Newspoint Logo

क्या आप जानते हैं? भारत के महज 200 रुपये आपको इस देश में बना सकते हैं 'लखपति'

Newspoint
ईरान की मुद्रा का नाम 'ईरानी रियाल' है, जिसे वर्तमान में दुनिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में गिना जाता है। विनिमय दरों पर नजर डालें तो स्थिति काफी चौंकाने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक, एक भारतीय रुपया लगभग 463.11 ईरानी रियाल के बराबर है। इस गणित को अगर आसान भाषा में समझा जाए, तो भारत के सिर्फ 216 रुपये ईरान में लाखो रियाल के बराबर हो जाते हैं।
Hero Image


यह अंतर इतना बड़ा है कि अगर कोई व्यक्ति ईरान में 10 लाख रियाल खर्च करता है, तो भारतीय मुद्रा में वह रकम महज 215 से 216 रुपये के आसपास ही होगी। यही कारण है कि वहां लेन-देन में बड़ी संख्या वाले नोटों का इस्तेमाल आम बात है और वहां की मुद्रा की वैल्यू लगातार गिरती जा रही है।


क्यों आई इतनी भारी गिरावट?

ईरानी रियाल की यह हालत रातों-रात नहीं हुई है, बल्कि यह एक लंबे आर्थिक संघर्ष का नतीजा है। विशेषज्ञों के अनुसार, साल 2018 के बाद से लेकर अब तक ईरानी रियाल अपनी करीब 90 प्रतिशत वैल्यू खो चुका है। इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान पर लगे कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं।

अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों के कारण ईरान का अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से तेल निर्यात, जो ईरान की कमाई का मुख्य जरिया था, उस पर लगी रोक ने देश की कमर तोड़ दी है। विदेशी निवेश का आना बंद हो गया है और देश को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

You may also like



इतिहास का सबसे बुरा दौर

दिसंबर 2025 का अंत ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बुरे सपने जैसा साबित हुआ। इस दौरान रियाल में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि अनौपचारिक बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख रियाल तक पहुंच गई। यह ईरान के आर्थिक इतिहास का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। इतनी भारी महंगाई और करेंसी की गिरती कीमतों ने वहां के आम लोगों के जीवन को मुश्किल बना दिया है। लोगों की खरीदने की क्षमता (Purchasing Power) बहुत कम हो गई है, जबकि चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं।

वर्ल्ड बैंक की चेतावनी

ईरान के आर्थिक हालात सुधरने के आसार फिलहाल कम ही नजर आ रहे हैं। वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं ने भी इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अक्टूबर 2025 में जारी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि साल 2025 में ईरान की जीडीपी में करीब 1.7 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इतना ही नहीं, यह संकट आगे भी जारी रहने की आशंका है। अनुमान है कि साल 2026 में यह गिरावट और बढ़कर 2.8 प्रतिशत तक हो सकती है।


ये आंकड़े बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आंतरिक आर्थिक कुप्रबंधन के कारण ईरान एक गहरे संकट में फंसा हुआ है। जहां एक तरफ दुनिया के कई देश अपनी मुद्रा को मजबूत करने में लगे हैं, वहीं ईरान के लिए अपनी मुद्रा की साख बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। भारतीय पर्यटकों या अर्थशास्त्र में रुचि रखने वालों के लिए यह एक दिलचस्प उदाहरण है कि कैसे भू-राजनीतिक फैसले किसी देश की मुद्रा की कीमत को जमीन पर ला सकते हैं।






Loving Newspoint? Download the app now
Newspoint