पाकिस्तान की नदी अफगानिस्तान में उगल रही सोना, सब काम छोड़कर निकालने को टूट पड़े अफगानी, खोद रहे पहाड़

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काबुल: पूर्वी अफगानिस्तान के हिंदू कुश के पहाड़ों में अभी भी चोटियों पर बर्फ जमी हुई है, वहीं पर नीचे घाटी में एक अलग ही नजारा देखन को मिल रहा है। पाकिस्तान की सीमा के पास स्थित इस इलाके में कुनार नदी की पथरीली तलहटी में सैकड़ों लोग सोना तलाश रहे हैं। अफगानिस्तान में जहां लोगों के पास आय का कोई साधन नहीं है, लोग लंबा सफर कर कुनार नदी घाटी में पहुंच रहे हैं, ताकि सोने के चमकते कणों को खोज सकें।
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सोने की तलाश में घंटों का सफर कर पहुंच रहे
दरअसल, कुनार नदी में सोना मिलने की खबर के बाद अफगानिस्तान में दूर-दूर से लोग यहां पहुंच रहे हैं। इसमें कई तो सात-सात घंटे का सफर पूरा करके यहां पहुंचे हैं। बड़े पैमाने पर फैली बेरोजगारी और आर्थिक मुश्किलों के बीच गुजारा करने के लिए ये लोग नदी की तलहटी से सोना निकालने के पारंपरिक तरीकों पर ज्यादा से ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं।

50 साल से शहजादा गोल्लाल भी ऐसे ही लोगों में से हैं, जिन्होंने काबुल में निर्माण कार्य को छोड़कर यह काम शुरू किया था। शहजादा के आठ बच्चे हैं। वे कहते हैं कि देश में रोजगार के लिए कुछ नहीं है। इसलिए हमने खुद ही काम पैदा कर लिया है। उन्होंने बताया कि तलाश के दौरान जो सोने के टुकड़े मिलते हैं, वे आमतौर पर गेहूं के दाने से भी छोटे होते हैं।

कैसे तलाश करते हैं सोना?
कुनार नदी पाकिस्तान से होकर अफगानिस्तान में आती है। पाकिस्तान में इसे चितराल के नाम से जाना जाता है। सोना तलाश करने के लिए लोग पारंपरिक तरीका अपनाते हैं। नदी के बहाव की दिशा में सैकड़ों लोग रेतीली जमीन खोदते हैं। फिर उसे एक बोरी में भरकर नीचे लाते हैं और उसे एक छलनी पर खाली कर देते हैं। फिर रेत से सोना अलग करते हैं।

कुछ लोग लंबे लकड़ी के हत्थे वाले पीले रंग के प्लास्टिक के डिब्बों में नदी का पानी डालते हैं। इसके हल्की मिट्टी बह जाती है और सोने के भारी कण रह जाते हैं। हालांकि, ये काम हाड़तोड़ मेहनत वाला है, लेकिन अच्छी बात है कि इसके बदले उन्हें ठीक-ठाक कमाई हो जाती है।

एक सप्ताह में 8000 अफगानी की कमाई
इसी काम में लगे 35 वर्षीय गुल जान कहते हैं कि हमें एक सप्ताह में लगभग 1 ग्राम तक सोना मिल जाता है। इसकी कीमत 8000 अफगानी (लगभग 125 डॉलर) तक हो सकती है। अफगानिस्तान में बेरोजगारी के हालात को देखते हुए यह कमाई बड़ी बात है। अफगानिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है लेकिन दशकों तक चले संघर्ष के चलते इसका शायद ही कभी सही से इस्तेमाल हो पाया। हालांकि, अब तालिबान अधिकारी देश के विभिन्न हिस्सों में खनन को बढ़ावा दे रहे हैं।