मंदिर की कतार में नाच रही थी लड़की, पुलिस ने बीच में ही रोका, देखें वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो खूब चर्चा बटोर रहा है जिसमें एक युवा लड़की मंदिर की लाइन में खड़े होकर डांस करती दिख रही है। इस क्लिप में देखा जा सकता है कि लड़की एक गाने पर डांस कर रही है और दूसरा व्यक्ति फोन से उसका वीडियो रिकॉर्ड कर रहा है। तभी कुछ ही पलों में एक पुलिस अधिकारी उसके पास आता है और उसे तुरंत कतार से बाहर जाने के लिए कहता है। हालांकि वीडियो का ऑडियो इतना साफ नहीं है जिससे दोनों के बीच हुई सटीक बातचीत का पता चल सके, लेकिन पुलिसकर्मी का यह कदम इंटरनेट पर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। यह वीडियो किस मंदिर का है और किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किया गया है, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह घटना सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गई है और बहुत से यूजर्स का मानना है कि धार्मिक स्थलों को सोशल मीडिया कंटेंट बनाने की जगह नहीं बनाया जाना चाहिए। वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा कि पुलिस अधिकारी ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए बिल्कुल सही काम किया। आजकल लोग रील बनाने के लिए कहीं भी कैमरा निकाल लेते हैं और नाचना शुरू कर देते हैं, जबकि हर जगह ऐसा करना ठीक नहीं है।
कुछ दर्शकों ने तो वीडियो बनाने वाली लड़की के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी कर दी। एक अन्य यूजर ने सार्वजनिक जगहों पर वीडियो बनाने के बढ़ते मामलों पर तंज कसते हुए लिखा कि आजकल के टीनेजर्स में कंटेंट क्रिएशन का कीड़ा घुस गया है। वहीं कुछ लोगों ने तो उन ऐप्स पर ही पाबंदी लगाने की मांग कर दी जो इस तरह के व्यवहार को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने लिखा कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, इंस्टाग्राम को बैन कर देना चाहिए।
धार्मिक स्थलों पर सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के बढ़ते मामलों को देखकर कई लोगों को चारधाम यात्रा के वे नियम याद आ गए जहां मोबाइल ले जाने और रील्स बनाने पर रोक लगाई गई थी। एक यूजर ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि आज मंदिरों में ज्यादातर भीड़ उन लोगों की है जो इन्हें केवल एक टूरिस्ट स्पॉट (पर्यटन स्थल) समझते हैं। मंदिरों में फोन और कैमरे बैन कर दो, फिर देखो भीड़ अपने आप आधी हो जाएगी। एक अन्य यूजर ने लिखा कि मंदिर पर्यटन ने धर्म का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। मोबाइल और डांस पर बैन लगा दो तो आधी आबादी मंदिर जाना छोड़ देगी। असली भक्त शांत रहकर बिना किसी कैमरे के वैलिडेशन के भक्ति भाव से अपनी पूजा करते हैं।
एक और यूजर ने लिखा कि यह तब होता है जब आपका धर्म सिर्फ मूर्तियों की पूजा करने तक सीमित रह जाता है और आप ग्रंथों को पढ़ना व उनके मूल्यों का पालन करना भूल जाते हैं। पुलिसकर्मी के इस एक्शन का समर्थन करते हुए दूसरे लोगों ने कहा कि मंदिर भक्ति के लिए बने हैं, कंटेंट क्रिएशन के लिए नहीं। जिस दिन हम संस्कारों से ज्यादा व्यूज को अहमियत देने लगेंगे, हम उसी संस्कृति को खोना शुरू कर देंगे जिसे बचाने का हम दावा करते हैं। आधुनिकता को परंपरा का सम्मान करना चाहिए, न कि उसे मनोरंजन का साधन बनाना चाहिए।
यह घटना सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गई है और बहुत से यूजर्स का मानना है कि धार्मिक स्थलों को सोशल मीडिया कंटेंट बनाने की जगह नहीं बनाया जाना चाहिए। वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा कि पुलिस अधिकारी ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए बिल्कुल सही काम किया। आजकल लोग रील बनाने के लिए कहीं भी कैमरा निकाल लेते हैं और नाचना शुरू कर देते हैं, जबकि हर जगह ऐसा करना ठीक नहीं है।
कुछ दर्शकों ने तो वीडियो बनाने वाली लड़की के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी कर दी। एक अन्य यूजर ने सार्वजनिक जगहों पर वीडियो बनाने के बढ़ते मामलों पर तंज कसते हुए लिखा कि आजकल के टीनेजर्स में कंटेंट क्रिएशन का कीड़ा घुस गया है। वहीं कुछ लोगों ने तो उन ऐप्स पर ही पाबंदी लगाने की मांग कर दी जो इस तरह के व्यवहार को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने लिखा कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, इंस्टाग्राम को बैन कर देना चाहिए।
धार्मिक स्थलों पर सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के बढ़ते मामलों को देखकर कई लोगों को चारधाम यात्रा के वे नियम याद आ गए जहां मोबाइल ले जाने और रील्स बनाने पर रोक लगाई गई थी। एक यूजर ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि आज मंदिरों में ज्यादातर भीड़ उन लोगों की है जो इन्हें केवल एक टूरिस्ट स्पॉट (पर्यटन स्थल) समझते हैं। मंदिरों में फोन और कैमरे बैन कर दो, फिर देखो भीड़ अपने आप आधी हो जाएगी। एक अन्य यूजर ने लिखा कि मंदिर पर्यटन ने धर्म का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। मोबाइल और डांस पर बैन लगा दो तो आधी आबादी मंदिर जाना छोड़ देगी। असली भक्त शांत रहकर बिना किसी कैमरे के वैलिडेशन के भक्ति भाव से अपनी पूजा करते हैं।
एक और यूजर ने लिखा कि यह तब होता है जब आपका धर्म सिर्फ मूर्तियों की पूजा करने तक सीमित रह जाता है और आप ग्रंथों को पढ़ना व उनके मूल्यों का पालन करना भूल जाते हैं। पुलिसकर्मी के इस एक्शन का समर्थन करते हुए दूसरे लोगों ने कहा कि मंदिर भक्ति के लिए बने हैं, कंटेंट क्रिएशन के लिए नहीं। जिस दिन हम संस्कारों से ज्यादा व्यूज को अहमियत देने लगेंगे, हम उसी संस्कृति को खोना शुरू कर देंगे जिसे बचाने का हम दावा करते हैं। आधुनिकता को परंपरा का सम्मान करना चाहिए, न कि उसे मनोरंजन का साधन बनाना चाहिए।





