मुंह में जाते ही मक्खन की तरह क्यों घुलती है चॉकलेट? जानिए इसके पीछे का दिलचस्प विज्ञान

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जीभ पर धीरे-धीरे पिघलती हुई चॉकलेट जो अहसास देती है, उसकी तुलना किसी और खाने की चीज़ से नहीं की जा सकती। बाकी सख्त चीज़ों के मुकाबले चॉकलेट मुंह में पहुंचते ही बहुत तेजी से एक चिकने और मखमली तरल में बदल जाती है। ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं होता कि चॉकलेट नरम होती है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा विज्ञान छिपा है। चॉकलेट का पिघलना इसमें मौजूद फैट, उसकी बनावट और आपके मुंह के तापमान पर निर्भर करता है।
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कोको बटर का असली कमाल

चॉकलेट के इतनी आसानी से पिघलने की सबसे बड़ी वजह कोको बटर है। यह कोको बीन्स से मिलने वाला प्राकृतिक फैट है। कोको बटर की खासियत यह है कि यह इंसानी शरीर के तापमान के बहुत करीब पहुंचते ही पिघलने लगता है। अच्छी गुणवत्ता वाली चॉकलेट को इस तरह तैयार किया जाता है कि वह सामान्य कमरे के तापमान पर सख्त रहे, लेकिन जैसे ही आप उसे मुंह में रखें, वह तुरंत पिघलना शुरू कर दे। यही वजह है कि चॉकलेट का टेक्सचर इतना शानदार होता है।

मुंह का तापमान देता है सही गर्माहट

आमतौर पर हमारे मुंह के अंदर का तापमान 37°C के आसपास होता है। कोको बटर शरीर के इसी तापमान के आसपास पूरी तरह पिघलता है। जब आप चॉकलेट का एक टुकड़ा मुंह में रखते हैं, तो मुंह की गर्माहट कोको बटर को पिघलाने के लिए काफी होती है। इसी वजह से एक ठंडे कमरे में रखी सख्त चॉकलेट जीभ पर जाते ही चंद सेकेंडों में मलाईदार बन जाती है।


चॉकलेट की खास बनावट और टेम्परिंग

चॉकलेट सिर्फ कोको और चीनी का साधारण मिश्रण नहीं है। इसे बनाते समय कोको बटर को एक विशेष प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिसे टेम्परिंग कहते हैं। टेम्परिंग के दौरान कोको बटर को इस तरह जमाया जाता है कि इसमें सबसे स्थिर क्रिस्टल बनें, जिसे फॉर्म V कहा जाता है। यह प्रक्रिया चॉकलेट को एक चमकदार रूप, काटने पर एक कड़क आवाज और एक चिकना टेक्सचर देती है, जिससे यह मुंह में आसानी से घुल पाती है।

चीनी और कोको कणों का योगदान

चॉकलेट में चीनी और कोको के ठोस कण भी शामिल होते हैं। ये कण कोको बटर की तरह सीधे नहीं पिघलते, बल्कि पिघले हुए फैट के साथ मिल जाते हैं। जैसे ही कोको बटर पिघलता है, ये बारीक कण उस तरल में तैरने लगते हैं और एक बेहद चिकना अहसास पैदा करते हैं। चॉकलेट जितनी बारीक पिसी होगी, वह जीभ पर उतनी ही ज्यादा मखमली महसूस होगी।


मिल्क चॉकलेट का क्रीमी अहसास

मिल्क चॉकलेट में दूध के तत्व मौजूद होते हैं। इसमें डार्क चॉकलेट के मुकाबले चीनी की मात्रा थोड़ी ज्यादा और कोको का संतुलन अलग होता है। इसी कारण इसका टेक्सचर बहुत ज्यादा क्रीमी और नरम महसूस होता है। हालांकि, अलग-अलग चॉकलेट में कोको बटर, मिल्क फैट और चीनी की मात्रा भिन्न हो सकती है, इसलिए उनके पिघलने का अहसास भी थोड़ा अलग हो सकता है।

जब चॉकलेट तुरंत न पिघले

चॉकलेट के पिघलने की रफ्तार सिर्फ मुंह के तापमान पर निर्भर नहीं करती। उसकी बनावट, कोको बटर के क्रिस्टल और आप उसे किस माहौल में रखते हैं, इससे भी फर्क पड़ता है। अगर चॉकलेट को एक बार गर्मी लग जाए और वह दोबारा ठंडी हो, तो उसका क्रिस्टल ढांचा बदल सकता है। इससे उसके ऊपर एक सफेद परत जम जाती है, जिसे फैट ब्लूम कहते हैं। फैट ब्लूम वाली चॉकलेट खाने के लिए सुरक्षित होती है, लेकिन उसका टेक्सचर पहले जैसा चिकना नहीं रहता।

स्वाद और अहसास का बेहतरीन संगम

चॉकलेट को असल में एक खास अनुभव देने के लिए ही डिजाइन किया गया है। इसकी सख्त बनावट आपको काटने का अहसास देती है, जबकि कोको बटर मुंह की गर्माहट से उसे तुरंत पिघला देता है। जैसे-जैसे फैट पिघलता है, कोको और चीनी के स्वाद पूरे मुंह में फैल जाते हैं। यही वजह है कि चॉकलेट खाने का यह अहसास लोगों को इतना पसंद आता है।

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