साइबर अटैक या स्टारलिंक? जानिए ईरान के प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए अमेरिका के पास क्या हैं विकल्प
ईरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए व्हाइट हाउस में बैठकों का दौर जारी है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप "दखल" देने के लिए कई विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, इसमें अमेरिकी सेना को ईरान की जमीन पर उतारने का कोई प्लान नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका के पास विकल्पों की कमी है।
ट्रंप प्रशासन जिन कदमों पर विचार कर रहा है, उनमें सबसे प्रमुख है ईरान की सिक्योरिटी सर्विसेज को निशाना बनाना। ये वही सुरक्षा बल हैं जिनका इस्तेमाल सरकार प्रदर्शनकारियों को दबाने और उन पर गोलियां चलाने के लिए कर रही है। इसके अलावा, अमेरिका साइबर वॉर का रास्ता भी अपना सकता है। जिसके तहत ईरान के सैन्य ठिकानों या खामेनेई शासन के महत्वपूर्ण डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमले किए जा सकते हैं।
एक और महत्वपूर्ण विकल्प जिस पर चर्चा हो रही है, वह है ईरान के एनर्जी और बैंकिंग सेक्टर पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाना। इससे सरकार पर आर्थिक दबाव बड़ सकता है। साथ ही, प्रदर्शनकारियों को दुनिया से जोड़े रखने के लिए अमेरिका 'स्टारलिंक' जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा मुहैया कराने पर भी विचार कर रहा है। यह कदम बेहद अहम साबित हो सकता है क्योंकि ईरानी सरकार अक्सर विरोध के स्वर दबाने के लिए इंटरनेट बंद कर देती है। 2022 में भी महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान इसी तरह की तकनीक की मदद लेने की बात उठी थी।
ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी हमले की सूरत में वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और कमर्शियल सेंटर्स को निशाना बनाएगा। यह धमकी बताती है कि स्थिति कितनी तनावपूर्ण हो चुकी है।
आंकड़ों की बात करें तो पिछले 15 दिनों में 10,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सबसे दुखद पहलू यह है कि इन गिरफ्तार लोगों में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 169 बच्चों को हिरासत में लिया गया है।
ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने ऐलान किया है कि जो भी लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हैं, उन्हें 'खुदा का दुश्मन' (मोहादाब) माना जाएगा। ईरान के कानून के मुताबिक, खुदा के दुश्मन के लिए सिर्फ एक ही सजा है और वह है मौत। इस तरह के बयानों से साफ है कि सरकार किसी भी हद तक जाकर इस आंदोलन को कुचलना चाहती है।
डोनाल्ड ट्रंप का अगला कदम क्या होगा, इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। क्या अमेरिका सिर्फ प्रतिबंधों तक सीमित रहेगा या कोई बड़ा एक्शन लेगा? क्या ईरानी जनता का यह बलिदान रंग लाएगा या फिर इसे भी बंदूक की नोक पर दबा दिया जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएंगे, लेकिन इतना तय है कि ईरान अब वह नहीं रहा जो कुछ हफ्ते पहले था। वहां बदलाव की जो आंधी उठी है, उसे रोकना अब आसान नहीं होगा।
ट्रंप प्रशासन जिन कदमों पर विचार कर रहा है, उनमें सबसे प्रमुख है ईरान की सिक्योरिटी सर्विसेज को निशाना बनाना। ये वही सुरक्षा बल हैं जिनका इस्तेमाल सरकार प्रदर्शनकारियों को दबाने और उन पर गोलियां चलाने के लिए कर रही है। इसके अलावा, अमेरिका साइबर वॉर का रास्ता भी अपना सकता है। जिसके तहत ईरान के सैन्य ठिकानों या खामेनेई शासन के महत्वपूर्ण डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमले किए जा सकते हैं।
एक और महत्वपूर्ण विकल्प जिस पर चर्चा हो रही है, वह है ईरान के एनर्जी और बैंकिंग सेक्टर पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाना। इससे सरकार पर आर्थिक दबाव बड़ सकता है। साथ ही, प्रदर्शनकारियों को दुनिया से जोड़े रखने के लिए अमेरिका 'स्टारलिंक' जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा मुहैया कराने पर भी विचार कर रहा है। यह कदम बेहद अहम साबित हो सकता है क्योंकि ईरानी सरकार अक्सर विरोध के स्वर दबाने के लिए इंटरनेट बंद कर देती है। 2022 में भी महसा अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान इसी तरह की तकनीक की मदद लेने की बात उठी थी।
ईरान की खुली धमकी
अमेरिका की तरफ से मिल रही चेतावनियों के बाद ईरान भी चुप नहीं है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने अमेरिका को सीधे तौर पर ललकारा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने किसी भी तरह का सैन्य हस्तक्षेप किया, तो ईरान भी चूप नही बैठेगा।ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी हमले की सूरत में वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और कमर्शियल सेंटर्स को निशाना बनाएगा। यह धमकी बताती है कि स्थिति कितनी तनावपूर्ण हो चुकी है।
ईरान में बिगड़ते हालात
ईरान के भीतर से जो खबरें आ रही हैं, वे दिल दहला देने वाली हैं। मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में ही 500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। सड़कों पर खून बह रहा है, लेकिन लोगों का हौसला नहीं टूटा है।आंकड़ों की बात करें तो पिछले 15 दिनों में 10,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सबसे दुखद पहलू यह है कि इन गिरफ्तार लोगों में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 169 बच्चों को हिरासत में लिया गया है।
ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने ऐलान किया है कि जो भी लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हैं, उन्हें 'खुदा का दुश्मन' (मोहादाब) माना जाएगा। ईरान के कानून के मुताबिक, खुदा के दुश्मन के लिए सिर्फ एक ही सजा है और वह है मौत। इस तरह के बयानों से साफ है कि सरकार किसी भी हद तक जाकर इस आंदोलन को कुचलना चाहती है।
अब आगे क्या होगा?
ईरान में जारी यह संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। एक तरफ निहत्थी जनता है जो रजा पहलवी जैसे निर्वासित नेताओं और पश्चिमी देशों की ओर उम्मीद से देख रही है, तो दूसरी तरफ एक कट्टरपंथी सरकार है जो अपनी सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।डोनाल्ड ट्रंप का अगला कदम क्या होगा, इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। क्या अमेरिका सिर्फ प्रतिबंधों तक सीमित रहेगा या कोई बड़ा एक्शन लेगा? क्या ईरानी जनता का यह बलिदान रंग लाएगा या फिर इसे भी बंदूक की नोक पर दबा दिया जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएंगे, लेकिन इतना तय है कि ईरान अब वह नहीं रहा जो कुछ हफ्ते पहले था। वहां बदलाव की जो आंधी उठी है, उसे रोकना अब आसान नहीं होगा।
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