लेगी। गौरतलब है कि हर 10 साल के अंतराल पर नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है।