Iran Crisis: 27 राज्यों में हिंसा का तांडव, इंटरनेट ठप, क्या अमेरिका करने वाला है कोई बड़ा हमला?
बीते 10 दिनों से जारी इन विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक कम से कम 35 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। मरने वालों में न केवल प्रदर्शनकारी शामिल हैं, बल्कि 4 मासूम बच्चे और 2 सुरक्षाकर्मी भी इस हिंसा की भेंट चढ़ गए हैं। ईरान सरकार ने स्थिति पर काबू पाने के लिए सख्ती का रास्ता अपनाया है और लगभग 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया है।
हिंसा की आग देश के 31 में से 27 राज्यों तक फैल चुकी है और 250 से ज्यादा जगहों पर लोग सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें आम हो गई हैं, जिससे माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। खबरों की मानें तो विरोध को दबाने के लिए कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि प्रदर्शनकारी आपस में संपर्क न कर सकें।
इस गुस्से की मुख्य वजह ईरान पर आया "भीषण आर्थिक संकट" (Severe Economic Crisis) है।। ईरान की अर्थव्यवस्था अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। हाल ही में इजरायल के साथ हुए 12 दिनों के संघर्ष और अमेरिकी एयर स्ट्राइक ने देश की कमर तोड़ दी है। दिसंबर महीने में ईरानी मुद्रा अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time low) पर पहुंच गई थी। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता का गुस्सा अब सरकार के खिलाफ फूट पड़ा है। यह 2022 के बाद पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर लोग सड़कों पर उतरे हैं।
ईरान के इन बिगड़ते हालातों पर अमेरिका की भी पैनी नजर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि “शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को जबरन मारा जा रहा है। हम उनके बचाव के लिए जरूर आएंगे।"
ट्रंप के इस बयान ने भू-राजनीतिक पारे को और चढ़ा दिया है। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि उनकी 'मदद' का स्वरूप क्या होगा। क्या वे बातचीत के जरिए दबाव बनाएंगे या फिर कोई सैन्य कदम उठाएंगे? वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद दुनिया भर के जानकारों को डर है कि कहीं मध्य पूर्व में फिर से कोई बड़ा संघर्ष न छिड़ जाए।
अनिश्चितता का माहौल
फिलहाल ईरान में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। एक तरफ जनता अपनी बुनियादी जरूरतों और गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर आक्रोशित है, तो दूसरी तरफ सरकार का दमनकारी रवैया जारी है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और आंतरिक कलह के बीच ईरान का भविष्य अधर में लटका हुआ नजर आता है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह विरोध प्रदर्शन किसी बड़े बदलाव की ओर जाएगा या फिर इसे भी सख्ती से कुचल दिया जाएगा।
हिंसा की आग देश के 31 में से 27 राज्यों तक फैल चुकी है और 250 से ज्यादा जगहों पर लोग सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें आम हो गई हैं, जिससे माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। खबरों की मानें तो विरोध को दबाने के लिए कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि प्रदर्शनकारी आपस में संपर्क न कर सकें।
क्यो जल रहा है ईरान
इस गुस्से की मुख्य वजह ईरान पर आया "भीषण आर्थिक संकट" (Severe Economic Crisis) है।। ईरान की अर्थव्यवस्था अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। हाल ही में इजरायल के साथ हुए 12 दिनों के संघर्ष और अमेरिकी एयर स्ट्राइक ने देश की कमर तोड़ दी है। दिसंबर महीने में ईरानी मुद्रा अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time low) पर पहुंच गई थी। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता का गुस्सा अब सरकार के खिलाफ फूट पड़ा है। यह 2022 के बाद पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर लोग सड़कों पर उतरे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनी
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ईरान के इन बिगड़ते हालातों पर अमेरिका की भी पैनी नजर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि “शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को जबरन मारा जा रहा है। हम उनके बचाव के लिए जरूर आएंगे।"
ट्रंप के इस बयान ने भू-राजनीतिक पारे को और चढ़ा दिया है। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि उनकी 'मदद' का स्वरूप क्या होगा। क्या वे बातचीत के जरिए दबाव बनाएंगे या फिर कोई सैन्य कदम उठाएंगे? वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद दुनिया भर के जानकारों को डर है कि कहीं मध्य पूर्व में फिर से कोई बड़ा संघर्ष न छिड़ जाए।









